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कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय नेपाल में फंसे: विदेश मंत्रालय ने जारी की सख्त एडवाइजरी, कहा— 'बिना वीजा-परमिट न करें यात्रा'

by admin@bebak24.com on | 2026-06-28 14:15:15

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कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय नेपाल में फंसे: विदेश मंत्रालय ने जारी की सख्त एडवाइजरी, कहा— 'बिना वीजा-परमिट न करें यात्रा'

नई दिल्ली/काठमांडू: कैलाश मानसरोवर की धार्मिक यात्रा पर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त एडवाइजरी जारी की है। निजी टूर ऑपरेटर्स (Private Tour Operators) के भरोसे यात्रा पर निकले कई भारतीय नागरिक इस समय नेपाल में फंस गए हैं, जिसके बाद भारत सरकार को यह कदम उठाना पड़ा है।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कई यात्रियों के नेपाल में फंसे होने और उनके द्वारा मदद की गुहार लगाए जाने के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह गाइडलाइन जारी की गई है।

1. बिना वीजा और परमिट के यात्रा पर निकले लोग

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में भारतीयों के फंसने की मुख्य वजह निजी टूर ऑपरेटर्स की बड़ी लापरवाही और यात्रियों की असावधानी है।

  • दस्तावेजों की कमी: ये भारतीय नागरिक निजी ऑपरेटरों के माध्यम से नेपाल तो पहुंच गए, लेकिन तिब्बत (चीन) में प्रवेश करने के लिए आवश्यक आधिकारिक परमिट और चीनी वीजा उनके पास नहीं थे।

  • नेपाल में अटकी यात्रा: उचित दस्तावेजों और चीन सरकार की मंजूरी के बिना आगे बढ़ने की अनुमति न मिलने के कारण इन यात्रियों को नेपाल-चीन सीमा या काठमांडू में ही रुकना पड़ा है, जिससे उनके सामने रहने-खाने और सुरक्षा का संकट खड़ा हो गया है।

2. विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी: यात्रियों के लिए मुख्य बातें

स्थिति को संभालते हुए विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को भविष्य की यात्राओं के लिए ये कड़े निर्देश दिए हैं:

  • दस्तावेजों की पूरी जांच: भारतीय नागरिक तब तक कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए घर से न निकलें, जब तक उनके हाथ में चीन सरकार द्वारा जारी वैध वीजा और यात्रा परमिट न आ जाए।

  • टूर ऑपरेटर्स का वेरिफिकेशन: मंत्रालय ने यात्रियों को सख्त हिदायत दी है कि वे किसी भी निजी टूर ऑपरेटर को पैसे देने या उनके साथ बुकिंग करने से पहले उनकी साख, क्रेडेंशियल्स और सरकारी रजिस्ट्रेशन की अच्छी तरह जांच (Verification) कर लें।

बेबाक24 टेक

कैलाश मानसरोवर की यात्रा आस्था का विषय है, लेकिन हर साल हजारों भारतीय नागरिक निजी ट्रैवल एजेंसियों के दावों और लापरवाही का शिकार होकर अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर फंस जाते हैं। तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) चीन के नियंत्रण में आता है, जहां प्रवेश के नियम बेहद कड़े और संवेदनशील हैं। निजी ऑपरेटर्स अक्सर मुनाफे के चक्कर में यात्रियों को नेपाल तक ले आते हैं और बाद में 'ग्रुप वीजा' या 'परमिट' अटकने का बहाना बनाकर उन्हें अधर में छोड़ देते हैं।

विदेश मंत्रालय की यह एडवाइजरी एक टाइमली वेक-अप कॉल (Wake-up Call) है। तीर्थयात्रियों को यह समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं में केवल आस्था काफी नहीं है; वैध पासपोर्ट, वीजा और परमिट जैसे कानूनी दस्तावेज सबसे प्राथमिक जरूरत हैं। इस घटना के बाद नेपाल में भारतीय दूतावास (Embassy of India, Kathmandu) फंसे हुए नागरिकों को निकालने और सुरक्षित वापस लाने के लिए स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है, लेकिन भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचने के लिए यात्रियों को खुद जागरूक होना होगा और अनधिकृत एजेंटों के झांसे में आने से बचना होगा।



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