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डिग्री नहीं, अब काम सिखाएगी सरकार! 'प्रोजेक्ट प्रवीण' से 36 हजार युवाओं के हाथों को मिलेगा हुनर

by on | 2026-06-28 00:16:21

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डिग्री नहीं, अब काम सिखाएगी सरकार! 'प्रोजेक्ट प्रवीण' से 36 हजार युवाओं के हाथों को मिलेगा हुनर

लखनऊ। केवल कागजी डिग्री बांटने से बेरोजगारी का कलंक नहीं मिटने वाला—शायद इसी कड़वी हकीकत को भांपते हुए योगी सरकार अब युवाओं के हाथों को हुनरमंद बनाने की कवायद में जुटी है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपनी महत्वाकांक्षी योजना 'प्रोजेक्ट प्रवीण' का खाका खींच दिया है। इस बार का सीधा निशाना है—माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले 36,103 छात्र-छात्राएं, जिन्हें किताबी ज्ञान के साथ-साथ सीधे रोजगार से जुड़ने वाला शॉर्ट-टर्म स्किल ट्रेनिंग (एसटीटी) प्रोग्राम दिया जाएगा।

​व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने दोटूक कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा साफ है; युवाओं को सिर्फ डिग्रीधारी बेरोजगारों की फौज नहीं बनाना है, बल्कि उन्हें मार्केट की डिमांड के हिसाब से तैयार करना है ताकि वे खुद अपना रोजगार खड़ा कर सकें।

​ बाजार की जरूरत वालेक्टर्स पर फोकस: कहाँ चमकेगी किस्मत?

​सरकारी दावों की मानें तो ट्रेनिंग उन सेक्टर्स में दी जाएगी जहां वाकई नौकरियां हैं या काम शुरू करने की गुंजाइश है। इनमें शामिल हैं:

  • आईटी-आईटीईएस (IT-ITES) व इलेक्ट्रॉनिक्स
  • हेल्थकेयर और ब्यूटी एंड वेलनेस
  • मैनेजमेंट, अपैरल (कपड़ा उद्योग)
  • ग्रीन जॉब्स और एग्रीकल्चर (कृषि)

​36 हजार का टारगेट; आगरा से सोनभद्र तक की तैयारी

​इस मिशन के तहत आगरा, बरेली, आजमगढ़, ललितपुर, वाराणसी, रामपुर, शाहजहांपुर, जालौन और सोनभद्र जैसे तमाम जिलों के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। यहाँ सूचिबद्ध ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स (TPs) के जरिए बच्चों को सीधे क्लासरूम में ही हुनर सिखाया जाएगा।

​ 300 घंटे का कड़ा 'वर्कआउट', एक बैच में सिर्फ 35 छात्र

​भीड़ जुटाकर खानापूर्ति करने के पुराने ढर्रे को बदलने की कोशिश दिख रही है।

सख्त नियम: सरकार ने साफ कर दिया है कि एक बैच में 35 से ज्यादा छात्र नहीं होंगे, ताकि ट्रेनर हर बच्चे पर ध्यान दे सके। यह पूरा कोर्स 300 घंटे का होगा, जिसमें थ्योरी से ज्यादा फोकस प्रैक्टिकल नॉलेज पर रहेगा ताकि सर्टिफिकेट सिर्फ दीवार पर टांगने के काम न आए।


​अल्टीमेटम चालू: 15 जुलाई से शुरू होंगी क्लासें, ढिलाई की तो खैर नहीं!

​उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने इस बार ट्रेनिंग एजेंसियों की ढीली कमान को कस दिया है।

  • डेडलाइन: हर हाल में 15 जुलाई 2026 से कक्षाएं शुरू करनी होंगी।
  • पारदर्शिता: बैच शुरू होने के 7 दिनों के भीतर बच्चों को किताबें/सामग्री बांटकर उसकी तस्वीरें सीधे मिशन पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी।

बेबाक टिप्पणी: योजनाएं कागजों पर शानदार दिखती हैं, लेकिन असल परीक्षा जमीन पर होती है। सरकारी तंत्र ने साफ चेतावनी दी है कि लापरवाही या शिकायत मिलने पर ट्रेनिंग प्रदाताओं के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होगी। अब देखना यह है कि 15 जुलाई से शुरू हो रहा यह प्रोजेक्ट यूपी के युवाओं को बेरोजगारी के दलदल से निकाल पाता है या सिर्फ एक और सरकारी आंकड़ा बनकर रह जाता है।



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