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"वादे तोड़ना अमेरिका की फितरत": हमलों के बाद ईरानी विदेश मंत्रालय ने की तीखी निंदा, बताया सीज़फायर का खुला उल्लंघन

by admin@bebak24.com on | 2026-06-28 14:14:24

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"वादे तोड़ना अमेरिका की फितरत": हमलों के बाद ईरानी विदेश मंत्रालय ने की तीखी निंदा, बताया सीज़फायर का खुला उल्लंघन

तेहरान: अमेरिका द्वारा होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर की गई भीषण बमबारी के बाद अब ईरान सरकार की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आ गई है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक कड़ा बयान जारी कर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की पुरजोर निंदा की है। ईरान ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मौजूदा युद्धविराम समझौते का 'स्पष्ट उल्लंघन' करार देते हुए अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने की बात कही है।

इस बयान के बाद खाड़ी देशों में चल रहा तनाव अब एक बेहद गंभीर और अनियंत्रित दौर में पहुंच गया है।

1. "वादे तोड़ना अमेरिका का नेचर" — ईरान का तीखा हमला

बीबीसी फारसी सेवा के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सैन्य हवाई हमलों की टाइमिंग और उसकी नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा:

"अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं (Commitments) को जरा भी महत्व नहीं देता है और वादे तोड़ना उनकी 'नेचर' (फितरत) का हिस्सा बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की दुहाई देने वाला अमेरिका खुद सीज़फायर को मटियामेट करने पर तुला हुआ है।"

2. संप्रभुता की रक्षा का अधिकार; कूटनीतिक रास्ते बंद

ईरानी विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि वह अपने सैन्य ठिकानों पर हुए इस नुकसान को चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगा। बयान में जोर देकर कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत 'ईरान को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने का पूरा अधिकार' है और वह अपने तरीके से इसका जवाब देने के लिए स्वतंत्र है। ईरान ने अमेरिका के उन दावों को भी खारिज करने की कोशिश की, जिसमें वाशिंगटन ने इस हमले को 'जवाबी कार्रवाई' बताया था।

3. क्या है विवाद की जड़?

इस महाटकराव की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर 'एम/टी किकू' (M/T KIKU) पर आत्मघाती ड्रोन से हमला किया था, जिसमें 20 लाख बैरल कच्चा तेल लदा था। इसके जवाब में अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने शनिवार रात को ईरान के भीतर घुसकर उसके 10 मिसाइल, ड्रोन स्टोरेज और रडार ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'अस्तित्व मिटाने' की भी धमकी दी थी।

बेबाक24 टेक

ईरानी विदेश मंत्रालय का यह बयान साफ करता है कि मिडिल ईस्ट में कूटनीति और बातचीत के सारे दरवाजे अब लगभग बंद हो चुके हैं। ईरान का यह कहना कि 'वादे तोड़ना अमेरिका की फितरत है', सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की आक्रामक और अस्थिर नीतियों पर प्रहार है। लेकिन केवल कूटनीतिक शब्दों से परे, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) ने पहले ही कुवैत और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े पर मिसाइलें दागकर अपनी मंशा साफ कर दी है।

यह बयान दरअसल वैश्विक समुदाय के सामने खुद को 'पीड़ित' दिखाने और अपने आगामी सैन्य पलटवार को जायज ठहराने की ईरान की एक सोची-समझी रणनीति है। अमेरिका ने जहां ईरान के मिसाइल सेंटर्स को निशाना बनाया, वहीं ईरान अब इस पूरे क्षेत्र को अशांत करके अंतरराष्ट्रीय तेल सप्लाई को ठप करने की धमकी दे रहा है। दोनों महाशक्तियों के बीच का यह 'अहंकार का टकराव' अब एक ऐसे मुहाने पर है, जहां से पीछे हटना दोनों के लिए साख का सवाल बन चुका है, और इसका खामियाजा आने वाले दिनों में पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है।



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