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कुणाल घोष पर अंडा हमला: गुस्साए युवक ने कहा— 'जनता पर बहुत जुल्म किए'

by admin@bebak24.com on | 2026-06-15 21:02:39

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कुणाल घोष पर अंडा हमला: गुस्साए युवक ने कहा— 'जनता पर बहुत जुल्म किए'

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार और दिल्ली में 20 लोकसभा सांसदों की ऐतिहासिक बगावत के बाद, अब जमीन पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं को आम जनता के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। ताजा मामला कोलकाता का है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के ठीक बाहर टीएमसी के फायरब्रांड विधायक और प्रवक्ता कुणाल घोष पर एक स्थानीय युवक ने सरेआम अंडे फेंक दिए।

पार्टी के भीतर मचे आंतरिक घमासान के बीच इस जमीनी हमले ने टीएमसी नेतृत्व की सुरक्षा और जनता के बीच उनकी गिरती साख को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

'जुल्म करने वाले इसी के लायक हैं' — हमलावर युवक का बड़ा आरोप

यह घटना उस समय हुई जब कुणाल घोष मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर वरिष्ठ नेताओं के साथ एक आपातकालीन बैठक में शामिल होकर बाहर निकल रहे थे।

  • हमले का तरीका: जैसे ही कुणाल घोष बाहर खड़े पत्रकारों के सवालों का जवाब देने के लिए रुके, अचानक भीड़ में से उन पर अंडे फेंके गए।

  • चंदन नाम के युवक ने ली जिम्मेदारी: घटना को अंजाम देने वाले स्थानीय युवक चंदन को पुलिस ने तुरंत हिरासत में ले लिया। मीडिया से बात करते हुए चंदन ने खुलेआम कहा:

"टीएमसी नेताओं ने आम लोगों पर बहुत जुल्म किए हैं और कुणाल घोष भी इसमें कम नहीं हैं। वे लोग इसी इलाज के लायक हैं। इन्होंने हमारे साथ बहुत बुरा किया है, इसलिए यह हमारा गुस्सा है।"

'मेरी आंख फूट सकती थी' — घटना पर कुणाल घोष की सफाई

इस औचक हमले से असहज हुए कुणाल घोष ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह विरोधियों की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने कहा:

"मैं ममता दीदी के घर से मीटिंग कर लौट रहा था। मैं निहत्था और बिना किसी सुरक्षा तामझाम के मीडिया के कैमरों के सामने खड़ा था, इसलिए मुझे आसानी से निशाना बनाया गया। दो युवक थे, जिनमें से एक ने सीधे मेरे चेहरे को निशाना बनाकर अंडा फेंका। आखिरी पल में मैंने अपना चेहरा घुमा लिया, वरना अंडा सीधे मेरे चश्मे के शीशे पर लगता और कांच टूटने से मेरी आंख गंभीर रूप से जख्मी हो सकती थी।"

टीएमसी नेताओं पर लगातार 'जनता का प्रहार' : अभिषेक बनर्जी भी नहीं बचे

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद टीएमसी नेताओं के खिलाफ इस तरह की हिंसक और अपमानजनक घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं:

  1. अभिषेक बनर्जी पर हमला: हाल ही में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी जब दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर दौरे पर थे, तब स्थानीय प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को रोककर न सिर्फ नारेबाजी की, बल्कि उन पर अंडे और पत्थर भी फेंके।

  2. मदन मित्रा और सब्यसाची दत्ता का हाल: इससे पहले कामरहाटी के विधायक मदन मित्रा के काफिले पर अरियादहा में अंडे फेंके गए थे। वहीं, रंगदारी के मामले में गिरफ्तार टीएमसी नेता सब्यसाची दत्ता को जब कोर्ट में पेश किया जा रहा था, तब भी गुस्साए लोगों ने उन पर टमाटर और अंडे बरसाए थे।

अंडों के हमले के बीच कुणाल घोष का बागी सांसदों पर तीखा तंज

इस व्यक्तिगत हमले के बावजूद कुणाल घोष ने दिल्ली में टीएमसी तोड़ने वाले 20 बागी सांसदों पर जमकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने दावा किया कि त्रिपुरा की 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी' (NCP) में विलय करने वाले सांसद असल में भाजपा में जाना चाहते थे।

घोष ने तंज कसते हुए कहा, "ये सभी बागी सांसद सीधे भाजपा का पटका पहनना चाहते थे और केंद्रीय मंत्रियों के संपर्क में थे। लेकिन भाजपा ने इनके लिए अपने मुख्य दरवाजे बंद कर दिए और इन्हें सीधे एंट्री देने के बजाय एक छोटी क्षेत्रीय पार्टी का रास्ता थमा दिया। एनसीपीआई में जाना इनकी मजबूरी है, लोकतंत्र के लिए यह सौदा बेहद शर्मनाक है।"

Bebak24 टेक

पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'पॉलिटिकल वायलेंस'  कोई नई बात नहीं है, लेकिन जो रुख कभी वामपंथियों या भाजपा के खिलाफ दिखता था, वह अब टीएमसी नेताओं की तरफ मुड़ चुका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर के ठीक बाहर, जहां सुरक्षा व्यवस्था सबसे चाक-चौबंद होती है, वहां पार्टी के मुख्य प्रवक्ता पर अंडा फेंक दिया जाना यह बताता है कि पुलिस का खौफ जनता के मन से पूरी तरह खत्म हो चुका है।

टीएमसी इस समय दो पाटों के बीच पिस रही है— ऊपर दिल्ली में सांसद पार्टी तोड़ रहे हैं और नीचे जमीन पर स्थानीय नेता जनता के 'एंटी-इंकंबेंसी' और गुस्से का शिकार हो रहे हैं। कुणाल घोष का बागी सांसदों पर दिया गया बयान अपनी जगह हेडलाइन बटोर सकता है, लेकिन सच यह है कि अगर टीएमसी ने अपने नेताओं के प्रति जनता के इस जमीनी गुस्से और कानून-व्यवस्था को तुरंत नहीं सुधारा, तो संगठन को बिखरने से रोकना नामुमकिन हो जाएगा।



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