ब्रेकिंग न्यूज़
झांसी हादसे में छोटे बेटे अबान की मौत, कसारी-मसारी में पिता-चाचा की कब्रों के पास ही होगा सुपुर्द-ए-खाक
ताजा खबर ताजा खबर

राम मंदिर आंदोलन के रणनीतिकार चंपत राय: प्रोफेसर से ट्रस्ट के महासचिव तक का सफर और उनकी संस्थागत जवाबदेही

by on | 2026-06-19 18:19:26

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3241


राम मंदिर आंदोलन के रणनीतिकार चंपत राय: प्रोफेसर से ट्रस्ट के महासचिव तक का सफर और उनकी संस्थागत जवाबदेही

अयोध्या/बिजनौर। अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के मुख्य कर्ताधर्ता और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का जीवन वैचारिक निष्ठा, सांगठनिक कौशल और विवादों के बीच जवाबदेही की एक जटिल दास्तान है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर से रसायन शास्त्र के प्रोफेसर के रूप में अपना सफर शुरू करने वाले चंपत राय आज राम मंदिर आंदोलन के सबसे केंद्रीय चेहरों में से एक हैं।

​प्रारंभिक जीवन और संघ से जुड़ाव

​18 नवंबर 1946 को बिजनौर के नगीना में जन्मे चंपत राय को राष्ट्रवाद और संगठन के संस्कार अपने पिता रामेश्वर प्रसाद बंसल से विरासत में मिले, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित कार्यकर्ता थे। चंपत राय ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर बिजनौर के आरएसएम डिग्री कॉलेज में रसायन शास्त्र (केमिस्ट्री) के प्रोफेसर के रूप में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की। हालांकि, 1970 के दशक में आपातकाल के दौरान उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और 1980 के दशक में अध्यापन का क्षेत्र पूरी तरह से त्यागकर संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए।

​आंदोलन के 'नेपथ्य के रणनीतिकार'

​विश्व हिंदू परिषद (VHP) में शामिल होने के बाद चंपत राय ने आगरा, देहरादून और हरिद्वार जैसे क्षेत्रों में संगठन विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1984 की धर्म संसद के बाद जब राम जन्मभूमि आंदोलन ने गति पकड़ी, तब अशोक सिंघल के साथ चंपत राय को अग्रिम मोर्चे पर लगाया गया।

​पार्टी सूत्रों और वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, चंपत राय आंदोलन के सार्वजनिक चेहरों के पीछे रहकर रणनीति तैयार करने वाले मुख्य सूत्रधार थे। विवादित ढांचे से जुड़े मुकदमों की पैरवी के लिए ऐतिहासिक व पुरातात्विक दस्तावेज जुटाना, वकीलों के साथ समन्वय करना और सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई से पहले दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित करने का जिम्मा उन्हीं के कंधों पर था।

​सादगी और विवादों पर बंटी जनभावना

​राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव के रूप में चंपत राय की भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर और राजनीतिक हलकों में राय स्पष्ट रूप से विभाजित दिखाई देती है:

  • समर्थकों का तर्क: उनके करीबियों और समर्थकों का मानना है कि चंपत राय का जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण और व्यक्तिगत ईमानदारी से ओतप्रोत रहा है। दशकों तक संगठन की निस्वार्थ सेवा करने वाले व्यक्ति पर किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत संलिप्तता का आरोप लगाना उनके लिए अकल्पनीय है।
  • आलोचकों का दृष्टिकोण: इसके विपरीत, आलोचकों और कुछ स्थानीय लोगों का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में ट्रस्ट से जुड़ी विभिन्न चर्चाएं और अनियमितताओं के सवाल समय-समय पर सामने आते रहे हैं। चूंकि चंपत राय ट्रस्ट के सबसे शीर्ष और केंद्रीय कार्यकारी पद पर हैं, इसलिए यह मानना कठिन है कि किसी भी स्तर की गड़बड़ी उनकी जानकारी के बिना हो सकती है।
  • संस्थागत जवाबदेही का प्रश्न: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत शुचिता और ईमानदारी पर सवाल न उठाए जाएं, परंतु इतने बड़े और ऐतिहासिक ट्रस्ट के मुख्य नियंता होने के नाते संस्थागत जवाबदेही का प्रश्न हमेशा अपनी जगह बना रहता है।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment