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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: एसआईटी की रिपोर्ट के बाद 8 लोग हिरासत में; करोड़ों के गबन और अकूत संपत्ति का खुलासा

by admin@bebak24.com on | 2026-06-26 12:55:10

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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: एसआईटी की रिपोर्ट के बाद 8 लोग हिरासत में; करोड़ों के गबन और अकूत संपत्ति का खुलासा

अयोध्या: राम नगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर के चढ़ावे और दानपात्रों से भारी मात्रा में नकदी व कीमती सामान की चोरी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस कथित वित्तीय अनियमितता की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपे जाने के बाद, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आठ लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया है।

अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि सभी आरोपियों से सघन पूछताछ की जा रही है और अगले एक-दो दिनों के भीतर उन्हें मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया जाएगा।

कैसे खुली पोल? एसआईटी का गठन और एफआईआर

  • चंदे में गड़बड़ी के आरोप: राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे में हेराफेरी की शिकायतें सबसे पहले 13 जून को सामने आई थीं। इसके बाद 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' की मांग पर शासन स्तर से एक हाई-प्रोफाइल एसआईटी (SIT) का गठन किया गया था।

  • एसआईटी का ढांचा: इस उच्चस्तरीय जांच समिति की अध्यक्षता विजय विश्वास पंत कर रहे हैं, जबकि पैनल में आईपीएस अधिकारी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरत्न कुमार शामिल हैं। समिति का मुख्य काम सुरक्षा प्रक्रिया की कमियों को पकड़ना और इस बड़ी साजिश के पीछे के किरदारों को बेनकाब करना था।

  • पुलिस में शिकायत: एसआईटी की पहली रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की उन गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है जो कर्मचारी द्वारा चोरी, आपराधिक विश्वासघात (Breach of Trust), धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित हैं।

चोरी का तरीका: दानपात्र से काउंटिंग रूम तक का खेल

जांच में सामने आया है कि एफआईआर में नामजद सभी आठ कर्मचारी उस विशिष्ट टीम का हिस्सा थे, जिन्हें मंदिर परिसर में रखे गए 40 विशाल दानपात्रों (Hundis) से चढ़ावा एकत्र करने, उसे सुरक्षित तरीके से तीर्थयात्री सुविधा केंद्र (PFसी) पहुँचाने और फिर उसकी गिनती करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आरोपियों ने इसी पूरी चेन का फायदा उठाकर आपसी मिलीभगत से श्रद्धालुओं की आस्था के पैसे पर डाका डाला।

हिरासत में लिए गए 8 आरोपी: जानिए किसकी क्या थी भूमिका?

ट्रस्ट और पुलिस जांच के अनुसार, हिरासत में लिए गए कर्मचारियों की जिम्मेदारी और उन पर लगे विशिष्ट आरोप इस प्रकार हैं:

क्र.सं.आरोपी का नाममंदिर में तय जिम्मेदारीजांच एजेंसियों के आरोप व बरामदगी
1रामाशंकर यादव (टिन्नू)दानपात्रों की निगरानी करना और उन्हें सुरक्षित बेसमेंट तक पहुँचाना।मुख्य आरोपी; दानपात्रों से करोड़ों का गबन किया और अयोध्या के आसपास बेनामी संपत्तियां खरीदीं।
2मनीष यादवदानपात्रों से निकाली गई नकदी की गिनती करना।चढ़ावे से नकदी गायब की; पुलिस छापे में इसके घर से 36 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं।
3लवकुश मिश्राकाउंटिंग रूम में चढ़ावे और नकदी की गिनती करना।करोड़ों की चल-अचल संपत्ति बनाने का आरोप; इसके घर से 12 लाख रुपये नकद मिले हैं।
4अनुकल्प मिश्राकाउंटिंग रूम में नकदी की गिनती करना।नोट गिनने के दौरान चालाकी से पैसे चुराकर बाथरूम में छिपाने और बाद में बाहर ले जाने का आरोप।
5सुभाष चंद्र श्रीवास्तवकैश काउंटिंग स्टाफ के प्रभारी (इंचार्ज)।अपनी देखरेख में हो रही चोरी को नजरअंदाज करने, निगरानी में भारी लापरवाही बरतने और साजिश में शामिल होने का आरोप।
6करुणेश पांडेदान राशि को दानपात्रों से काउंटिंग रूम तक लाना और गिनना।चढ़ावे की रकम को धीरे-धीरे पार किया और अयोध्या के प्राइम लोकेशनों पर जमीन व संपत्तियां खरीदीं।
7अविनाश शुक्लादान राशि को सुरक्षित काउंटिंग रूम तक लाना और उसकी गिनती करना।बाकी आरोपियों के साथ मिलकर गबन किया और चोरी के पैसों से बड़े पैमाने पर प्रॉपर्टी में निवेश किया।
8रामाशंकर मिश्रादानपात्रों को कस्टडी में लेकर काउंटिंग रूम तक पहुँचाना और सुरक्षा देखना।टिन्नू यादव और अन्य के साथ मिलकर ट्रस्ट के फंड का दुरुपयोग और गबन करने की आपराधिक साजिश का हिस्सा।

बेबाक24 टेक

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में इस तरह की सेंधमारी का सामने आना केवल एक वित्तीय अपराध नहीं, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों सनातनी श्रद्धालुओं की आस्था और उनके समर्पण पर एक बहुत बड़ा आघात है। राम मंदिर के निर्माण और उसकी सुरक्षा को लेकर जिस तरह के कड़े दावे किए जाते रहे हैं, उसके बीच मंदिर के गर्भगृह और तीर्थयात्री सुविधा केंद्र के ठीक नीचे चल रहे काउंटिंग रूम से करोड़ों रुपये गायब हो जाना यह दिखाता है कि आंतरिक सुरक्षा और ऑडिटिंग सिस्टम में कितनी गंभीर खामियां थीं।

चौंकाने वाली बात यह है कि नोट गिनने वाले कर्मचारियों के घरों से लाखों की नकदी सीधे बरामद हो रही है और वे अयोध्या के आसपास जमीनें खरीद रहे थे, लेकिन ट्रस्ट के आला अधिकारियों और वित्तीय प्रभारियों को महीनों तक इसकी भनक तक नहीं लगी। सुभाष चंद्र श्रीवास्तव जैसे प्रभारियों की भूमिका इस बात की गवाही देती है कि बिना ऊपरी शह या घोर प्रशासनिक लापरवाही के इतना बड़ा गबन मुमकिन नहीं था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा एसआईटी रिपोर्ट पर खुद संज्ञान लेना यह साफ करता है कि सरकार इस मामले की संवेदनशीलता को समझती है। अब जरूरत इस बात की है कि केवल इन 8 कर्मचारियों को मोहरा बनाकर मामला शांत न किया जाए, बल्कि मंदिर की दान प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि भविष्य में आस्था के इस कोष पर कोई दोबारा उंगली न उठा सके।



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