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जेल में अवैध मुलाकातों का खेल: कोर्ट में पेश नहीं हुए अब्बास और निकहत, अब 6 जून को होगी अगली जंग!

by on | 2026-05-25 00:37:15

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जेल में अवैध मुलाकातों का खेल: कोर्ट में पेश नहीं हुए अब्बास और निकहत, अब 6 जून को होगी अगली जंग!


बांदा।

चित्रकूट जेल में नियमों की धज्जियां उड़ाकर होने वाली 'अवैध मुलाकातों' के हाई-प्रोफाइल मामले में शनिवार को बांदा की विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत में जोरदार बहस हुई। हालांकि, बाहुबली मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी और उनकी पत्नी निकहत बानो इस बार अदालत के सामने पेश नहीं हुए—दोनों की तरफ से हाजिरी माफी की अर्जी दाखिल की गई।

​वहीं दूसरी तरफ, इस पूरे खेल में फंसे निलंबित जेल अधीक्षक संतोष कुमार सागर ने खुद को पाक-साफ बताते हुए डिस्चार्ज (उन्मोचन) प्रार्थना पत्र पर अदालत में अपनी दलीलें रखीं। दोनों पक्षों के वकीलों के बीच चली लंबी बहस के बाद भी जब सुनवाई पूरी नहीं हो सकी, तो माननीय अदालत ने इस मामले की अगली तारीख 6 जून तय कर दी है। सुनवाई के दौरान निलंबित जेल अधीक्षक कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे।

​2023 का वो 'छापेमारी कांड', जिसने हिला दी थी जेल प्रशासन की जड़ें

​मामला फरवरी 2023 का है, जब चित्रकूट जेल में बंद विधायक अब्बास अंसारी से उनकी पत्नी की 'सीक्रेट और वीआईपी' मुलाकातों की भनक प्रशासन को लगी थी। 10 फरवरी 2023 को तत्कालीन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने बिना किसी भनक के अचानक जेल में धावा बोल दिया। जब साहबान अंदर पहुंचे, तो नजारा चौंकाने वाला था—निकहत बानो किसी मुलाकात कक्ष में नहीं, बल्कि सीधे जेल अधीक्षक के सरकारी दफ्तर में आराम से बैठी पाई गईं।

​जांच आगे बढ़ी तो परतें खुलती चली गईं। पता चला कि यह कोई एक दिन की बात नहीं थी, बल्कि जेल के आला अफसरों की मेहरबानी और मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर निकहत घंटों जेल परिसर में समय बिताती थीं। इस खुलासे ने यूपी के जेल महकमे और सुरक्षा व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी थीं।

​साठगांठ का खुला खेल: नकदी, उपहार और 8 नामजद

​इस सनसनीखेज मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने मामले की कमान एसआईटी (SIT) को सौंपी थी। कर्वी कोतवाली में विधायक अब्बास अंसारी, निकहत, उनके ड्राइवर ललक नियाज, निलंबित जेल अधीक्षक संतोष कुमार सागर, जेलर संतोष कुमार, डिप्टी जेलर चंद्रकला, कैंटीन संचालक नवनीत सचान और सपा जिलाध्यक्ष फराज खान समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।

​एसआईटी की चार्जशीट में साफ कहा गया कि अब्बास अंसारी को जेल के भीतर 'शाही सुविधाएं' दी जा रही थीं और इस अवैध धंधे को सुचारू रूप से चलाने के लिए जेल के अधिकारियों को मोटी नकदी और महंगे उपहारों का नजराना पेश किया जाता था।

​बेबाक नजरिया: लखनऊ से बांदा ट्रांसफर, अब फैसले का इंतजार

​फिलहाल, इस मामले के सभी आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आ चुके हैं, लेकिन जेल महकमे के दागदार अफसर संतोष कुमार सागर और जेलर संतोष कुमार अब भी निलंबन की मार झेल रहे हैं। पहले इस पूरे भ्रष्टाचार के खेल की सुनवाई लखनऊ की अदालत में चल रही थी, लेकिन अब्बास अंसारी से जुड़े मामलों को बांदा की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में ट्रांसफर किए जाने के बाद अब कानूनी शिकंजा यहीं कसा जा रहा है।

​अब सबकी नजरें 6 जून पर टिकी हैं, जब अदालत इस डिस्चार्ज अर्जी पर आगे की सुनवाई करेगी। देखना दिलचस्प होगा कि कानून का डंडा इन रसूखदारों और बिके हुए नुमाइंदों पर कितना भारी पड़ता है!



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