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स्कूलों में 'क्लास' लेने पहुंचे जिलाधिकारी, लापरवाहों को दी सख्त चेतावनी!

by on | 2026-02-14 22:33:41

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स्कूलों में 'क्लास' लेने पहुंचे जिलाधिकारी, लापरवाहों को दी सख्त चेतावनी!


सोनभद्र। जिले की शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने और स्कूलों में पसरी सुस्ती को दूर करने के लिए जिलाधिकारी ने मोर्चा संभाल लिया है। 'द बेबाक 24' की रिपोर्ट के अनुसार, जिलाधिकारी ने शनिवार को प्राथमिक विद्यालय सहजन खुर्द, उच्च प्राथमिक विद्यालय सहिजन कला और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का औचक निरीक्षण कर हड़कंप मचा दिया।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी का तेवर कड़ा नजर आया। उन्होंने न केवल फाइलों को खंगाला, बल्कि सीधे क्लासरूम में पहुंचकर बच्चों के बीच बैठ गए। डीएम ने बच्चों से सवाल-जवाब किए और उनकी शैक्षणिक प्रगति को परखा।

निरीक्षण के मुख्य बिंदु:

 * ग्राउंड जीरो पर जांच: स्कूलों में पठन-पाठन की स्थिति, छात्र उपस्थिति और मिड-डे मील की गुणवत्ता का बारीकी से जायजा लिया गया।

 * बुनियादी सुविधाओं पर फोकस: शौचालय, शुद्ध पेयजल और परिसर की साफ-सफाई को लेकर जिलाधिकारी ने असंतोष जाहिर करते हुए नियमित निगरानी के निर्देश दिए।

 * दो टूक चेतावनी: जिलाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया कि शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। पठन-पाठन में शिथिलता बरतने वाले शिक्षकों पर गाज गिरना तय है।

> "विद्यार्थियों की बुनियादी दक्षता (Basic Skills) ही उनके भविष्य की नींव है। इसमें किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। शिक्षक नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करें।" — जिलाधिकारी, सोनभद्र

कस्तूरबा विद्यालय में भी जांच की आंच

जिलाधिकारी ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का भी रुख किया। यहाँ उन्होंने छात्राओं को मिलने वाली आवासीय सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्राओं को मिलने वाली सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कटौती न हो।

निरीक्षण के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुकुल आनंद पांडेय सहित अन्य विभाग के अधिकारी पसीने छूटते नजर आए। जिलाधिकारी के इस तेवर से साफ है कि अब सोनभद्र के स्कूलों में 'सब चंगा है' वाला ढर्रा नहीं चलेगा।

खबर का विश्लेषण: जिलाधिकारी के इस औचक कदम से उन शिक्षकों और विभाग के कर्मचारियों में हड़कंप है जो अब तक कागजी खानापूर्ति में व्यस्त थे। अब देखना यह होगा कि इस 'ग्राउंड रिपोर्ट' के बाद जमीनी स्तर पर कितना सुधार होता है।




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