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एसआईआर वोट चोरी नहीं, मतदाता सूची का शुद्धिकरण है: संबित पात्रा

by on | 2026-11-03 11:34:31

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एसआईआर वोट चोरी नहीं, मतदाता सूची का शुद्धिकरण है: संबित पात्रा

वाराणसी | बेबाक24 न्यूज़

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने एसआईआर को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों के आरोपों पर पलटवार करते हुए इसे मतदाता सूची को शुद्ध करने की संवैधानिक प्रक्रिया बताया। सोमवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। पात्रा ने कहा कि मतदाता सूची में अपात्र नाम हटाना और पात्र नागरिकों के नाम सुनिश्चित करना लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।

एसआईआर पर कांग्रेस के आरोपों को बताया राजनीतिक दुष्प्रचार

संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर चुनावी हार के लिए कभी ईवीएम तो कभी चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एसआईआर को 13 करोड़ वोटों की चोरी बताकर देश में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है, जबकि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना है।

उन्होंने प्रियंका गांधी को भी निशाने पर लेते हुए गांधी परिवार के राजनीतिक नेतृत्व और आपसी तालमेल पर सवाल उठाए। पात्रा ने कहा कि कांग्रेस को लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले अपने नेतृत्व और राजनीतिक दिशा पर विचार करना चाहिए।

अब तक 12 बार हो चुका है विशेष पुनरीक्षण

एसआईआर को भाजपा सरकार की नई पहल बताने वाले आरोपों पर जवाब देते हुए पात्रा ने कहा कि देश में अब तक 12 बार विशेष गहन पुनरीक्षण हो चुका है। उनके मुताबिक, इनमें 10 बार कांग्रेस शासनकाल और 2 बार भाजपा शासनकाल में यह प्रक्रिया अपनाई गई।

उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने के चार आधार भी बताए। इनके अनुसार अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं के नाम की जांच की जाती है।

पात्रा ने दावा किया कि करीब 3 करोड़ लोग अनुपस्थित श्रेणी में चिह्नित हुए हैं, जबकि 6 करोड़ लोगों ने नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरा है। इसके अलावा करीब 6 करोड़ स्थानांतरित मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन अलग-अलग आंकड़ों को जोड़कर 13 करोड़ वोट चोरी का आरोप लगाना भ्रामक है।

ममता बनर्जी पर घुसपैठियों के मुद्दे को लेकर हमला

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए पात्रा ने कहा कि घुसपैठियों को किसी भी स्थिति में मतदाता सूची में शामिल नहीं होने दिया जा सकता। उनके अनुसार, मतदाता सूची में केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम होने चाहिए।

उन्होंने पश्चिम बंगाल की 20 विधानसभा सीटों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि जिन क्षेत्रों में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें से अधिकांश सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की। पात्रा ने इसे इस आरोप के विरुद्ध तर्क बताया कि मतदाताओं के नाम हटाकर भाजपा को चुनावी लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर भी दिया जवाब

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी की ओर से लगाए गए आरोपों पर पात्रा ने कहा कि भाजपा उनके पद संभालने से पहले ही 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव जीत चुकी थी। ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला था।

उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय वीएस संपत मुख्य चुनाव आयुक्त थे, जिन्हें कांग्रेस शासनकाल में नियुक्त किया गया था। इसके बावजूद भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बहुमत हासिल किया था।

पात्रा ने सवाल उठाया कि क्या उस समय कांग्रेस ने वीएस संपत की नियुक्ति भाजपा को चुनाव जिताने के लिए की थी? उन्होंने कहा कि राजनीतिक आरोपों के आधार पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

कई राज्यों में कांग्रेस की हार पर उठाए सवाल

कांग्रेस की चुनावी स्थिति पर टिप्पणी करते हुए पात्रा ने दावा किया कि पार्टी तमिलनाडु में 59 वर्ष, पश्चिम बंगाल में 49 वर्ष, उत्तर प्रदेश में 37 वर्ष, बिहार में 36 वर्ष, त्रिपुरा में 33 वर्ष और ओडिशा में 26 वर्ष से सत्ता से बाहर है।

उन्होंने सवाल किया कि इन राज्यों में कांग्रेस की चुनावी हार के लिए भी क्या एसआईआर को जिम्मेदार ठहराया जाएगा? पात्रा ने कहा कि पार्टी को अपनी राजनीतिक कमजोरियों का विश्लेषण करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट और नए मतदाताओं का दिया हवाला

एसआईआर से जुड़े मामले में चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे और अदालती कार्यवाही का उल्लेख करते हुए पात्रा ने कहा कि फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है। उनके अनुसार, केवल एक घोषणा पत्र जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से वर्ष 2002 से 2004 के बीच मतदाता सूची में नाम होने से जुड़ी जानकारी मांगी गई है।

उन्होंने दावा किया कि जून 2025 से अब तक 18 से 28 वर्ष की आयु के करीब 2.37 करोड़ युवाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं। पात्रा ने इसे इस आरोप का जवाब बताया कि एसआईआर के माध्यम से नए और युवा मतदाताओं को सूची से बाहर किया जा रहा है।

कांग्रेस और सपा के बूथ एजेंटों को दी चुनौती

पात्रा ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी से सवाल किया कि उनके बूथ लेवल एजेंट मतदाता सूची की जांच में सक्रिय भूमिका क्यों नहीं निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करने का अधिकार दिया है।

उनके मुताबिक, भाजपा के साथ कांग्रेस और सपा के प्रतिनिधि भी सूची की जांच कर सकते हैं। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम छूटा है या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम दर्ज है, तो इसकी जानकारी देकर सुधार कराया जाना चाहिए।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और कथित मतभेदों के मुद्दे पर भी पात्रा ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने पूर्व चुनाव अधिकारियों को मिले पद्म सम्मान और राज्यपाल एवं मंत्री जैसे पदों का हवाला देते हुए पूछा कि कांग्रेस के शासनकाल में इन नियुक्तियों को लेकर संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल क्यों नहीं उठाए गए।

राहुल गांधी पर 56 चुनाव हारने का तंज

पात्रा ने दावा किया कि वर्ष 2014 से 2025 के बीच कांग्रेस को 56 विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने राहुल गांधी पर इन पराजयों की जिम्मेदारी लेने के बजाय चुनाव आयोग को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाना हर राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन आरोप तथ्यों पर आधारित होने चाहिए। एसआईआर में कोई त्रुटि है तो उसे सामने लाकर सुधार कराया जा सकता है, मगर मतदाता सूची की शुद्धता को राजनीतिक विवाद का हथियार बनाना उचित नहीं है।

पत्रकार वार्ता में भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष अशोक चौरसिया, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, जिलाध्यक्ष रामसकल पटेल, क्षेत्र उपाध्यक्ष नवरतन राठी, मधुकर चित्रांश, संतोष सोलापुरकर, शैलेन्द्र मिश्रा, अमित राय, विपिन सिंह, प्रमील पांडेय और अभिषेक त्रिपाठी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

बेबाक24 टेक

मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है, लेकिन उसका पुनरीक्षण तभी भरोसेमंद माना जाएगा जब नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी हो तथा हर पात्र नागरिक को अपनी बात रखने का अवसर मिले। भाजपा के आरोपों का जवाब कांग्रेस को तथ्यों से देना चाहिए, लेकिन चुनाव आयोग की जिम्मेदारी भी कम नहीं है। सवाल सिर्फ यह नहीं कि एसआईआर का विरोध कौन कर रहा है, बल्कि यह भी है कि जिन मतदाताओं के नाम हट रहे हैं, उनकी शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान कैसे होगा? लोकतंत्र में न घुसपैठियों के नाम स्वीकार्य हैं और न ही किसी पात्र नागरिक का मताधिकार छिनना।



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