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अभिलेख में कूट रचित मामले न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज, बने तीन आरोपी

by on | 2026-06-26 18:21:38

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अभिलेख में कूट रचित मामले न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज, बने तीन आरोपी

बेल्थरारोड (बलिया)। परिवार रजिस्टर में कूट रचित कर नाम गायब कर सम्पत्ति से विरत करने के एक मामले में मा. न्यायालय सी.जे.एम. बलिया के आदेश के बाद उभांव पुलिस ने तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव मृत्युंजय राय, विपिन शुक्ला व विपिन शुक्ला की दूसरी पत्नी मधु शुक्ला के विरुद्ध बीएनएस की धारा 318 (4),338, 336 (3), 340 (2), 61 (2) के तहत मुकदमा दर्ज कर विवेचना उप निरीक्षक सूर्यप्रकाश दूबे को सौंप दिया है। मामला विकास खण्ड सीयर के ग्राम पंचायत पतनारी कीर्तूपुर का है।

    उभांव थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत किर्तूपुर निवासी एवं मुकदमा बादी यशराज शुक्ला उर्फ शुभम ने अपनी तहरीर में कहा है कि उसकी मां मीरा शुक्ला की शादी 19 मई 1996 में सम्पन्न हुई थी। माता-पिता के संसर्ग से सुरभि शुक्ला का 5 नवम्बर 1998 व 01 जनवरी 2000 को मुकदमा बादी का जन्म हुआ था। उस समय पिता विपिन शुक्ला द्वारा हम लोगों के प्रति ब्यवहार रहन-सहन सब कुछ ठीक रहा। ग्राम के परिवार रजिस्टर में भी नाम भी अंकित हो गया था। मुकदमा वादी का कथन है कि उसका ननिहाल मऊ शहर के सहादत पुरा में मामा मनोज कुमार पाण्डेय के यहां है। जहां विपिन शुक्ला का लगातार आना-जाना था। इसी दौरान पिता विपिन शुक्ला ने मुकदमा वादी की मौसी मधु शुक्ला को अपने प्रेम जाल में फंसा कर माह अप्रैल वर्ष 2002 में उससे दूसरी शादी भी कर ली गयी। और मेरी मां को अलग करने की युगत में पड़ गये। और आरोप है कि ग्राम पंचायत सचिव को मिलाकर परिवार रजिस्टर में क्रम संख्या 8 पर अंकित मेरी मां मीरा शुक्ला के नाम की जगह सफेदा लगवाकर मधु शुक्ला का नाम अंकित करवा दिया। ऐसा ही दूसरा कृत्य परिवार रजिस्टर के क्रम संख्या 10 पर अंकित प्रार्थी के नाम पर सफेदा लगाकर दूसरी पत्नी मधु शुक्ला की पुत्री अनुष्का शुक्ला का नाम चढ़वा दिया गया। मुकदमा वादी ने कहा है कि माह अगस्त वर्ष 2002 में जारी कराये गये परिवार रजिस्टर की नकल उसके पास मौजूद है। आरोप है कि जानकारी होने के बाद परिवार रजिस्टर की नकल ग्राम पंचायत सचिव से लेने का प्रयास किया किन्तु उनके द्वारा देने से इन्कार कर दिया गया। मुकदमा वादी का आरोप है कि उसका व उसकी मां का नाम परिवार रजिस्टर से हटवाकर सम्पत्ति से विरत करने, ग्राम पंचायत की सदस्यता से अलग करने के लिए कूट रचना की गयी है। ऐसा असंबैधानिक कृत्य उसके पिता विपिन शुक्ला द्वारा की गयी है। जो अधिकारों के हनन करने का गम्भीर अपराध उनके द्वारा कारित किया गया है। इसके लिए उभांव थाने व पुलिस अधिकारियों तक पर अपनी फरियाद लेकर मुकदमा वादी अनेकों बार दौड़ लगाया न्याय न मिलने पर मा. न्यायालय की शरण में उसे जाना पड़ा।

      तत्कालीन ग्राम पंचायत मृत्युंजय राय ने दूरभाष पर पूछे जाने पर बताया कि मेरे ऊपर लगे सभी आरोप निराधार है। मेरे पास प्रमाण मौजूद है। मुकदमा विवेचना के दौरान विवेचक को मैं सभी साक्ष्य उपलब्ध कराने का काम करुंगा।



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