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अमित शाह का एलान: लंबित केस खत्म करने के लिए बनेगा ब्लूप्रिंट, 3 नए ऐप लॉन्च

by on | 2026-06-19 21:26:27

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अमित शाह का एलान: लंबित केस खत्म करने के लिए बनेगा ब्लूप्रिंट, 3 नए ऐप लॉन्च

नई दिल्ली | केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (19 जून) को नई दिल्ली में 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन 2026 का उद्घाटन किया। इस मौके पर देश की न्याय प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव का एलान करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि गृह मंत्रालय (MHA) देश की शीर्ष अदालतों (सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट) के साथ मिलकर लंबित मामलों  को तेजी से कम करने के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है।

​इस दौरान गृह मंत्री ने तीन अत्याधुनिक डिजिटल ऐप्स भी लॉन्च किए, जो आपराधिक न्याय प्रणाली को गति देने और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने का माध्यम बनेंगे।

​'FIR से सजा तक 3 साल में न्याय': लॉन्च हुए 3 नए ऐप्स

​मोदी सरकार के क्रिमिनल जस्टिस रिफॉर्म्स का मुख्य उद्देश्य एफआईआर दर्ज होने से लेकर अपराधी को सजा मिलने तक की पूरी प्रक्रिया को 3 साल के भीतर समेटना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जो तीन ऐप लॉन्च किए गए हैं, वे हैं:

​एनसीआरबी-अभिज्ञान सीआरपीआई 

​ई-प्रॉसिक्यूशन 2.0 

​ई-फॉरेंसिक्स 2.0 

​गृह मंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "अपराधी कितना भी चतुर क्यों न हो, कानून और विज्ञान की संयुक्त शक्ति से अब उसका बच पाना नामुमकिन है।"

​डेटा बनेगा हथियार: AI और प्रेडिक्टिव पुलिसिंग से रुकेगा अपराध

​अमित शाह ने बताया कि देश की क्रिमिनल जस्टिस चेन को पूरी तरह टेक्नोलॉजी से जोड़ दिया गया है। अब पारंपरिक पुलिसिंग मॉडल को पीछे छोड़कर साइंटिफिक एविडेंस (वैज्ञानिक साक्ष्यों) पर आधारित जांच को बढ़ावा दिया जा रहा है:

​एक्शन योग्य इंटेलिजेंस: देश में मौजूद 37 करोड़ ऑनलाइन रिकॉर्ड, 1 करोड़ 29 लाख फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड, 9 लाख नार्को अपराधियों का डेटा और 3.65 लाख ह्यूमन ट्रैफिकिंग रिकॉर्ड को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के जरिए एक्शन योग्य इंटेलिजेंस में बदला जा रहा है।

​प्रेडिक्टिव पुलिसिंग  अपराध होने के बाद कार्रवाई करने की पुरानी व्यवस्था के बजाय, अब अपराध को होने से पहले ही रोकने पर काम हो रहा है। AI और पैटर्न एनालिसिस के जरिए अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क और बार-बार अपराध करने वाले 'रिपीट ऑफेंडर्स' को पहले ही दबोचा जा सकेगा।

​NCRB और BPR&D का नया रूप: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो और बीपीआरडी अब सिर्फ रिकॉर्ड रखने वाले संगठन नहीं रहेंगे, बल्कि इंटेलिजेंस-ड्रिवन क्राइम प्रिवेंशन संस्थाओं में तब्दील हो रहे हैं। वर्तमान में देश के 17,840 पुलिस थानों तक सीसीटीएनएस (CCTNS) की पहुंच हो चुकी है।

​Bebak24 टेक

​भारत की कानूनी व्यवस्था पर दशकों से यह दाग रहा है कि 'यहाँ न्याय मिलने में पीढ़ियाँ गुजर जाती हैं'। इस पृष्ठभूमि में गृह मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट के साथ मिलकर लंबित मामलों को निपटाने का ब्लूप्रिंट तैयार करना और '3 साल में न्याय' का संकल्प लेना एक बेहद साहसिक और स्वागत योग्य कदम है।

​तकनीकी चश्मे से देखें तो ई-फॉरेंसिक्स 2.0 और ई-प्रॉसिक्यूशन 2.0 जैसे ऐप्स जांच एजेंसियों और अदालतों के बीच की कागजी दूरी को खत्म करेंगे, जिससे फाइलों को लटकाने का खेल बंद होगा। सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है 37 करोड़ डिजिटल रिकॉर्ड्स पर AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करना। यह तकनीक न केवल अपराधियों को पकड़ने में मदद करेगी, बल्कि 'प्रेडिक्टिव पुलिसिंग' के जरिए अपराध दर को कम करने में भी गेम-चेंजर साबित हो सकती है। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी डिजिटल ढांचे की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हमारे जमीनी पुलिसकर्मी और निचली अदालतें इस हाई-टेक सिस्टम को कितनी तेजी से अपना पाती हैं।



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