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औडिहार के ठाकुर पर पुलिस का शिकंजा, सिर पर 25,000 का इनाम: क्या ढहेगा ठाकुर का किला या फिर 'बाहुबल' से होगी वापसी?

by on | 2026-06-17 22:19:44

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औडिहार के ठाकुर पर पुलिस का शिकंजा, सिर पर 25,000 का इनाम: क्या ढहेगा ठाकुर का किला या फिर 'बाहुबल' से होगी वापसी?

सैदपुर (गाजीपुर)। जनपद के सियासी और जरायम की दुनिया में एक बार फिर सरगर्मी चरम पर है। सैदपुर ब्लॉक प्रमुख हीरा यादव पर हुए  हमले के बाद औडिहार के  देवराज सिंह उर्फ ठाकुर और उनके बेटे भोनू सिंह पर पुलिस ने 25-25 हजार का इनाम ठोक दिया है। लेकिन सवाल सिर्फ इनाम का नहीं है, सवाल उस रसूख का है जिसे ढहाने के लिए परदे के पीछे से पूर्वांचल के कई सियासी दिग्गज गोटियां सेट करने में जुट गए हैं।

​चर्चाओं का बाजार गर्म है— क्या योगी सरकार की कानून व्यवस्था के आगे ठाकुर का यह अभेद्य किला ढह जाएगा, या फिर सियासी रसूख के दम पर ठाकुर एक बार फिर बेदाग उबरकर लौटेंगे?

​सोशल मीडिया पर 'सिम्पेथी कार्ड', समर्थकों ने खोला मोर्चा

​एक तरफ पुलिस की चार टीमें ठाकुर सिंह के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश दे रही हैं, तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर समर्थकों ने मोर्चा संभाल लिया है। फेसबुक से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप्स तक ठाकुर सिंह की 'मसीहाई' की दुहाई दी जा रही है। समर्थकों का साफ कहना है कि ठाकुर सिंह को एकतरफा सियासी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। पोस्ट्स में उन्हें 'गरीबों का मसीहा' बताकर सहानुभूति बटोरने की पुरजोर कोशिश की जा रही है।

​दबंगों की आंखों की किरकिरी या जुर्म का नया चेहरा?

​सैदपुर के स्थानीय गलियारों में बेबाकी से चर्चा करने वाले बताते हैं कि ठाकुर सिंह लंबे समय से इलाके के कई सफेदपोशों और दबंगों की आंखों की किरकिरी बने हुए थे। समर्थकों का तर्क है कि ब्लॉक प्रमुख से विवाद की आड़ में ठाकुर सिंह के बढ़ते राजनीतिक ग्राफ को गिराने की यह एक बड़ी कूटनीति है। लेकिन कानून की नजर में कहानी अलग है। 50 समर्थकों के साथ ब्लॉक कार्यालय में घुसकर एक जनप्रतिनिधि को घायल कर देना किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता।

​दिग्गजों की साख दांव पर, क्या काम आएगा 'रसूख'?

​सूत्रों की मानें तो इस हाई-प्रोफाइल मामले में गाजीपुर से लेकर लखनऊ तक के कई माननीयों और रसूखदारों के फोन घनघनाने लगे हैं। पुलिस पर दबाव बनाने और मामले को ठंडे बस्ते में डालने की जुगत लगाई जा रही है।  लेकिन कप्तान डॉ. ईरज राजा और एएसपी सिटी राकेश मिश्रा के तेवरों से साफ है कि इस बार 'ऊपर की पैरवी' काम नहीं आने वाली। पुलिस अब कोर्ट से गैर-जमानती वारंट (NBW) और कुर्की की तैयारी में है।



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