by on | 2026-07-07 20:32:25
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कोलकाता/बारुईपुर ब्यूरो (बेबाक24): पश्चिम बंगाल के बारुईपुर (Baruipur) में नाबालिग किशोरी के साथ हुई बर्बरता और जघन्य हत्याकांड के बाद उपजा जनाक्रोश अब चरम पर पहुंच गया है। मामले की संवेदनशीलता और बिगड़ते हालातों को देखते हुए मंगलवार को खुद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बारुईपुर का दौरा किया।
मुख्यमंत्री ने पीड़िता के माता-पिता से सीधे मुलाकात कर उन्हें त्वरित न्याय का भरोसा दिया है। इससे पहले उन्होंने राज्य सचिवालय में विशेष जांच दल (SIT) के साथ एक हाई-लेवल बैठक कर जांच की प्रगति का जायजा लिया।
दक्षिण 24-परगना जिले के बारुईपुर इलाके में रविवार को जो घटना सामने आई, उसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए हैं:
जिंदा तालाब में फेंका: पुलिस और पोस्टमार्टम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नाबालिग किशोरी के साथ सामूहिक बलात्कार (Gangrape) करने के बाद दरिंदों ने उसे जिंदा हालत में ही एक बोरे में बंद किया और तालाब में फेंक दिया, जिससे डूबने से उसकी मौत हो गई।
गुस्साई भीड़ का न्याय: इस खौफनाक वारदात की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उग्र भीड़ ने कानून अपने हाथ में लेते हुए एक संदिग्ध युवक की पीट-पीटकर हत्या (Mob Lynching) कर दी।
सोमवार को एक और शव: इस मामले में रहस्य तब और गहरा गया जब सोमवार को उसी तालाब से एक और अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया।
मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी: इस दोहरे अपराध और बलात्कार के मामले में पुलिस ने मुख्य अभियुक्त समेत तीन लोगों— आनंद सरदार, प्रभाष मंडल और दिवाकर सरदार को गिरफ्तार कर लिया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सीधे बारुईपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचे। उनके साथ राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) सिद्धनाथ गुप्ता भी मौजूद थे।
परिवार को ढांधस: मुख्यमंत्री ने एसपी दफ्तर में पीड़िता के माता-पिता से मुलाकात की और भावुक परिवार को आश्वस्त किया कि सरकार उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।
नजीर बनने वाली सजा: मुख्यमंत्री ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि एसआईटी (SIT) जांच को बेहद तेज गति से पूरा करेगी और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए दोषियों को ऐसी सजा दिलाई जाएगी जो भविष्य के लिए एक मिसाल या नजीर बने, ताकि कोई दोबारा ऐसी हैवानियत करने की जुर्रत न कर सके।
बारुईपुर का यह इलाका जादवपुर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां की सांसद तृणमूल कांग्रेस के बागी खेमे की नेता सयानी घोष हैं।
जनता का फूटा गुस्सा: जब सांसद सयानी घोष और काकोली घोष दस्तीदार पीड़ित इलाके का दौरा करने पहुंचीं, तो स्थानीय निवासियों ने उनकी गाड़ियों को घेर लिया। लोगों ने सांसद के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया और 'वापस जाओ' के नारे लगाए। जनता में इस बात को लेकर भारी नाराजगी थी कि घटना के तुरंत बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि उनके बीच क्यों नहीं पहुंचे।
सर्वदलीय नेताओं का जमावड़ा: इससे पहले बीजेपी की ओर से अग्निमित्रा पॉल और लॉकेट चटर्जी ने परिवार से मुलाकात की थी, जिसके बाद टीएमसी के ऋतब्रत बनर्जी, विधायक सिउली साहा और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य भी डैमेज कंट्रोल के लिए मौके पर पहुंचे थे।
पीड़ित परिवार से मिलने और हालात का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इलाके के सभी स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ एक बंद कमरे में समीक्षा बैठक की। इस बैठक में सांसद सयानी घोष, ऋतब्रत घोष और विधानसभा अध्यक्ष व स्थानीय विधायक विमान बनर्जी भी मौजूद रहे।
बैठक के बाद सोनारपुर दक्षिण की विधायक रूपा गांगुली ने मीडिया को मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने कहा— "मुख्यमंत्री ने हम सभी से इस घटना के बारे में एक-एक बिंदु की विस्तार से जानकारी ली है। उन्होंने पुलिस प्रशासन को बिल्कुल स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं कि चाहे कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो, एक भी दोषी बचना नहीं चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि अपराधियों को कानून के दायरे में लाकर ऐसी ऐतिहासिक सजा दी जाएगी जो नजीर बने।"
बारुईपुर की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि जब पुलिस और कानून व्यवस्था समय पर कदम नहीं उठाती, तो समाज में अराजकता और 'मॉब लिंचिंग' जैसी घटनाएं पैर पसारने लगती हैं। एक मासूम को जिंदा बोरे में बंद कर तालाब में फेंक देना क्रूरता की सारी हदें पार करता है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का खुद सचिवालय में एसआईटी की बैठक लेना और फिर जमीन पर एसपी दफ्तर जाकर परिवार से मिलना यह दिखाता है कि प्रशासन इस वक्त चौतरफा दबाव में है।
'बेबाक24' का मानना है कि जादवपुर की सांसद सयानी घोष के खिलाफ स्थानीय लोगों का प्रदर्शन पूरी तरह से जायज है। जब आपके संसदीय क्षेत्र की एक बेटी के साथ ऐसी दरिंदगी हो जाती है, तो नेताओं को कूटनीतिक बयानों और बागी गुटबाजी से ऊपर उठकर सबसे पहले पीड़ित परिवार के आंसू पोंछने पहुंचना चाहिए था। चुनावी रैलियों में पसीना बहाने वाले नेता संकट के समय गायब रहेंगे, तो जनता का ऐसा ही आक्रोश झेलना पड़ेगा। अब जबकि मुख्यमंत्री ने खुद कड़े निर्देश दिए हैं और डीजीपी सिद्धनाथ गुप्ता मामले को देख रहे हैं, तो उम्मीद की जानी चाहिए कि आनंद सरदार और उसके साथियों को बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के जल्द से जल्द फांसी के फंदे तक पहुंचाया जाएगा। बंगाल की बेटियों को खोखले वादे नहीं, सुरक्षित सड़कें और त्वरित न्याय चाहिए।
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