by admin@bebak24.com on | 2026-06-26 12:31:33
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नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच होने वाले बड़े व्यापारिक समझौते (Trade Deal) को लेकर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। पीयूष गोयल ने एक इंटरव्यू में बेहद कड़ा और स्पष्ट संकेत देते हुए कहा है कि भारत तब तक अमेरिका के साथ किसी भी ट्रेड डील पर मुहर नहीं लगाएगा, जब तक उसे अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के मुकाबले टैरिफ (आयात शुल्क) में बेहतर और रणनीतिक फायदा नहीं मिल जाता।
वाणिज्य मंत्री ने साफ किया कि भारत अमेरिकी बाजार में अपने पड़ोसियों की तुलना में किसी भी कीमत पर अपनी व्यापारिक बढ़त (Edge) को कम होने नहीं देगा।
पीयूष गोयल ने इंटरव्यू के दौरान उन तकनीकी और नीतिगत बदलावों का भी जिक्र किया, जिसने भारत को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया:
पहले की अनुकूल स्थिति: वाणिज्य मंत्री के अनुसार, शुरुआत में भारत पर लगाया गया 50 फीसदी का भारी टैरिफ घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया था। यह दर भारत के अन्य पड़ोसी देशों से काफी कम थी, जिससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी बढ़त मिल रही थी।
बदला हुआ परिदृश्य: पीयूष गोयल ने बताया कि अमेरिका के साथ समझौते पर मूल रूप से इसी कम टैरिफ दर के आधार पर बातचीत आगे बढ़ रही थी। लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ को रद्द करने वाले हालिया फैसले और आगामी 24 जुलाई को 10 प्रतिशत वाले अंतरिम टैरिफ की अवधि समाप्त होने की स्थिति ने पूरी तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है।
भारतीय वाणिज्य मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि नई दिल्ली को अब इस बात पर वाइट हाउस और अमेरिकी प्रशासन से पूरी स्पष्टता (Clarity) चाहिए कि समझौते को आगे बढ़ाने के बाद भारत अन्य अहम दक्षिण एशियाई देशों के मुकाबले अपनी व्यापारिक बढ़त को कैसे बरकरार रख पाएगा। भारत किसी भी ऐसे समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा जहां उसके हितों को नजरअंदाज किया जाए।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का यह बयान भारत की उस 'न्यू इंडिया' वाली कूटनीति को दर्शाता है, जहां भारत अब वैश्विक महाशक्तियों के सामने केवल अपनी बात रखता नहीं, बल्कि अपनी शर्तें भी तय करता है। अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन यह अपनी घरेलू इंडस्ट्री और निर्यातकों की कीमत पर नहीं हो सकता। दक्षिण एशियाई बाजार में बांग्लादेश, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे देश टेक्सटाइल और अन्य क्षेत्रों में भारत को कड़ी टक्कर देते हैं। ऐसे में अगर अमेरिका में भारतीय सामानों पर टैरिफ पड़ोसियों के बराबर या उससे अधिक हो जाता है, तो भारतीय बाजार को भारी नुकसान होगा।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और 24 जुलाई की समयसीमा के बाद अमेरिकी प्रशासन खुद आंतरिक दबाव में है। पीयूष गोयल ने बिल्कुल सही वक्त पर यह कूटनीतिक दांव खेला है। यह बयान वॉशिंगटन के लिए एक सीधा संदेश है कि यदि वे भारत जैसी विशाल अर्थव्यवस्था को अपने पाले में रखना चाहते हैं और चीन के विकल्प के रूप में देखना चाहते हैं, तो उन्हें कागजी वादों से आगे बढ़कर भारत को विशेष व्यापारिक छूट और सुरक्षा देनी ही होगी।
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