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सिस्टम की सुस्ती के खिलाफ वकीलों का 'हल्ला बोल', परिजनों ने रो-रोकर मांगा न्याय, पूछा- '5 दिन बाद भी हत्यारे बाहर क्यों?'

by on | 2026-05-01 19:30:58

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सिस्टम की सुस्ती के खिलाफ वकीलों का 'हल्ला बोल', परिजनों ने रो-रोकर मांगा न्याय, पूछा- '5 दिन बाद भी हत्यारे बाहर क्यों?'

वाराणसी। फूलपुर के व्यापारी मनीष सिंह की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या मामले में अब इंसाफ की आग सड़कों पर आ गई है। वाराणसी की सेंट्रल बार एसोसिएशन ने पुलिसिया सुस्ती के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आज बसनी-कुआर मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। वकीलों के तेवर देख सिस्टम के पसीने छूट गए।

खबर के बड़े 'बेबाक' पॉइंट्स:

सड़क पर इंसाफ: दोपहर 2:10 बजे सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश सिंह गौतम और महामंत्री आशीष सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने चक्काजाम कर दिया।


पुलिस की 'कछुआ चाल': परिजनों का सीधा आरोप है कि 5 दिन बीत गए, लेकिन पुलिस सिर्फ 'आश्वासन' की मीठी गोली दे रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी की जगह पुलिस फाइलें पलट रही है।


फांसी और बुलडोजर की मांग: प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि हमें सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि दोषियों पर 'योगी वाला न्याय' (बुलडोजर कार्रवाई) और फांसी की सजा चाहिए।


प्रशासन का सरेंडर: भारी दबाव के बीच एसीपी पिंडरा को मौके पर आना पड़ा। पुलिस कमिश्नर की ओर से संदेश दिया गया कि 48 घंटे के भीतर सभी हत्यारे जेल की सलाखों के पीछे होंगे।


बेबाक टिप्पणी:

​जब रक्षक ही सुस्त हो जाएं, तो न्याय के पहरुओं को सड़क पर उतरना ही पड़ता है। मनीष सिंह की हत्या के 5 दिन बाद भी अगर पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है, तो यह कमिश्नरेट पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा धब्बा है। क्या 48 घंटे में पुलिस अपना इकबाल बुलंद कर पाएगी या फिर वकीलों का यह आक्रोश और बड़ा रूप लेगा?

बड़ा अपडेट: पुलिस कमिश्नर ने आज शाम  पीड़ित परिवार को मिलने के लिए बुलाया है। आश्वासन के बाद जाम तो खुल गया है, लेकिन न्याय की उम्मीद की घड़ी टिक-टिक कर चल रही है।




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