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पर्यावरण और सेहत का अनूठा संदेश: शिव-शिवा स्नेह संस्था ने विश्व साइकिल दिवस पर अमितेश और भरत को किया सम्मानित

by on | 2026-06-03 20:52:24

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पर्यावरण और सेहत का अनूठा संदेश: शिव-शिवा स्नेह संस्था ने विश्व साइकिल दिवस पर अमितेश और भरत को किया सम्मानित

गाजीपुर (बेबाक 24):

समाज के वंचित वर्गों के उत्थान, शिक्षा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में वर्ष 2002 से निरंतर कार्यरत प्रतिष्ठित पंजीकृत सामाजिक संस्था 'शिव शिवा स्नेह संस्था' (फतेहपुर, सिकंदर, फुल्लनपुर) द्वारा विश्व साइकिल दिवस के शुभ अवसर पर एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वर्षों से नियमित रूप से साइकिल चलाकर स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण का अलख जगाने वाले स्थानीय जागरूक नागरिकों को नकद पुरस्कार और सम्मान पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।

​साइकिल चालकों को मिला नकद पुरस्कार, साझा किए अनुभव

​कार्यक्रम के दौरान पिछले 7 वर्षों से लगातार साइकिल को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने वाले अमितेश सिंह को ₹2500 तथा एक अन्य निरंतर साइकिल सवार भरत यादव को ₹2000 की सम्मान राशि देकर पुरस्कृत किया गया।

​सम्मानित होने के बाद अमितेश सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे सुबह-शाम कहीं भी आने-जाने के लिए केवल साइकिल का ही उपयोग करते हैं। उन्होंने बताया:

​"साइकिल न केवल ईंधन और पैसे की बचत करती है, बल्कि यह डायबिटीज और अन्य लाइफस्टाइल जनित बीमारियों को दूर रखने में रामबाण है। मैंने पिछले एक साल में 10 दिन भी मोटरसाइकिल का इस्तेमाल नहीं किया है और स्थानीय यातायात के लिए पूरी तरह साइकिल पर ही आश्रित हूँ।"


​वक्ताओं ने रेखांकित किया साइकिल का ऐतिहासिक व सामाजिक महत्व

​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शहर के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजेश सिंह मौजूद रहे। उन्होंने चिकित्सकीय दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि वे स्वयं अपने मरीजों को नियमित साइकिल चलाने की सलाह देते हैं। मोटापा, ब्लड प्रेशर और जीवनशैली से जुड़ी तमाम बीमारियों में साइकिल चलाना एक बेहद कारगर और सुलभ उपचार साबित हो सकता है।

  • संजय राय (वरिष्ठ वक्ता): उन्होंने साइकिल के महत्व के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण-हितैषी पक्षों को बारीकी से समझाते हुए दैनिक जीवन में इसके अधिकतम उपयोग को रेखांकित किया।
  • बद्रीश श्रीवास्तव (शिक्षक): उन्होंने साइकिल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस तरह जर्मनी में आविष्कार होने के बाद साइकिल विविध रूपों में दुनिया भर के जनमानस के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गई।
  • इंजीनियर संजीव गुप्ता: उन्होंने सुझाव दिया कि साइकिल चलाने के प्रचार-प्रसार और सेहत के महत्व को जन-जन तक पहुँचाने के लिए डॉक्टरों और चिकित्सा जगत की मदद लेना सबसे प्रभावी कदम साबित होगा।

​सरकारी अनुदान के बिना आत्मनिर्भरता की मिसाल: शिव-शिवा स्नेह संस्था

​बिना किसी सरकारी अनुदान के जनभागीदारी और सामाजिक सहयोग से 'स्नेह पाठशाला' व 'प्राकृतिक खेती' जैसे बड़े अभियान चलाने वाली इस संस्था के उपाध्यक्ष व कार्यक्रम के अध्यक्ष उमेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा:

​"एक तरफ देश के प्रधानमंत्री कॉस्ट कटिंग और ईंधन बचाने पर लगातार जोर दे रहे हैं, वहीं हमें इसे जमीनी स्तर पर लागू करने की जरूरत है। साइकिल का उपयोग कर हम कार्बन उत्सर्जन को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। अमितेश सिंह और भरत यादव जैसे लोग समाज के सच्चे रोल मॉडल हैं।"


बड़ी घोषणा: उमेश कुमार श्रीवास्तव ने मंच से घोषणा की कि अगले वर्ष संस्था साइकिलिंग को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने के लिए एक बड़ी प्रतियोगिता आयोजित करेगी। इसके साथ ही, शहर के युवाओं के लिए एक समर्पित 'साइकिलिंग क्लब' बनाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि साइकिलिंग को एक सुरक्षित और नियमित गतिविधि का रूप दिया जा सके।

​गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ कार्यक्रम

​कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के उपाध्यक्ष उमेश कुमार श्रीवास्तव ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन संतोष जायसवाल द्वारा किया गया। इस मौके पर समाज में 'सेवा, शिक्षा, संस्कार, पर्यावरण और मानवता' के मूल्यों को सुदृढ़ करने के संकल्प को दोहराया गया।

​इस अवसर पर शीर्षदीप, सुरजीत कुमार, पारस, मुरारी सहित शहर के कई गणमान्य और संभ्रांत लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने संस्था के इस अनूठे प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की।



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