by admin@bebak24.com on | 2026-06-26 13:24:56
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देहरादून/पांवटा साहिब: उत्तराखंड के चमोली (कर्णप्रयाग) में बीते दिनों हुई हिंसा के बाद उपजा तनाव अब हिमाचल-उत्तराखंड सीमा तक पहुँच गया है। गुरुवार (25 जून 2026) की रात देहरादून की ओर बढ़ रहे निहंग सिखों के एक जत्थे और उत्तराखंड पुलिस के बीच कुल्हाल बॉर्डर पर तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई।
पुलिस ने जत्थे को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी, लेकिन भारी तनाव के बीच कुछ निहंग सुरक्षा घेरा तोड़कर उत्तराखंड की सीमा में दाखिल हो गए। हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया और समझा-बुझाकर वापस हिमाचल प्रदेश की ओर भेज दिया।
यह पूरा विवाद सुलझाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और निहंग प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई थी:
मोहाली से रवानगी: निहंगों का यह जत्था पंजाब के मोहाली स्थित एक गुरुद्वारे से उत्तराखंड के कर्णप्रयाग के लिए रवाना हुआ था।
वार्ता में दरार: उत्तराखंड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद निहंगों के एक गुट ने तो संतोष जताया था, लेकिन दूसरा धड़ा कर्णप्रयाग कूच करने के अपने फैसले पर अड़ा रहा।
बैरिकेडिंग तोड़कर एंट्री: गुरुवार रात करीब 10 बजे जब जत्था कुल्हाल बॉर्डर पर पहुँचा, तो बातचीत बेनतीजा रहने के बाद 15 से 20 निहंगों का समूह जबरन बैरिकेड पार कर उत्तराखंड की सीमा में घुस गया, जिसके बाद पुलिस के साथ उनकी सीधी धक्का-मुक्की हुई।
मीडिया से बातचीत में निहंग प्रतिनिधि अकाली जसदीप सिंह ने टकराव टालने की बात कहते हुए अपनी मांगें सामने रखीं:
"हम किसी तरह की लड़ाई नहीं चाहते, बल्कि प्यार बढ़ाना चाहते हैं। गलती हमारी नहीं थी, फिर भी हम समाज में शांति के लिए माफी मांगते हैं। हमारी मांग है कि समझौता हो और हमारे गिरफ्तार किए गए चार साथियों को रिहा कर पंजाब भेजा जाए।"
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें हेमकुंड साहिब की यात्रा करने की अनुमति दी जाए। चार दिनों में उनके साथियों की जमानत हो जाएगी, जिसके बाद वे उन्हें अपने साथ लेकर ही पंजाब वापस लौटेंगे।
निहंगों के 25 जून को 'कर्णप्रयाग कूच' के अल्टीमेटम को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस ने हिमाचल से सटे कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे:
कुल्हाल बॉर्डर को अस्थायी छावनी में तब्दील कर दिया गया था, जहां भारी पुलिस बल के साथ अर्द्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) की तैनाती की गई।
देहरादून के एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल ने बताया, "हमने कुल्हाल बैरियर और गुरुद्वारा पांवटा साहिब में निहंगों से कई दौर की शांति वार्ता की थी। अधिकांश लोग मान गए थे, लेकिन 15-20 लोगों के एक समूह ने दूसरे बैरियर से जबरन घुसने की कोशिश की, जिन्हें रोक दिया गया। वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में है और कानून-व्यवस्था कायम है।"
इस पूरे तनाव की जड़ें 16 जून 2026 को हुई एक घटना से जुड़ी हैं:
कर्णप्रयाग की झड़प: सिख तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब की यात्रा कर लौट रहे निहंग सिख यात्रियों और कर्णप्रयाग के स्थानीय निवासियों के बीच किसी बात को लेकर हिंसक झड़प हो गई थी।
चार गिरफ्तारियां: इस झड़प के बाद स्थानीय पुलिस ने कानून हाथ में लेने के आरोप में चार निहंग सिखों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
कूच का आह्वान: इन्हीं चार निहंगों की रिहाई की मांग को लेकर और पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में पंजाब और अन्य इलाकों से निहंगों ने कर्णप्रयाग तक विरोध मार्च (कूच) निकालने का एलान किया था।
हेमकुंड साहिब जैसी पवित्र धार्मिक यात्रा के मार्ग पर आस्था के नाम पर हिंसा और फिर इस तरह का कूटनीतिक कूट-संघर्ष बेहद चिंताजनक है। उत्तराखंड का चमोली जिला और कर्णप्रयाग सामरिक और धार्मिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील क्षेत्र हैं। 16 जून की घटना में गलती किसी भी पक्ष की रही हो, लेकिन कानून को अपने हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।
निहंग प्रतिनिधि अकाली जसदीप सिंह का यह बयान कि वे "माफी मांगने और समझौता करने को तैयार हैं" एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसके साथ ही "साथियों को छुड़ाए बिना वापस न जाने" की जिद कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है। उत्तराखंड पुलिस ने जिस तरह संयम और कड़ाई का संतुलन बनाकर कुल्हाल बॉर्डर पर स्थिति को संभाला, वह तारीफ के काबिल है। इस मामले का हल सड़कों पर बैरिकेडिंग तोड़ने से नहीं, बल्कि कोर्ट के जरिए जमानत और दोनों पक्षों के प्रबुद्ध नागरिकों के बीच आपसी संवाद से ही निकलेगा, ताकि देवभूमि की शांति और सिखों की पवित्र यात्रा दोनों सुरक्षित रह सकें।
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