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"यह फुटबॉल नहीं, राजनीति है": फीफा वर्ल्ड कप से बाहर होने पर भड़के ईरानी कप्तान मेहदी तारेमी, अमेरिका पर लगाए प्रताड़ना के गंभीर आरोप

by admin@bebak24.com on | 2026-06-28 14:23:15

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"यह फुटबॉल नहीं, राजनीति है": फीफा वर्ल्ड कप से बाहर होने पर भड़के ईरानी कप्तान मेहदी तारेमी, अमेरिका पर लगाए प्रताड़ना के गंभीर आरोप

खेल डेस्क (बेबाक24): मैदान के बाहर युद्ध और कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की छाया में खेल रही ईरान की फुटबॉल टीम का फीफा वर्ल्ड कप 2026 का सफर बेहद दर्दनाक अंदाज में खत्म हो गया है। ग्रुप-जी (Group-G) के एक बेहद नाटकीय घटनाक्रम में अल्जीरिया और ऑस्ट्रिया के मैच ड्रॉ होने के कारण ईरान मामूली अंतर से नॉकआउट (अंतिम 32) की रेस से बाहर हो गया।

टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद ईरान के कप्तान मेहदी तारेमी और मुख्य कोच अमीर ग़ालेनोई का गुस्सा फूट पड़ा। एक भावुक और तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान तारेमी ने इसे "इतिहास का सबसे खराब वर्ल्ड कप" करार देते हुए मेजबान अमेरिका पर ईरानी टीम को मानसिक और लॉजिस्टिक तौर पर प्रताड़ित करने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।

1. अल्जीरिया-ऑस्ट्रिया मैच के आखिरी मिनट ने तोड़ा ईरान का दिल

ग्रुप-जी में ईरान की टीम बेल्जियम, न्यूजीलैंड और मिस्र के खिलाफ लगातार तीन ड्रॉ खेलकर 3 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रही।

  • अंतिम क्षणों का ड्रामा: शनिवार रात जब अल्जीरिया ने स्टॉपेज टाइम में ऑस्ट्रिया के खिलाफ 3-2 की बढ़त बनाई, तो लगा कि ईरान टाईब्रेकर के आधार पर अगले दौर में पहुंच जाएगा।

  • उम्मीदें टूटीं: लेकिन मैच के आखिरी पलों में ऑस्ट्रिया ने बराबरी का गोल (3-3) दाग दिया। इस ड्रॉ ने ईरान की विदाई तय कर दी और टीम महज एक स्थान से इतिहास रचने से चूक गई।

2. "खिलाड़ियों को रिकवरी का वक्त तक नहीं मिला" — मेहदी तारेमी

ईरानी कप्तान मेहदी तारेमी ने अमेरिकी प्रशासन और वर्ल्ड कप आयोजकों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हमारी टीम के साथ 'भेदभावपूर्ण' व्यवहार किया गया। उन्होंने निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए:

  • वीजा रिजेक्शन: ईरान के कई प्रमुख सहयोगी स्टाफ और तकनीकी सदस्यों को अमेरिका ने वीजा देने से साफ मना कर दिया, जिससे खिलाड़ियों को पूरी मदद नहीं मिल सकी।

  • थका देने वाली यात्राएं: राजनीतिक कारणों से टीम को मैच से ठीक एक दिन पहले यात्रा की अनुमति मिलती थी और मैच खत्म होते ही तुरंत अमेरिका छोड़कर मेक्सिको के तिजुआना (बेस कैंप) लौटना पड़ता था। तारेमी ने कहा, "सिएटल और तिजुआना के बीच इस लगातार यात्रा ने खिलाड़ियों को शारीरिक रूप से तोड़ दिया, हमें रिकवरी का समय ही नहीं मिला। यह बिल्कुल भी निष्पक्ष नहीं है।"

  • प्रैक्टिस मैच पर रोक: युद्ध और प्रतिबंधों के चलते टूर्नामेंट से पहले किसी भी देश ने ईरान के साथ अभ्यास मैच खेलने की हिम्मत नहीं दिखाई।

3. "47 कोचों से सवाल पूछा, सब मौन रहे" — कोच ग़ालेनोई

ईरान के मुख्य कोच अमीर ग़ालेनोई भी व्यवस्था पर जमकर बरसे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "इन युवा ईरानी खिलाड़ियों ने बंदूक की नोक और भारी तनाव के बीच जो खेल दिखाया, उसे इतिहास में दर्ज किया जाना चाहिए। मेजबान ने हमारे साथ सबसे घटिया व्यवहार किया।"

ग़ालेनोई ने खेल भावना पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने फीफा वर्ल्ड कप के अन्य 47 देशों के कोचों से इस अनुचित व्यवहार के खिलाफ सवाल पूछा था, लेकिन बेल्जियम के कोच रूडी गार्सिया (जिन्होंने कहा कि हम यहां फुटबॉल के लिए हैं, राजनीति के लिए नहीं) को छोड़कर किसी भी देश के कोच ने ईरान के समर्थन में एक शब्द नहीं बोला।

4. मैदान के बाहर महायुद्ध का साया

ईरानी टीम का यह सफर केवल खेल तक सीमित नहीं था। गौरतलब है कि इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के सैन्य एक्शन के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध छिड़ गया था। शनिवार रात को भी जब टीम मैदान पर थी, तब बाहर ईरान द्वारा बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े पर मिसाइल दागने और जवाब में अमेरिका द्वारा ईरान के 10 ठिकानों पर बमबारी की खबरें आ रही थीं। ऐसे खौफनाक माहौल के बीच खिलाड़ी मैदान पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

बेबाक24 टेक

फीफा वर्ल्ड कप को दुनिया को जोड़ने वाला मंच कहा जाता है, लेकिन ईरान की कहानी ने यह साबित कर दिया है कि खेल कभी भी राजनीति और युद्ध से अछूता नहीं रह सकता। मैदान पर मामूली अंतर से बाहर होना ईरान के लिए खेल की हार हो सकती है, लेकिन मैदान के बाहर जो उनके साथ हुआ, वह फीफा (FIFA) के 'फेयर प्ले' के दावों पर एक बड़ा तमाचा है।

कप्तान मेहदी तारेमी और कोच का गुस्सा पूरी तरह जायज है। किसी टीम को मैच से महज 24 घंटे पहले ट्रेवल की अनुमति देना और मैच खत्म होते ही देश से बाहर खदेड़ देना किसी मानसिक उत्पीड़न से कम नहीं है। अमेरिका ने सुरक्षा और प्रतिबंधों का बहाना बनाकर एक संप्रभु देश की खेल टीम का गला घोंटने की कोशिश की। इसके बावजूद, बेल्जियम और मिस्र जैसी दिग्गज टीमों को ड्रॉ पर रोकना यह दिखाता है कि ईरानी खिलाड़ियों में कितनी जिद और जज्बा था। विश्व कप आयोजक भले ही इस टूर्नामेंट को सफल कहें, लेकिन इतिहास इसे एक ऐसी याद के रूप में दर्ज करेगा जहां फुटबॉल हार गई और भू-राजनीतिक नफरत जीत गई।



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