ब्रेकिंग न्यूज़
पीएम मोदी ने छात्रों के लिए रोका अपना काफिला: नीट परीक्षा के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर 45 मिनट रुके
राष्ट्रीय राष्ट्रीय

सामरिक ताकत में इजाफा: DRDO ने किया स्वदेशी लॉन्ग रेंज क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण

by admin@bebak24.com on | 2026-06-15 21:04:18

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3045


सामरिक ताकत में इजाफा: DRDO ने किया स्वदेशी लॉन्ग रेंज क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण

भुवनेश्वर | भारत ने रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को मजबूत करते हुए एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सोमवार (15 जून) को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से पूरी तरह भारत में विकसित 'लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल' (LRLACM) का पहला सफल फ्लाइट-टेस्ट पूरा किया।

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी मिशन उद्देश्यों और कठिन पैमानों को पूरी तरह हासिल किया, जो भारतीय सेनाओं की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाला है।

'निर्भय' से 'LRLACM' तक का सफर: पूरी तरह स्वदेशी इंजन और तकनीक

यह स्वदेशी लॉन्ग रेंज क्रूज मिसाइल भारत के पुराने 'निर्भय' मिसाइल कार्यक्रम का ही एक बेहद आधुनिक, उन्नत और पूर्णतः भारतीय स्वरूप है:

  • माणिक इंजन की ताकत: भारत ने साल 2013 में जब निर्भय मिसाइल का परीक्षण शुरू किया था, तब उसमें कुछ विदेशी कलपुर्जे शामिल थे। डीआरडीओ ने लगातार अनुसंधान कर विदेशी निर्भरता को खत्म किया और इसमें भारत में ही निर्मित 'माणिक' (Manik) टर्बोफैन इंजन और स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली को सफलतापूर्वक फिट किया।

  • भारतीय उद्योगों की भागीदारी: इस मिसाइल के विकास में देश के निजी और सार्वजनिक रक्षा उद्योगों ने बड़ी भूमिका निभाई है। रक्षा मंत्रालय ने इसे स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक टर्निंग पॉइंट बताया है।

  • सैन्य परिषद की मंजूरी: रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना (तीनों सेनाओं) के बेड़े में शामिल करने के लिए इस मिसाइल प्रोजेक्ट को विशेष मंजूरी दी थी।

दुश्मन के रडार के लिए 'अदृश्य काल': मिसाइल की खासियतें

LRLACM भारत के मिसाइल बेड़े को एक नई और अचूक क्षमता प्रदान करती है, जो इसे अन्य मिसाइलों से अलग बनाती है:

  • टेरेन हगिंग (Terrain Hugging) क्षमता: यह मिसाइल दागने के बाद आसमान में बहुत ऊपर जाने के बजाय जमीन या समुद्र की सतह से बिल्कुल सटकर (बहुत कम ऊंचाई पर) उड़ती है। इस तकनीक के कारण दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम इसे समय रहते पकड़ नहीं पाते।

  • मल्टी-प्लेटफॉर्म तैनाती: यह एक बहुउपयोगी मिसाइल है। इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और पनडुब्बियों (Submarines) से दागा जा सकेगा, साथ ही थल सेना के मोबाइल लॉन्चर और वायुसेना के लड़ाकू विमानों से भी ऑपरेट किया जा सकेगा।

'ब्रह्मोस' और 'LRLACM' की जुगलबंदी

मिसाइलप्रकारगति और रेंजमुख्य विशेषता
ब्रह्मोस (BrahMos)सुपरसोनिक क्रूजअत्यधिक तेज रफ्तार (2.8 मैक), 290-500 किमी रेंजत्वरित और घातक हमले के लिए।
LRLACMसबसोनिक क्रूजलंबी दूरी (Long Range), जमीन से सटकर उड़नाकम लागत में दुश्मन के अंदरूनी ठिकानों को रडार से बचकर तबाह करने के लिए।

Bebak24 टेक

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का ढोल पीटना एक बात है, लेकिन स्वदेशी टर्बोफैन इंजन (माणिक) के साथ एक लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण करना जमीन पर आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी गवाही है। अब तक भारत क्रूज मिसाइल तकनीक के लिए काफी हद तक विदेशी मदद या रशियन कलपुर्जों पर निर्भर था, लेकिन LRLACM के आने से यह कमी दूर हो गई है।

सामरिक दृष्टि से देखें तो ब्रह्मोस मिसाइल अपनी तेज गति के लिए जानी जाती है, लेकिन वह बहुत महंगी है और उसकी रेंज एक सीमा तक ही प्रभावी है। इसके विपरीत, स्वदेशी लॉन्ग रेंज क्रूज मिसाइल कम खर्च में दुश्मन की सीमा के सैकड़ों किलोमीटर अंदर घुसकर सटीक हमला करने की क्षमता देती है। यूक्रेन-रूस युद्ध ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक युद्धों में 'लो-कॉस्ट, लॉन्ग-रेंज' क्रूज मिसाइलें कितनी निर्णायक साबित होती हैं। यह परीक्षण चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर भारत की प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence) को एक नए शिखर पर ले जाएगा।



Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment