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होर्मुज़ स्ट्रेट में मालवाहक जहाज़ पर हमला: यूएन ने 11 हज़ार नाविकों की निकासी का अभियान रोका

by admin@bebak24.com on | 2026-06-26 12:24:38

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होर्मुज़ स्ट्रेट में मालवाहक जहाज़ पर हमला: यूएन ने 11 हज़ार नाविकों की निकासी का अभियान रोका

दुबई/लंदन: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच ऐतिहासिक समझौते और कूटनीतिक शांति के बाद खुले होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में एक बार फिर तनाव पैदा हो गया है। होर्मुज़ स्ट्रेट के पास एक मालवाहक जहाज़ पर हुए अज्ञात हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) ने वहां फंसे 11 हजार से अधिक वैश्विक नाविकों की सुरक्षित निकासी के लिए चलाए जा रहे महा-अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया है।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के प्रमुख आर्सेनियो डोमिंगुएज़ ने स्पष्ट किया कि कई जहाज़ों को पहले ही सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन इस नए हमले के बाद संगठन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि आगे बढ़ने से पहले नाविकों की सुरक्षा के सभी ज़रूरी इंतज़ाम पुख्ता कर लिए जाएं।

ओमान के पास सिंगापुर के जहाज़ 'एवर लवली' पर हमला

ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना गुरुवार को ओमान के दहीत बंदरगाह से दक्षिण-पूर्व में करीब 7.5 समुद्री मील दूर समुद्र में घटी:

  • प्रोजेक्टाइल से हमला: एक मालवाहक जहाज़ पर अज्ञात दिशा से आए प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या ड्रोन) से हमला किया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी नाविक के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।

  • सुरक्षित निकला जहाज़: समुद्री सुरक्षा कंपनी 'वैनगार्ड' के मुताबिक, हमले का शिकार हुआ यह जहाज़ सिंगापुर के झंडे वाला मालवाहक जहाज़ 'एवर लवली' (Ever Lovely) था। हमले के बावजूद जहाज़ सुरक्षित रूप से होर्मुज़ स्ट्रेट को पार करने में सफल रहा और उसे किसी बाहरी सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ी।

फरवरी से फंसे हैं हजारों नाविक और सैकड़ों जहाज़

गौरतलब है कि इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से ही खाड़ी क्षेत्र (गल्फ रीजन) में कूटनीतिक गतिरोध के कारण सैकड़ों मालवाहक जहाज़ और हजारों नाविक समुद्र के बीचों-बीच फंसे हुए हैं। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते और होर्मुज़ स्ट्रेट के दोबारा खुलने के बाद, संयुक्त राष्ट्र ने इसी मंगलवार को इन नाविकों को सुरक्षित घर वापस भेजने के लिए एक बड़े पैमाने पर निकासी अभियान शुरू करने की घोषणा की थी, जिस पर अब फिलहाल ब्रेक लग गया है।

बेबाक24 टेक

होर्मुज़ स्ट्रेट में सिंगापुर के जहाज़ 'एवर लवली' पर हुआ यह हमला साफ तौर पर यह चेतावनी है कि पश्चिम एशिया में 'शांति' अभी बहुत नाजुक दौर में है। भले ही अमेरिका और ईरान ने कूटनीतिक मेज पर बैठकर 60 दिनों की शांति और बातचीत का समझौता (MoU) कर लिया हो, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी चार महीने के निचले स्तर पर आ गई हैं, लेकिन समुद्र में सक्रिय कुछ 'अदृश्य ताकतें' या छद्म गुट (Proxy Groups) इस शांति प्रक्रिया को पटरी से उतारना चाहते हैं।

संयुक्त राष्ट्र और आईएमओ द्वारा 11 हजार नाविकों की निकासी को रोकना एक अत्यंत समझदारी भरा लेकिन निराशाजनक कदम है। जब तक होर्मुज़ स्ट्रेट जैसे संवेदनशील और वैश्विक व्यापार के मुख्य जलमार्ग को पूरी तरह 'नो-कॉम्बैट ज़ोन' (युद्ध मुक्त क्षेत्र) घोषित नहीं किया जाता, तब तक अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियां और बेकसूर नाविक वैश्विक ताकतों की इस सियासी जंग में बंधक बने रहेंगे। यदि इन छिटपुट हमलों को तुरंत नहीं रोका गया, तो कच्चे तेल के बाजार में आई हालिया गिरावट दोबारा एक बड़े उछाल और वैश्विक महंगाई में बदल सकती है।



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