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काशी से योगी का 'मास्टरस्ट्रोक': शिक्षा और सेहत का डबल डोज, 1.10 करोड़ बच्चों को DBT की सौगात और 12 लाख गुरुओं को 'कैशलेस कवच'!

by on | 2026-07-08 14:55:09

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काशी से योगी का 'मास्टरस्ट्रोक': शिक्षा और सेहत का डबल डोज, 1.10 करोड़ बच्चों को DBT की सौगात और 12 लाख गुरुओं को 'कैशलेस कवच'!

वाराणसी: कहते हैं कि जब काशी से कोई संकल्प लिया जाता है, तो उसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दो दिवसीय वाराणसी दौरे के दौरान बड़ालालपुर के ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर (TFC) से यूपी की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक ऐसा ही बड़ा 'मास्टरस्ट्रोक' खेला है। सरकार ने न सिर्फ देश के भविष्य (छात्रों) की जेब मजबूत की है, बल्कि उनका भविष्य संवारने वाले गुरुओं (शिक्षकों) को भी सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा का अभेद्य कवच दे दिया है।

​सीधे शब्दों में कहें तो- नौनिहालों को पढ़ाई का खर्च और गुरुओं को बीमारी से बेफिक्री की गारंटी!

​आइए 'खबर दो बेबाक 24' की बेबाक शैली में समझते हैं कि सीएम योगी की इस 'शिक्षा क्रांति' के मुख्य स्तंभ क्या हैं:

​ गुरुओं को 'कैशलेस कवच': 12 लाख परिवारों को बड़ी राहत

​अब यूपी के शिक्षकों और शिक्षा कर्मियों को बीमारी के वक्त इलाज के खर्च के लिए हाथ नहीं फैलाना होगा। सीएम योगी ने 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' की शुरुआत कर दी है।

किसे मिलेगा फायदा: प्रदेश के 12 लाख शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, विशेष शिक्षक, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों के कर्मचारी, रसोइए और उनके आश्रित।


क्या है खास: सरकारी और लिस्टेड प्राइवेट अस्पतालों में लगभग 1900 इलाज पैकेजों के तहत मुफ्त कैशलेस इलाज मिलेगा।


बेबाक बात: सबसे बड़ी राहत यह है कि इस योजना का पूरा सालाना प्रीमियम राज्य सरकार खुद भरेगी, यानी कर्मचारियों की जेब पर ₹1 का भी बोझ नहीं पड़ेगा।


​ 1.10 करोड़ बच्चों के खातों में सीधे पहुंचे ₹1,320 करोड़

​अक्सर सरकारी योजनाओं में 'बिचौलियों' के खेल की शिकायतें आती थीं, लेकिन योगी सरकार ने सीधे 'नो-ब्रोकर' पॉलिसी अपनाई। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के पहले चरण में 1.10 करोड़ छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के बैंक खातों में ₹1,320 करोड़ की धनराशि DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए सीधे ट्रांसफर कर दी गई।

प्रति छात्र: ₹1,200 की राशि।


मकसद: इस पैसे से बच्चे यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूते-मोजे, स्वेटर और स्टेशनरी खरीदेंगे।


योगी का संदेश: सीएम ने साफ कहा कि, "कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, यह केवल सरकार की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है।"


​ SBI के साथ 'मेगा डील': 10 लाख कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा

​सिर्फ इलाज ही नहीं, भविष्य की सुरक्षा भी तय की गई है। बेसिक शिक्षा विभाग और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के बीच एक बड़ा एमओयू (MoU) साइन हुआ है। इसके तहत लगभग 10 लाख शिक्षकों और संविदा कर्मियों को:

​ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस


​पर्सनल एक्सीडेंट कवर


​एयर एक्सीडेंट कवर


​परिवार की सुरक्षा से जुड़ी अन्य वित्तीय सुविधाएं मिलेंगी।


​ 'ग्रीन एंड क्लीन' स्कूलों को मिला राष्ट्रीय सम्मान

​इस भव्य कार्यक्रम में सिर्फ योजनाओं की झड़ी ही नहीं लगी, बल्कि उन स्कूलों की पीठ भी थपथपाई गई जिन्होंने पर्यावरण और स्वच्छता में मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय स्तर पर चुने गए 12 स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों के प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।

"शिक्षा में निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता..."

मंच से हुंकार भरते हुए सीएम योगी ने कहा कि मजबूत शिक्षा ही विकसित भारत की नींव है। पिछले 9 वर्षों में यूपी ने कानून-व्यवस्था से लेकर विकास और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी एक नई और कड़क पहचान बनाई है। हमारा लक्ष्य सिर्फ साक्षर बनाना नहीं, बल्कि अनुशासित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है।

मंच पर दिग्गजों का जमावड़ा:

इस ऐतिहासिक शुरुआत के गवाह श्रम मंत्री अनिल राजभर, माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, पीडब्ल्यूडी राज्य मंत्री कुंवर बृजेश, वाराणसी के मेयर अशोक तिवारी, विधायक नीलकंठ तिवारी समेत प्रशासनिक अमले के बड़े अफसर (मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, डीएम सत्येंद्र कुमार) रहे।

बेबाक टिप्पणी:

योगी सरकार का यह कदम टाइमिंग और टारगेट दोनों के लिहाज से सटीक है। एक तरफ गरीब बच्चों को स्कूल जाने के लिए बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं, तो दूसरी तरफ मानदेय पर काम करने वाले शिक्षामित्रों और रसोइयों को कैशलेस इलाज देकर सरकार ने यह जता दिया है कि उनके एजेंडे में समाज का आखिरी व्यक्ति सबसे पहले है। देखना यह होगा कि जमीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन कितनी रफ्तार से होता है।



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