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बालखंडी महादेव धाम पर शिवपुराण का भव्य समापन: आस्था के सैलाब के बीच पं. प्रदीप मिश्रा ने समझाया मानव जीवन का मर्म

by on | 2026-06-15 16:38:43

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बालखंडी महादेव धाम पर शिवपुराण का भव्य समापन: आस्था के सैलाब के बीच पं. प्रदीप मिश्रा ने समझाया मानव जीवन का मर्म


विशेष रिपोर्ट | बलिया (बांसडीह)

संवाददाता, बलिया: जनपद के पावन क्षेत्र बांसडीह के अंतर्गत फुलवरिया में स्थित स्वयंभू बालखंडी महादेव धाम पर आयोजित संगीतमय शिवपुराण कथा का सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर भावपूर्ण समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन विख्यात कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने उपस्थित जनसैलाब को संबोधित करते हुए जीवन, धर्म, समर्पण और बलिया की आध्यात्मिक महत्ता पर गंभीर प्रकाश डाला। इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान में प्रदेश सरकार के मंत्रियों और पूज्य संतों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिसने इस आयोजन की भव्यता को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया।

८४ लाख योनियों में केवल मनुष्य ही कमाने की दौड़ में: पं. प्रदीप मिश्रा

​पं. प्रदीप मिश्रा ने अपने अंतिम दिन के प्रवचन में लोक-कल्याण और व्यावहारिक अध्यात्म को जोड़ते हुए कई गंभीर जीवन-सत्यों को रेखांकित किया। उन्होंने ईश्वरीय विधान और मानव की व्यर्थ चिंता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि:

​"सृष्टि की ८४ लाख योनियों में केवल मानव ही एक ऐसी योनि है जो धनार्जन, नौकरी और व्यापार के चक्रव्यूह में उलझी है। इसके विपरीत, अन्य योनियों के जीवों के भरण-पोषण की व्यवस्था स्वयं विधाता करते हैं।"

​महाराज श्री ने कहा कि यह प्रसंग मनुष्य को अपनी कर्मठता बनाए रखते हुए व्यर्थ की चिंताओं से मुक्त होकर परमात्मा पर अडिग विश्वास रखने की प्रेरणा देता है। इसके साथ ही उन्होंने मनुष्य के जीवन चक्र को चार विशिष्ट पड़ावों (जन्मों) में विभाजित किया, जिसमें प्रथम जन्म मातृ-गर्भ से भौतिक संसार में आगमन, द्वितीय जन्म विवाह के उपरांत सामाजिक एवं पारिवारिक उत्तरदायित्वों में प्रवेश, तृतीय जन्म संतान (पुत्र) प्राप्ति (जहाँ से वंश और अस्तित्व का विस्तार होता है) तथा चतुर्थ जन्म भौतिक देह का त्याग कर परम सत्य (मोक्ष) में विलीन हो जाना है। उन्होंने बलिया को महर्षि भृगु की चौथी जन्मस्थली और माँ गंगा तथा सरयू की पावन गोद बताते हुए इसे विशुद्ध भक्ति और राष्ट्रभक्ति की अद्वितीय भूमि घोषित किया।

'श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्' महामंत्र से कल्याण, तीन माह में भरेगी झोली

​शिवपुराण की विधेश्वर संहिता का उद्धरण देते हुए पूज्य महाराज श्री ने स्पष्ट किया कि जो साधक निरंतर "श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्" महामंत्र का जाप करता है, उसके दर्शन मात्र से अन्य जीवात्माओं का कल्याण संभव हो जाता है। उन्होंने बल देकर कहा कि 'शिव' ही शिव हैं और 'शंकर' ही शंकर हैं—उनकी शरण में जाने वाला कभी रिक्त हस्त नहीं लौटता। कथाव्यास ने भक्तों को आश्वस्त करते हुए कहा कि जो भी श्रद्धालु पूर्ण समर्पण और निश्छल हृदय से महादेव से याचना करता है, वह 'कुबेर भंडारी' तीन मास के भीतर उसकी झोली अवश्य भर देते हैं। भक्ति की पूर्णता अटूट विश्वास और अहंकार-शून्य समर्पण में ही निहित है।

राजनेताओं और शीर्ष संतों का रहा समागम

​इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने और व्यवस्थाओं को सुदृढ़ रखने में क्षेत्र के प्रमुख व्यक्तित्वों और राजनेताओं की सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह रहे, जिनकी देखरेख में इस विशाल समागम का सफल संचालन हुआ। कथा के अंतिम दिन उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों और शीर्ष संतों ने व्यासपीठ का आशीर्वाद लिया और बालखंडी महादेव के दरबार में हाजिरी लगाई:
अतिथि / विभूति

पद / गरिमा

महामंडलेश्वर सतुआ बाबा

शीर्ष सनातन संत एवं पूज्य दंडी स्वामी

डॉ. संजय निषाद

कैबिनेट मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार

दयाशंकर सिंह (आयोजक)

परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), उ.प्र. सरकार

विजय लक्ष्मी गौतम

राज्य मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
विशाल भंडारे के साथ पूर्णाहुति: समापन के अवसर पर भव्य महाआरती के बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बलिया सहित आसपास के कई जनपदों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। पूरा क्षेत्र 'हर-हर महादेव' और 'शरणम् शिवम्' के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान रहा।





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