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वृंदावन: बांकेबिहारी मंदिर में टूटी वर्षों पुरानी परंपरा; 'फूल बंगला' सेवा से पीछे हट रहे भक्त, जानें क्यों सूना पड़ा है ठाकुरजी का आंगन

by on | 2026-04-09 22:19:19

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वृंदावन: बांकेबिहारी मंदिर में टूटी वर्षों पुरानी परंपरा; 'फूल बंगला' सेवा से पीछे हट रहे भक्त, जानें क्यों सूना पड़ा है ठाकुरजी का आंगन

मथुरा/वृंदावन | ब्रज की सुप्रसिद्ध 'फूल बंगला' परंपरा, जो सदियों से ठाकुर श्रीबांकेबिहारी जी को भीषण गर्मी में शीतलता प्रदान करने के लिए निभाई जाती रही है, इस बार संकट में है। मंदिर के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब गर्मी के मौसम में नियमित रूप से सजने वाले फूल बंगले कई दिनों तक गायब रहे। बुधवार सुबह एक बार फिर मंदिर का चौक सूना रहा, जिससे दूर-दराज से आए भक्तों में भारी निराशा देखी गई।

​1. क्यों टूटा परंपराओं का सिलसिला?

​मंदिर के सेवायतों और भक्तों के अनुसार, इस गतिरोध के पीछे 'हाईपावर्ड प्रबंध कमेटी' के नए और कड़े नियम हैं:

​शुल्क में भारी वृद्धि: फूल बंगला सजाने का शुल्क अब 10 गुना बढ़ाकर ₹1.5 लाख कर दिया गया है।

​पूजन पर रोक: लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद श्रद्धालुओं को अब बंगला पूजन (जिस स्थान पर बंगला सजता है) की अनुमति नहीं दी जा रही है।

​भक्तों का मोहभंग: पहले इस सेवा के लिए साल भर पहले बुकिंग होती थी, लेकिन अब इन प्रतिबंधों के कारण श्रद्धालु पीछे हट रहे हैं।

​2. सेवायतों का आक्रोश: "जजिया कर जैसा है शुल्क"

​मंदिर के सेवायत गोस्वामी समाज ने कमेटी के निर्णयों पर सवाल उठाए हैं:

​रजत गोस्वामी ने कहा कि जब श्रद्धालु लाखों रुपये खर्च कर सेवा करता है, तो वह पूजन का अधिकार भी चाहता है। बिना पूजन के सिर्फ बंगला सजाने के लिए भक्त तैयार नहीं हैं।

​हिमांशु गोस्वामी ने इस बढ़े हुए शुल्क की तुलना 'जजिया कर' से करते हुए पूछा कि कमेटी इस पैसे का इस्तेमाल किस सेवा में कर रही है?

​अस्थायी व्यवस्था: परंपरा को जीवित रखने के लिए सेवायतों ने ठाकुरजी को फूलों की 'बैठक' में विराजमान किया, लेकिन भव्य बंगले की रंगत इस बार गायब है।



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