ब्रेकिंग न्यूज़
पीएम मोदी ने छात्रों के लिए रोका अपना काफिला: नीट परीक्षा के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर 45 मिनट रुके
शहर और राज्य राज्य

काशी में 'कागजी घोड़ों' पर चाबुक: क्या वाकई बुझेगी प्यास या फिर होगा वही पुराना खेल?

by on | 2026-03-12 21:03:34

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3515


काशी में 'कागजी घोड़ों' पर चाबुक: क्या वाकई बुझेगी प्यास या फिर होगा वही पुराना खेल?



वाराणसी। कहने को तो यह देश के प्रधान सेवक का संसदीय क्षेत्र है, लेकिन हकीकत यह है कि यहाँ की गलियां आज भी विकास के नाम पर कराह रही हैं। बाहर-बाहर सब 'चकाचक' दिखाकर 'VVIP' चमक बिखेरी जाती है, लेकिन गलियों के अंदर घुसते ही गड्ढे और सीवर की सड़ांध जनता का स्वागत करती है। अब इसी सुस्त 'सिस्टम' को सुधारने के लिए नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जलकल विभाग के अधिकारियों की जमकर क्लास ली है।

ऊपर ठाठ-बाट, नीचे रमरेखा घाट,

मेयर का 'भौकाल' बनाम जमीनी हकीकत

बनारस में इन दिनों एक ही चर्चा आम है—'ऊपर से ठाठ-बाट और नीचे रमरेखा घाट'। शहर के मेयर साहब सोशल मीडिया और कैमरों के सामने अपना 'भौकाल' टाइट करने में मस्त हैं, लेकिन धरातल पर जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। हर साल लाखों पेड़ लगाने का दावा करने वाले विभाग द्वारा 'गिनीज बुक' में डंका तो बजवा दिया जाता है, लेकिन हकीकत में पेड़ 'बैगन-टमाटर' की तरह रोप दिए जाते हैं। कोमल पौधों को शाक-भाजी की तरह रोपकर रिकॉर्ड का बवंडर तो खड़ा कर दिया गया, लेकिन वृक्ष बनकर फल और छाया देने वाली उन कोंपलों के साथ हुए इस 'वैभिचार' को प्रकृति कभी माफ नहीं करेगी। नतीजा—कागज पर हरियाली और जमीन खाली ।

इंजीनियरों की 'लिखित' अग्निपरीक्षा, अब नहीं चलेगा बहाना

नगर आयुक्त ने जलकल विभाग के महाप्रबंधक अनूप सिंह को दो टूक कह दिया है कि शहर के 57 वार्डों की जर्जर पाइपलाइनें अब इतिहास बननी चाहिए।

 * AE और JE को लिखित वारंटी: अब साहबों को लिखित सर्टिफिकेट देना होगा कि उनके इलाके में अब एक इंच भी पुरानी पाइपलाइन नहीं बची है।

 * फटी पाइप तो गिरेगी गाज:

अगर लिखित गारंटी देने के बाद पाइप फटी, तो गाज सीधे साहबों की कुर्सी पर गिरेगी।

 * 72 घंटे का अल्टीमेटम: IGRS और 311 नंबर की शिकायतों को फाइलों में दबाने का दौर खत्म। अब 3 दिन के अंदर समाधान अनिवार्य है।

भ्रष्टाचार पर 'जियोटैगिंग' का पहरा

अब तक सीवर चैंबर की मरम्मत सिर्फ सरकारी कागजों पर 'चकाचक' होती थी, लेकिन अब खेल खत्म! नगर आयुक्त ने आदेश दिया है कि हर काम की जियोटैगिंग (Photo + Location) अनिवार्य होगी। यानी अब अधिकारी ये नहीं कह पाएंगे कि "काम हो गया", उन्हें ऑनलाइन सबूत दिखाना होगा कि पैसा वाकई जमीन पर लगा है या साहबों की जेब में।

बेबाक नजरिया

मंत्री और विधायकों की फौज तो अपनी 'मौज' काट रही है, लेकिन आम जनता आज भी उन्हीं पुराने गड्ढों में उलट रही है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि जब पत्रकार इन कड़वे सवालों को उठाते हैं, तो उन पर दबाव बनाने और मुकदमा दर्ज कराने की कोशिशें होती हैं।

सवाल यह है कि क्या नगर आयुक्त की यह सख्ती जलकल के उन 'सुस्त' अजगरों को जगा पाएगी जो सालों से जनता की गाढ़ी कमाई को 'पैचवर्क' के नाम पर डकार रहे हैं? या फिर इस बार भी गर्मी में काशी की जनता को केवल 'आश्वासनों का ठंडा पानी' पिलाकर टरका दिया जाएगा?




Search
Recent News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment