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मतगणना से पहले सुप्रीम कोर्ट पहुँची ममता की TMC: केंद्रीय पर्यवेक्षकों की तैनाती पर हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती; शुभेंदु बोले— "मुख्यमंत्री की ड्रामेबाजी से नहीं बदलेगा जनादेश"

by on | 2026-05-01 21:22:53

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मतगणना से पहले सुप्रीम कोर्ट पहुँची ममता की TMC: केंद्रीय पर्यवेक्षकों की तैनाती पर हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती; शुभेंदु बोले— "मुख्यमंत्री की ड्रामेबाजी से नहीं बदलेगा जनादेश"

नई दिल्ली/कोलकाता | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर है। कलकत्ता हाई कोर्ट से झटका लगने के बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है। पार्टी को डर है कि मतगणना प्रक्रिया में केवल केंद्रीय कर्मियों की तैनाती से पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।

क्या है पूरा कानूनी विवाद?

TMC की आपत्ति: चुनाव आयोग ने मतगणना के लिए केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पीएसयू (PSU) के कर्मियों को पर्यवेक्षक (Observers) नियुक्त करने का फैसला किया है। टीएमसी इसे निष्पक्षता के खिलाफ बता रही है।

हाई कोर्ट का रुख: कलकत्ता हाई कोर्ट ने 30 अप्रैल को टीएमसी की याचिका खारिज करते हुए चुनाव आयोग के फैसले को सही ठहराया था।

सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद: टीएमसी चाहती है कि मतगणना में राज्य सरकार के अधिकारियों को भी शामिल किया जाए ताकि संतुलन बना रहे।

"सियासी चौसर" और जुबानी जंग

शुभेंदु अधिकारी का तंज: भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी के इस कदम को हार का डर बताया है। उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल के नतीजों से ममता बनर्जी घबरा गई हैं और अब "कानूनी ड्रामेबाजी" का सहारा ले रही हैं, लेकिन इससे जनता का जनादेश नहीं बदलेगा।

अभिषेक सिंघवी बनाम हिमंत: कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी द्वारा टीएमसी का पक्ष लेने पर असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखा प्रहार किया है। उन्होंने इसे "भ्रष्ट कूटनीति का गठबंधन" करार दिया।

क्या पर्यवेक्षक बदल सकते हैं गेम?

मतगणना केंद्र पर पर्यवेक्षकों की भूमिका निर्णायक होती है। टीएमसी का सुप्रीम कोर्ट जाना यह संकेत देता है कि उन्हें चुनावी मशीनरी पर अब भरोसा नहीं रहा है। वहीं भाजपा इसे अपनी जीत की आहट मान रही है। 4 मई के नतीजों से पहले यह कानूनी लड़ाई मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश मात्र है।



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