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वैभव सूर्यवंशी पर क्यों टिकी हैं भारत और आयरलैंड के दिग्गजों की नजरें? बैटिंग कोच और विपक्षी खिलाड़ियों के बयानों के पीछे के असली मायने

by admin@bebak24.com on | 2026-06-26 12:57:11

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वैभव सूर्यवंशी पर क्यों टिकी हैं भारत और आयरलैंड के दिग्गजों की नजरें? बैटिंग कोच और विपक्षी खिलाड़ियों के बयानों के पीछे के असली मायने

बेलफास्ट (आयरलैंड): भारत और आयरलैंड के बीच आज यानी शुक्रवार (26 जून 2026) से शुरू हो रही टी20 सीरीज से ठीक पहले भारतीय क्रिकेट के नए 'वंडर बॉय' वैभव सूर्यवंशी चर्चा के केंद्र में हैं। महज 15 साल की उम्र में आईपीएल (IPL) में रनों का अंबार लगाने और फिर भारत-ए के लिए सिर्फ 11 गेंदों में लिस्ट-ए इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक ठोकने वाले वैभव के डेब्यू को लेकर विश्व क्रिकेट उत्साहित है।

मैच से पहले भारतीय बैटिंग कोच सितांशु कोटक और आयरलैंड के खिलाड़ियों ने वैभव के खेल, उनकी काबिलियत और प्लेइंग इलेवन में जगह को लेकर बेहद महत्वपूर्ण बातें कही हैं। आइए जानते हैं कि इन बयानों के पीछे की असल वजहें और रणनीतिक मायने क्या हैं:

1. बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने क्यों कहा- 'डेब्यू के लिए दूसरों के साथ अन्याय ठीक नहीं'?

भारतीय टीम के बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि वैभव असाधारण प्रतिभा हैं, लेकिन उन्हें खिलाने के लिए टीम में पहले से अच्छा प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों को ड्रॉप करना सही नहीं होगा। इस बयान के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं:

  • सीनियर खिलाड़ियों का मनोबल और कड़ा कॉम्पिटिशन: कोटक ने कहा, "किसी को मौका देने और दूसरे खिलाड़ी के साथ अन्याय करने के बीच बहुत बारीक फर्क होता है।" टीम में पहले से मौजूद जो बल्लेबाज लगातार रन बना रहे हैं, उन्हें बिना किसी ठोस वजह के बाहर बैठाने से टीम का संतुलन और ड्रेसिंग रूम का माहौल बिगड़ सकता है।

  • दबाव से बचाना और सही समय का इंतजार: टीम मैनेजमेंट चाहता है कि वैभव को जब भी मौका मिले, वह बिना किसी बाहरी दबाव के खेलें। कोटक का मानना है कि वैभव टीम इंडिया के कल्चर में पूरी तरह ढल चुके हैं और प्लेइंग इलेवन पर अंतिम फैसला कप्तान और मुख्य कोच ही लेंगे।

क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड दांव पर: अगर वैभव आज या रविवार को होने वाले दूसरे टी20 मैच में मैदान पर उतरते हैं, तो वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन जाएंगे। वह महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (16 साल, 1989 में डेब्यू) का 37 साल पुराना ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ देंगे।

2. आयरलैंड के खिलाड़ियों ने क्यों कहा- 'हम वैभव जैसा बनना चाहते हैं'?

आयरलैंड के गेंदबाजों के बयानों से साफ है कि वे इस युवा भारतीय सनसनी को हल्के में लेने की भूल बिल्कुल नहीं कर रहे हैं और उन्होंने वैभव के खेल पर बाकायदा रिसर्च की है:

  • रॉस अडेयर (आयरलैंड गेंदबाज): उन्होंने वैभव की तारीफ में कहा कि सूर्यवंशी ऐसे खिलाड़ी हैं “जिनके जैसा बनने की इच्छा होती है।” उन्होंने इसके पीछे की वजह वैभव के 'फियरलेस अप्रोच' (निडर खेल) को बताया। उन्होंने कहा कि वैभव को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि सामने कौन सा गेंदबाज है, वह हर किसी को चुनौती देते हैं।

  • मैथ्यू हम्फ़्रीज़ (आयरलैंड गेंदबाज): हम्फ़्रीज़ ने माना कि टी20 क्रिकेट में वैभव इस समय सबसे विस्फोटक टॉप-ऑर्डर बल्लेबाजों में से एक हैं। उन्होंने कहा, "इंटरनेशनल क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी का पहला विकेट लेने वाला गेंदबाज बनना काफी दिलचस्प और गर्व की बात होगी। हमारी रणनीति उनके खिलाफ सही प्लान बनाने की है।"

3. दुनिया के 3 महान दिग्गजों की नजर में क्या खास है वैभव के पास?

बीबीसी से बातचीत में विश्व क्रिकेट के तीन बड़े कप्तानों और कोचों ने बताया कि आखिर वैभव सूर्यवंशी बाकी खिलाड़ियों से अलग क्यों हैं:

जस्टिन लैंगर (पूर्व ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज व LSG कोच):

"वैभव दुनिया के सिर्फ दूसरे ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनके साथ मैंने खुद से सेल्फी लेने की गुजारिश की। उनके हाथ कमाल के हैं—बिल्कुल स्विमिंग पूल में तैरती होज (Hose) की तरह ढीले और सहज। अमूमन बाएं हाथ के बल्लेबाज छक्का मारते वक्त गेंद को लेग साइड (मिडविकेट) की तरफ खींचते हैं, लेकिन वैभव अलग हैं; वह कवर्स के ऊपर से स्टैंड्स में छक्का मारते हैं, जो हैरान कर देने वाला है।"

राहुल द्रविड़ (पूर्व भारतीय कप्तान):

"2025 में राजस्थान रॉयल्स के कोच के तौर पर मैंने 14 साल की उम्र में उनका आईपीएल डेब्यू देखा था। उनमें गेंदबाज की रफ्तार को भांपने की गजब की क्षमता और क्रिकेटिंग सेंस है। उनकी यह प्रतिभा सिर्फ 'गॉड-गिफ्टेड' नहीं है, बल्कि इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत है। उन्होंने बचपन से ही नेट पर लाखों गेंदें हिट की हैं।"

माइकल वॉन (पूर्व इंग्लिश कप्तान व कमेंटेटर):

"वैभव की नजर और बैट स्विंग तो शानदार है ही, लेकिन उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह गेंदबाज के फेंकने से पहले ही उसके दिमाग और मैदान की स्थिति को पढ़ लेते हैं। महान खिलाड़ियों की पहचान यही होती है।"

'अलग ड्रेसिंग रूम' की क्या है कहानी?

इस सीरीज में एक अनोखी चर्चा वैभव के 'अलग ड्रेसिंग रूम' को लेकर भी है। सुरक्षा नियमों और कानूनन कम उम्र (माइनर होने) के कारण, नियमों के मुताबिक वैभव सीनियर टीम के खिलाड़ियों के साथ आधिकारिक ड्रेसिंग रूम में कपड़े नहीं बदल सकते। उनके लिए एक अलग व्यवस्था की गई है, जो अंतरराष्ट्रीय खेलों में बाल सुरक्षा मानकों (Child Safety Protocols) का हिस्सा है।

बेबाक24 टेक

बिहार से निकलकर विश्व क्रिकेट के पटल पर महज 15 साल की उम्र में छा जाने वाले वैभव सूर्यवंशी आधुनिक क्रिकेट के उस 'फियरलेस' (डर से परे) एटीट्यूड का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसकी तलाश टीम इंडिया को हमेशा से रही है। बैटिंग कोच सितांशु कोटक का बयान बिल्कुल व्यावहारिक है; टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए परफॉर्म कर रहे सीनियर खिलाड़ियों का सम्मान भी जरूरी है और वैभव को सीधे आग में झोंकने के बजाय धीरे-धीरे इंटरनेशनल माहौल का आदी बनाना ज्यादा समझदारी भरा कदम है।

आयरलैंड के गेंदबाज जिस तरह से मैच से पहले ही वैभव के नाम से खौफ खाए हुए हैं या उनके विकेट को एक 'प्राइज मेडल' की तरह देख रहे हैं, वह दिखाता है कि इस लड़के ने अपने छोटे से करियर में कितनी बड़ी धाक जमा ली है। सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड टूटना महज समय की बात है, असल परीक्षा यह होगी कि राहुल द्रविड़ और जस्टिन लैंगर जैसे दिग्गज जिस 'असाधारण गॉड-गिफ्टेड टैलेंट' की बात कर रहे हैं, उसे वैभव आने वाले 10-20 सालों तक भारतीय क्रिकेट में किस तरह डॉमिनेट करवाते हैं। अगर आज उन्हें मौका मिलता है, तो पूरा भारत एक नए इतिहास का गवाह बनेगा।



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