by on | 2026-06-27 23:45:09
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें ही प्रशासक नियुक्त करने के योगी सरकार के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। इस न्यायिक झटके को मुद्दा बनाते हुए समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा तंज कसा है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट साझा कर सरकार की मंशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
‘झूठी तारीफ के बीच हाईकोर्ट ने किया रंग में भंग’
सपा प्रमुख ने सरकार की घेराबंदी करते हुए लिखा कि एक तरफ उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा अपनी झूठी तारीफ के प्रायोजित कार्यक्रम लगातार आयोजित करवाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार ने इसमें ‘रंग में भंग’ डाल दिया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि कार्यकाल खत्म होने के बावजूद ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाने का यूपी सरकार का फैसला पूरी तरह असंवैधानिक है। अखिलेश ने सवालिया लहजे में पूछा, "जनता अब सरकार से पूछ रही है कि इस तरह के असंवैधानिक काम करने की सजा क्या होती है?"
‘भाजपा ने प्रधानों को मझधार में फंसाया, गांवों में होगी नाकाबंदी’
अखिलेश यादव ने इस फैसले के जमीनी और व्यावहारिक असर का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार के इस कदम से ग्राम प्रधानों की छवि जनता के बीच धूमिल होगी। उन्होंने लिखा:
"जनता तकनीकी या कानूनी पक्ष नहीं समझती। ग्रामीण जनता तो यही मानेगी कि प्रधान जी ने अपना वादा पूरा नहीं किया और सारा फंड-बजट-पैसा 'डबल इंजन' के साथ मिलकर खा गए।"
सपा सुप्रीमो ने आशंका जताई कि अब प्रधानों के सामने वित्तीय संकट खड़ा हो सकता है। यदि कार्यकाल को ही गलत ठहरा दिया गया है, तो इस अवधि के दौरान विकास कार्यों पर खर्च हुआ पैसा भी कानूनी रूप से गलत माना जाएगा। मुमकिन है कि कल को सरकार 'पैसा वापसी' का आदेश जारी कर दे। ऐसे में प्रधानों को अपनी जेब से खर्च भुगतना पड़ सकता है, और ठेकेदार भी भुगतान के लिए प्रधानों के दरवाजे खटखटाएंगे। अखिलेश ने चुटकी लेते हुए कहा कि इसी गुस्से के कारण अब ग्राम प्रधान भाजपाइयों की गांवों में नाकाबंदी कर देंगे। उन्होंने तंज कसा— "भाजपा बनने चली थी सयानी, निपट गई उसकी ही कहानी। भाजपा अब किसी घाट की नहीं रही।" उन्होंने विशेष रूप से पंचायती राज मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका अब गांव जाना तो दूर, घर से निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की 57,695 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बीते 26 मई को समाप्त हो गया था। इसके बाद योगी सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके तहत कार्यकाल खत्म होने के बावजूद गांवों की सत्ता और विकास कार्यों की कमान उन्हीं प्रधानों को बतौर प्रशासक सौंपने का निर्णय लिया गया था। सरकार के इसी आदेश को असंवैधानिक बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है, जिसने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।
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