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भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा मोड़: बिहार सरकार ने दिए न्यायिक जांच के आदेश, हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे पड़ताल

by on | 2026-06-20 19:58:59

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भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा मोड़: बिहार सरकार ने दिए न्यायिक जांच के आदेश, हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे पड़ताल

भोजपुर : चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तूल पकड़ लिया है। बिहार सरकार ने जनभावनाओं और बढ़ते विवाद को देखते हुए पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) कराने का बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा, "सरकार घटना के सभी पहलुओं की स्वतंत्र जांच चाहती है ताकि सच्चाई सामने आ सके।"

​पुलिस ने दर्ज की 3 एफआईआर, परिजनों पर भी मुकदमा

​एक तरफ जहां न्यायिक जांच की रूपरेखा तैयार हो रही है, वहीं दूसरी तरफ पुलिसिया कार्रवाई भी तेज हो गई है। शनिवार सुबह भोजपुर पुलिस ने इस मामले में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं।

नामजद आरोपी: पुलिस ने मृतक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया है।


क्या हैं आरोप? शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष की तहरीर पर दर्ज प्राथमिकी में हथियार लहराने, अपराधी को संरक्षण देने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, सड़क जाम करने और पुलिस टीम पर पथराव करने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।


​ पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने उठाए गंभीर सवाल

​इस पूरे मामले में बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के बयान ने पुलिस की थ्योरी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने घटना को पूरी तरह संदिग्ध बताते हुए कहा:

​"अगर भरत तिवारी ने हथियार फेंक दिया था, तो उस पर गोली क्यों चलाई गई? पुलिस के दावों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के तथ्यों में जमीन-आसमान का अंतर है। इन सवालों का जवाब मिलना बेहद जरूरी है।"

​ पुलिस का दावा बनाम परिजनों के आरोप
पक्ष

पुलिस का दावा (Police Version)

परिजनों का आरोप (Family Version)

घटनाक्रम

भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर पिस्तौल तानकर फायरिंग की।

भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था और अपना हथियार भी फेंक दिया था।

कार्रवाई

आत्मरक्षा (Self-Defense) में जवाबी फायरिंग की गई, जिससे भरत के दोनों पैरों में गोली लगी।

पुलिस ने सरेंडर करने के बावजूद जानबूझकर गोली मारी। यह एक फर्जी एनकाउंटर है।
आक्रोश के बाद पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

​बता दें कि इस घटना के विरोध में बीते 18 जून को ग्रामीणों और परिजनों ने आरा-बक्सर हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया था। उग्र प्रदर्शन को काबू करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग भी करना पड़ा था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भोजपुर पुलिस अधीक्षक (SP) राज ने बड़ी कार्रवाई की है:

शाहपुर थाना प्रभारी समेत 4 से 6 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।


​मामले की मजिस्ट्रेटी जांच पहले से ही जारी है।


​अब मुख्यमंत्री द्वारा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से न्यायिक जांच कराने के ऐलान के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। हर किसी की नजरें अब इस जांच की रिपोर्ट और आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं।




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