by on | 2026-02-20 23:55:57
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लखनऊ/गाजीपुर | उत्तर प्रदेश की राजनीति के 'चाणक्य' कहे जाने वाले और गाजीपुर की जमानिया सीट से विधायक, पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने सदन में वो तेवर दिखाए कि सत्ता पक्ष निरुत्तर हो गया। शिक्षामित्रों के हक में उठी इस आवाज ने सरकार को मजबूर कर दिया और नतीजा सबके सामने है— बरसों से 10 हजार की 'दिहाड़ी' पर गुजारा कर रहे शिक्षामित्रों का मानदेय अब 18,000 रुपये कर दिया गया है।
विधानसभा सत्र के दौरान ओमप्रकाश सिंह ने शिक्षामित्रों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए सरकार की जमकर क्लास लगाई। उन्होंने तीखे लहजे में कहा— "परिवार चलाना क्या होता है, ये वही जानता है जो अपना घर चलाता है। जिसका कोई है ही नहीं, वो दूसरों का दुख-दर्द क्या जाने?" उन्होंने सीधे तौर पर सरकार के सिस्टम पर चोट करते हुए कहा कि एक ही स्कूल में एक शिक्षक 60 हजार से 1 लाख रुपये वेतन ले रहा है, वहीं उसी काम को करने वाला शिक्षामित्र महज 10 हजार में घिस रहा है। यह अक्षम्य अन्याय है!
ओमप्रकाश सिंह ने सदन को आईना दिखाया कि परिषदीय विद्यालयों में गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं और उन्हें पढ़ाने वाले गुरु खुद गरीबी की आग में जल रहे हैं। इतनी 'लताड़' के बाद सरकार की नींद खुली तो सही, लेकिन महज 8000 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई। खबर बेबाक 24 का मानना है कि आज के दौर में 18 हजार रुपये भी एक 'दिहाड़ी मजदूर' के बराबर ही है। जिस राज्य में गुरु को अपने जीवन-यापन के लिए संघर्ष करना पड़े, वहाँ शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा?
विपक्ष के भारी दबाव और ओमप्रकाश सिंह के तर्कों के सामने झुकते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में घोषणा कर दी है। 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये मानदेय दिया जाएगा।
बता दें कि ये वही शिक्षामित्र हैं जिन्होंने सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ी है। सरकारों का कर्तव्य था कि इनकी सुध बहुत पहले ली जाती, लेकिन 'देर आए दुरुस्त आए'। हालांकि, शिक्षामित्रों का एक धड़ा अभी भी इसे 'ऊँट के मुँह में जीरा' बता रहा है और पूर्ण समायोजन की मांग पर अड़ा है।
क्या 18,000 रुपये में आज के महंगाई के दौर में एक शिक्षक का सम्मानजनक जीवन संभव है? क्या सरकार ने केवल सदन की 'लताड़' से बचने के लिए यह झुनझुना थमाया है, या वाकई गुरुओं के प्रति संवेदना जगी है?
जमानिया विधायक ओमप्रकाश सिंह के इस कदम ने न केवल गाजीपुर बल्कि पूरे प्रदेश के शिक्षामित्रों के बीच उन्हें 'मसीहा' के तौर पर खड़ा कर दिया है।
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