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राख के गुबार में ऊर्जान्चल: एनजीटी के नियमों की उड़ रही धज्जियां, लोग बीमार

by admin@bebak24.com on | 2025-12-21 19:37:06

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राख के गुबार में ऊर्जान्चल: एनजीटी के नियमों की उड़ रही धज्जियां, लोग बीमार


​● बेखौफ दौड़ रहे खुले ट्रक और टेलर, हवा और पानी में घुला राख का जहर
​● बदहाल सड़कों पर बढ़ी फिसलन, सांस लेना भी हुआ दूभर
​अजय सिंह | सोनभद्र/ विद्युत हब के रूप में विख्यात ऊर्जान्चल इन दिनों विकास की नहीं, बल्कि प्रदूषण की काली राख ओढ़े हुए है। शक्तिनगर और अनपरा क्षेत्र में ताप विद्युत परियोजनाओं से निकलने वाली राख (ऐश) का खुलेआम परिवहन स्थानीय लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया है। बिना तिरपाल और बिना पानी छिड़काव के सड़कों पर फर्राटा भरते ट्रक-टेलर न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
​घरों और दुकानों पर जमी राख की परत
​सड़कों पर उड़ती राख ने पूरे इलाके को धुंध के गुबार में तब्दील कर दिया है। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि सुबह से शाम तक सड़कों पर जमने वाली राख अब घरों के भीतर रसोई तक पहुंच गई है। ग्रामीणों के अनुसार, घरों में रखा खाना और पीने का पानी तक दूषित हो रहा है। शक्तिनगर से औड़ी तक की सड़कें बदहाल हो चुकी हैं और राख की मोटी परत जमने के कारण दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसलकर चोटिल हो रहे हैं।
​स्वास्थ्य संकट: दमा और एलर्जी के बढ़े मरीज
​क्षेत्र में जहरीली हवा का असर अब अस्पतालों में भी दिखने लगा है। हवा में तैरते राख के सूक्ष्म कणों के कारण बच्चों और बुजुर्गों में दमा, खांसी, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी एलर्जी की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मानकों के विपरीत हो रहे इस परिवहन को रोकने वाला कोई नहीं है।
​कागजों पर 'सब चंगा', जमीन पर अंधेरा
​विभागीय अधिकारी और परियोजना प्रबंधन उच्चाधिकारियों और एनजीटी को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में सब कुछ मानक के अनुरूप बताकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है। नियमों के मुताबिक राख का परिवहन बंद कंटेनर में होना चाहिए, लेकिन यहां सरेआम खुले वाहनों का प्रयोग जारी है।
​"जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण ऊर्जान्चल के लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। यदि प्रशासन ने जल्द ही मानकों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो स्थिति और भी विकराल हो सकती है।" — स्थानीय नागरिक



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