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​"अरे ओ बंगाल पुलिस, जरा वापस जाओ!": जमालपुर रैली में पुलिसकर्मियों पर भड़के अमित शाह; मंच से दी 'गुंडों' को आखिरी चेतावनी

by on | 2026-04-25 21:52:20

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​"अरे ओ बंगाल पुलिस, जरा वापस जाओ!": जमालपुर रैली में पुलिसकर्मियों पर भड़के अमित शाह; मंच से दी 'गुंडों' को आखिरी चेतावनी

जमालपुर | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले पूर्व वर्धमान का जमालपुर एक बड़े सियासी ड्रामे का गवाह बना। जनसभा को संबोधित कर रहे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उस समय बेहद आक्रामक हो गए, जब मंच के पास तैनात राज्य पुलिस की हरकतों से उनके भाषण में खलल पड़ा।

मंच से 'लाइव' फटकार: वीडियो वायरल

क्या हुआ? अमित शाह जब भाजपा के पक्ष में माहौल बना रहे थे, तभी उन्होंने पुलिसकर्मियों को भीड़ और मंच के बीच कुछ ऐसी गतिविधि करते देखा जिससे जनता का संपर्क टूट रहा था।

कड़े तेवर: शाह ने तुरंत अपना भाषण रोका और माइक पर ही दहाड़ते हुए कहा— "अरे ओ भाई...ए पुलिस! इसको वापस खींचो भाई...अरे तुम ओ बंगाल पुलिस जरा वापस जाओ!" * जनता का शोर: शाह के इस तेवर को देखकर रैली में मौजूद भीड़ ने जबरदस्त नारेबाजी शुरू कर दी। इस घटना का वीडियो अब इंटरनेट पर 'ट्रेंड' कर रहा है।

 "गुंडे 29 अप्रैल को घर से बाहर न निकलें"

अमित शाह ने टीएमसी समर्थित तत्वों को सख्त लहजे में चेतावनी दी:

हिंसा पर वार: शाह ने कहा कि टीएमसी के गुंडे हर बार मतदान में बाधा डालते हैं। उन्होंने आगाह किया— "अभी मैं सिर्फ चेतावनी दे रहा हूँ। अगर हरकतें नहीं सुधारीं, तो 5 मई (नतीजों के बाद) आपकी जगह जेल में होगी।"

ममता पर तंज: शाह ने कहा कि जब वह चेतावनी देते हैं, तो दीदी नाराज हो जाती हैं, लेकिन बंगाल की शांति के लिए यह जरूरी है।

 महिला सुरक्षा: महिला CM होने के बावजूद बंगाल पीछे

शाह ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर ममता बनर्जी को घेरते हुए कहा:

20 राज्यों का हवाला: "भाजपा शासित 20 राज्यों में से किसी भी मुख्यमंत्री ने महिलाओं को 7 बजे के बाद बाहर न निकलने की सलाह नहीं दी। ममता बनर्जी को शर्म आनी चाहिए कि वह एक महिला मुख्यमंत्री होकर भी सुरक्षा देने में नाकाम रहीं।"

सिंडिकेट का अंत: उन्होंने वादा किया कि नई सरकार बनते ही टीएमसी नेताओं के 'भ्रष्टाचार के सिंडिकेट' के खिलाफ सबसे पहले कार्रवाई की जाएगी।

शाह का गुस्सा या चुनावी रणनीति?

मंच से पुलिस को सार्वजनिक रूप से टोकना यह स्पष्ट संदेश देता है कि भाजपा राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर भरोसा नहीं कर रही है। जमालपुर की यह घटना भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश भरने और राज्य सरकार को 'दबाव' में लाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है।



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