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बारुईपुर रेप-हत्याकांड पर सयानी घोष का बड़ा बयान, बोलीं— 'दोषियों को मिले कड़ी सजा'; ममता बनर्जी को नजरबंद करने के आरोपों से गरमाई सियासत

by on | 2026-07-07 20:26:13

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बारुईपुर रेप-हत्याकांड पर सयानी घोष का बड़ा बयान, बोलीं— 'दोषियों को मिले कड़ी सजा'; ममता बनर्जी को नजरबंद करने के आरोपों से गरमाई सियासत

कोलकाता/बारुईपुर ब्यूरो (बेबाक24): पश्चिम बंगाल के दक्षिणी बाहरी इलाके बारुईपुर (Baruipur) में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित बलात्कार और फिर उसकी नृशंस हत्या के मामले ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य हत्याकांड को लेकर जनता में भारी गुस्से के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) की बागी नेता सयानी घोष मंगलवार को पीड़ित परिवार से मिलने बारुईपुर पहुंचीं।

इस संवेदनशील मुद्दे पर सयानी घोष ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके घर में ही कथित तौर पर नजरबंद (रोके जाने) करने के आरोपों के बाद बंगाल की राजनीति में एक नया उबाल आ गया है।

1. 'बच्ची की मौत पर हमें भी उतना ही दुख है'— सयानी घोष

बारुईपुर में पीड़ित परिवार से मुलाकात करने के बाद सयानी घोष ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:

सयानी घोष का आधिकारिक बयान:

"मैं पीड़ित परिवार से मिली हूं और उनका दर्द बेहद असहनीय है। जब किसी मासूम की जान जाती है, जब एक बच्ची की इस तरह मौत होती है, तो हमें भी उतना ही दुख होता है। हमें अपनी मुख्यमंत्री से यही उम्मीद है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, सच्ची और बेहद गहन जांच (Rigorous Investigation) की जाए। जो भी दरिंदे इसके लिए दोषी हैं, उन्हें कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।"

2. पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद लगी POCSO की धाराएं

इस मामले में शुरुआत से ही स्थानीय पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे थे:

  • शुरुआती लापरवाही: नाबालिग लड़की के परिजनों ने शुरुआत में ही आरोप लगाया था कि हत्या से पहले बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार (Gangrape) हुआ था। इसके बावजूद, पुलिस ने शुरुआत में केवल हत्या का मामला दर्ज किया और रेप की धाराओं को शामिल नहीं किया।

  • पोक्सो एक्ट के तहत मामला: हालांकि, अब शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Post-Mortem Report) के आने और उसमें बर्बरता की पुष्टि होने के बाद पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा है। अब इस मामले में पोक्सो (POCSO) की सख्त धाराओं के तहत बलात्कार का मामला दर्ज कर लिया गया है।

3. 'ममता बनर्जी को घर से निकलने से रोका'— सांसद डेरेक ओ'ब्रायन का सनसनीखेज दावा

इस बीच, बारुईपुर की घटना को लेकर राज्य के प्रशासनिक गलियारों में तब हड़कंप मच गया जब टीएमसी ने पुलिस पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को रोकने का आरोप लगाया।

  • कालीघाट आवास पर पुलिस का पहरा: तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद बारुईपुर जाकर पीड़ित परिवार से मिलने का फैसला किया, तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए उनके कालीघाट स्थित आवास के बाहर भारी संख्या में जवान तैनात कर दिए ताकि वे बाहर न निकल सकें।

  • डेरेक ओ'ब्रायन ने साझा की तस्वीरें: टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें पोस्ट कीं, जिनमें कोलकाता के कालीघाट में ममता बनर्जी के घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात नजर आ रहा है। इस खबर के फैलते ही ममता बनर्जी के आवास के बाहर बड़ी संख्या में टीएमसी समर्थक और नेताओं का हुजूम जुटना शुरू हो गया है।

बेबाक24 टेक

बारुईपुर की यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि पश्चिम बंगाल में महिलाओं और मासूम बच्चियों की सुरक्षा को लेकर जमीनी हालात कितने भयावह हो चुके हैं। सबसे शर्मनाक बात यह है कि पुलिस ने शुरुआत में परिजनों के गुहार लगाने के बावजूद रेप का मामला दर्ज क्यों नहीं किया? क्या पुलिस हमेशा की तरह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के पीछे छुपकर मामलों को हल्का करने की कोशिश कर रही थी? अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सच सामने न आता, तो क्या इस मासूम को इंसाफ दिलाने की दिशा में पोक्सो एक्ट लगाया जाता? यह सीधे तौर पर पुलिसिया तंत्र की संवेदनहीनता है।

'बेबाक24' का मानना है कि सयानी घोष का पीड़ित परिवार से मिलना और मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग करना उनकी अपनी ही सरकार की कानून व्यवस्था पर एक मौन सवाल है। वहीं दूसरी तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पीड़ित परिवार से मिलने जाने से रोकने के लिए उनके घर के बाहर पुलिस की घेराबंदी करना प्रशासनिक कायरता और तानाशाही का प्रतीक है। आखिर प्रशासन विपक्ष और नेताओं को पीड़ितों का आंसू पोंछने जाने से क्यों रोकना चाहता है? क्या बारुईपुर में कुछ ऐसा है जिसे छुपाने की कोशिश की जा रही है? सरकार को राजनीति छोड़कर इस मामले में स्पीडी ट्रायल (Fast-track court) के जरिए दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाना होगा, तभी जनता का गुस्सा शांत होगा।



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