by admin@bebak24.com on | 2026-07-16 18:51:57
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वाशिंगटन/तेहरान (बेबाक24): पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने बुधवार (15 जुलाई 2026) की शाम ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों पर नए और भीषण हवाई हमले किए हैं। इस सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि वह "बेहतर व्यवहार करे", वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस ऑपरेशन के खत्म होने की पुष्टि की है।
अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर हमले की तस्वीरें और विवरण साझा करते हुए बताया:
निशाने पर क्या था? अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के सैन्य कमांड सेंटर्स, हवाई सुरक्षा ठिकानों (Air Defence Bases), मिसाइल और ड्रोन लॉन्च पैड्स के साथ-साथ तटीय निगरानी केंद्रों (Coastal Surveillance Centers) को निशाना बनाया।
हमले का मकसद: पेंटागन के मुताबिक, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को पूरी तरह पंगु बनाना है, जिसके जरिए वह होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और उनके चालक दल को लगातार खतरा पहुंचा रहा था।
इस सैन्य हमले के बाद वाशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने इरादे साफ कर दिए:
डेडलाइन पर रुख: जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे ईरान को कोई समयसीमा (Deadline) दे रहे हैं, तो उन्होंने कहा, "मुझे समयसीमा देना पसंद नहीं है, लेकिन उन्हें सब पता है... उन्हें अब बेहतर व्यवहार करना चाहिए।"
पुल और बिजलीघर निशाने पर: इससे पहले मंगलवार देर रात ट्रंप ने खुले तौर पर धमकी दी थी कि अगर ईरान अगले हफ्ते होने वाली शांति वार्ता में वापस नहीं लौटता है, तो अमेरिकी सेना ईरान के प्रमुख पुलों, इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजलीघरों (Power Plants) को निशाना बनाएगी।
समझौते की शर्त: ट्रंप ने आत्मविश्वास से लबरेज अंदाज में कहा, "ईरान अब समझौता करना चाहता है, लेकिन उन्हें हमारा तरीका पसंद नहीं आ रहा। अब यह हम तय करेंगे कि उनके साथ कोई डील करनी है या नहीं।"
अमेरिका की इस कार्रवाई से पहले ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिकी हितों को चोट पहुंचाने का दावा किया है:
ईरान का दावा: ईरानी प्रशासन ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनमें बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी बेस शामिल हैं।
समझौते से हटने के संकेत: ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद बगर गालिबाफ ने सरकारी मीडिया से बेहद तल्ख लहजे में कहा, "अगर मौजूदा वैश्विक समझौतों से ईरान को कोई आर्थिक या कूटनीतिक फायदा नहीं हो रहा है, तो हमारे पास भी उसे मानते रहने का अब कोई कारण नहीं बचा है।"
| मुख्य पहलू | वर्तमान स्थिति (16 जुलाई 2026 तक) |
| अमेरिकी सैन्य कार्रवाई | सेंटकॉम द्वारा ईरान के कमांड सेंटर और एयर डिफेंस सिस्टम पर सफल मिसाइल हमले। |
| डोनाल्ड ट्रंप का अल्टीमेटम | वार्ता में न आने पर ईरान के बुनियादी ढांचे (बिजलीघर और पुल) को नष्ट करने की धमकी। |
| ईरान का रुख | बहरीन-कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा; अंतरराष्ट्रीय संधियों को ठुकराने की चेतावनी। |
| वैश्विक प्रभाव | होर्मुज स्ट्रेट में तनाव से वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा। |
डोनाल्ड ट्रंप का 'अमेरिका फर्स्ट' और आक्रामक विदेश नीति का रवैया एक बार फिर मिडिल ईस्ट को बारूद के ढेर पर ले आया है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का वह सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जहां से वैश्विक तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में आग लगा सकता है, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
बेबाक24 का मानना है कि ट्रंप द्वारा ईरान के बिजलीघरों और पुलों को निशाना बनाने की धमकी यह साफ करती है कि अमेरिका अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह घुटनों पर लाने की रणनीति अपना रहा है। दूसरी ओर, ईरान के संसद स्पीकर गालिबाफ का बयान यह दर्शाता है कि आर्थिक प्रतिबंधों से घिरा ईरान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। अगर अगले हफ्ते दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर नहीं आते हैं, तो यह कूटनीतिक विफलता एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत बन सकती है।
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