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काशी में 'मौत' की अवैध दीवार: VDA की सील तोड़कर चल रहा था खूनी खेल, आंधी ने खोल दी भ्रष्टाचार की पोल!

by on | 2026-04-30 12:05:07

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काशी में 'मौत' की अवैध दीवार: VDA की सील तोड़कर चल रहा था खूनी खेल, आंधी ने खोल दी भ्रष्टाचार की पोल!


वाराणसी | 'बेबाक 24' ब्यूरो रिपोर्ट: काशी में विकास के दावों के बीच 'अवैध निर्माण' का कालिख पुता चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है। हुकुलगंज तिराहे के पास बुधवार को आई तेज आंधी ने सिर्फ धूल नहीं उड़ाई, बल्कि प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे उस खूनी खेल को भी उजागर कर दिया, जिसने 5 मजदूरों को जिंदा दफन करने की साजिश रची थी।

हादसे की इनसाइड स्टोरी: ताश के पत्तों सी ढही दीवार

​तिवारी मिष्ठान के पीछे चल रहे एक निर्माणाधीन 'पाप के ढांचे' में उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब तेज हवा के झोंके के साथ दीवार भरभरा कर गिर गई।

मलबे में दबे मजदूर: सूरज, दिनेश, अमन और करण समेत 5 मजदूर इसकी चपेट में आ गए।


ग्राउंड जीरो का हाल: स्थानीय लोगों ने दिलेरी दिखाते हुए मलबे से घायलों को निकाला, जिसके बाद NDRF और फायर ब्रिगेड की टीम ने मोर्चा संभाला।


मेडिकल अपडेट: अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग जारी है। एक मजदूर की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।


VDA का 'कागजी' तमाचा: सील लगी थी, फिर भी सेटिंग चालू थी!

​अब सुनिए इस हादसे की सबसे शर्मनाक हकीकत। जिस बिल्डिंग की दीवार गिरी, उसे वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) कागजों पर दो बार सील कर चुका था!

पहली सीलिंग (1 मई 2025): नियमों को ताक पर रखकर (स्टिल्ट + 3 तल से ज्यादा) निर्माण करने पर धारा 27 के तहत एक्शन हुआ।


दूसरी सीलिंग (12 मार्च 2026): सील तोड़कर चोरी-छिपे काम करने पर धारा 28(क) के तहत दोबारा कार्रवाई हुई।


'बेबाक 24' का तीखा सवाल: जब भवन सील था, तो वहां ईंट-गारा कौन पहुंचा रहा था? क्या विभाग की आंखों पर 'सुविधा शुल्क' की मोटी पट्टी बंधी थी या फिर प्रशासन की सील इतनी कमजोर है कि कोई भी उसे ठेंगे पर रख दे?

बड़ा सवाल: आखिर जिम्मेदार कौन?

​VDA अब रामेश्वर तिवारी पर FIR दर्ज कराने की औपचारिकता कर रहा है। लेकिन 'बेबाक 24' पूछता है:

​इलाके के जोनल अधिकारी और सुपरवाइजर उस वक्त कहां थे जब सील तोड़कर निर्माण हो रहा था?


​क्या यह सीधे तौर पर प्रशासनिक मिलीभगत नहीं है?


​उन गरीब मजदूरों के खून का हिसाब कौन देगा, जिन्हें चंद रुपयों के लालच में मौत के मुहाने पर खड़ा कर दिया गया?


बेबाक टिप्पणी

​काशी में आई इस आंधी ने सिर्फ दीवार नहीं गिराई, बल्कि उस खोखले और भ्रष्ट सिस्टम की दीवार को भी ध्वस्त कर दिया है जो अवैध निर्माण को अपनी सरपरस्ती में पालती है। FIR तो महज एक कागजी खानापूर्ति है; असली न्याय तब होगा जब उन सफेदपोश अधिकारियों पर गाज गिरेगी जिनकी छत्रछाया में ये मौत के ठिकाने बन रहे हैं। अगर निष्पक्ष जांच हो जाए, तो काशी के लाखों भवनों के अवैध फ्लोर भ्रष्टाचार की एक ऐसी दास्तान सुनाएंगे जिससे पूरा महकमा दफन हो जाएगा।

​बने रहिए 'बेबाक 24' के साथ—जो कहेगा वही, जो सच है!



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