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G7 में मोदी-ट्रंप की मुलाकात: व्यापारिक तल्खी और होर्मुज संकट के बीच आज महाबैठक

by admin@bebak24.com on | 2026-06-16 20:48:42

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G7 में मोदी-ट्रंप की मुलाकात: व्यापारिक तल्खी और होर्मुज संकट के बीच आज महाबैठक

एवियन (फ्रांस): फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन में आयोजित 52वें जी7 (G7) शिखर सम्मेलन के मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच लगभग 16 महीने (डेढ़ साल) के लंबे अंतराल के बाद पहली आमने-सामने की मुलाकात हुई। इस औचक और संक्षिप्त मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच गजब की गर्मजोशी देखने को मिली।

दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने बेहद गर्मजोशी से हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत की। हालांकि इस अनौपचारिक बातचीत का एजेंडा सामने नहीं आया है, लेकिन इसने बुधवार (17 जून) को दोनों देशों के बीच होने वाली बेहद महत्वपूर्ण और औपचारिक द्विपक्षीय बैठक (Bilateral Meeting) की जमीन तैयार कर दी है।

मुलाकात के पीछे 'तनाव और टाइमिंग' का बड़ा खेल

पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह मुलाकात एक बेहद संवेदनशील और जटिल वैश्विक माहौल के बीच हुई है, जहां दोनों देशों के रिश्तों में हाल ही में कुछ घर्षण बिंदु (Friction Points) उभरे हैं:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में की गई नाकेबंदी से भारत के वाणिज्यिक हित और तेल आपूर्ति सीधे प्रभावित हो रही है।

  • भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा: पिछले ही हफ्ते ओमान के तट के पास एक कमर्शियल जहाज पर हुए घातक हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद हिंद-प्रशांत क्षेत्र और समुद्री सुरक्षा को लेकर रणनीतिक गलियारों में तनाव है।

  • रुबियो का भारत दौरा: भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से व्यापारिक शुल्कों (Tariffs) को लेकर बयानबाजी चल रही थी। इस कड़वाहट को कम करने के लिए हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली का दौरा भी किया था।

क्या है 52वें G7 सम्मेलन का मुख्य एजेंडा?

फ्रांस की मेजबानी में हो रहे इस 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में वैसे तो भारत इसका स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन वैश्विक रणनीतिक महत्ता के कारण पीएम मोदी को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है। इस बार सम्मेलन का मुख्य फोकस निम्नलिखित बिंदुओं पर है:

  1. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain): युद्ध और प्रतिबंधों के बीच सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना।

  2. समुद्री सुरक्षा (Maritime Security): वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों को रोकना।

  3. स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) और अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता।

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अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में नेताओं की 'बॉडी लैंग्वेज' और 'केमिस्ट्री' बहुत कुछ बयां करती है। डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद पीएम मोदी के साथ उनकी यह पहली व्यक्तिगत मुलाकात है। भले ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक टैरिफ और ओमान तट पर हुए हमले के बाद रणनीतिक मोर्चे पर कुछ ठंडी हवा चल रही हो, लेकिन एवियन में दोनों का हंसकर हाथ मिलाना यह दिखाता है कि भारत-अमेरिका के रिश्ते किसी तात्कालिक विवाद से कहीं ऊपर हैं।

भारत के लिए बुधवार को होने वाली द्विपक्षीय वार्ता बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली है। पीएम मोदी को एक तरफ ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' और टैरिफ हठ का सामना करना है, तो दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकेबंदी के कारण भारतीय व्यापारिक जहाजों को हो रहे नुकसान का कड़ा विरोध दर्ज कराना है। रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के बीच, वैश्विक मंच पर भारत का यह संतुलनकारी रुख ही उसकी सबसे बड़ी कूटनीतिक परीक्षा है।



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