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गैर-जमानती वारंट के बाद आज़मगढ़ के एसएचओ ने कोर्ट में पेशी के लिए मांगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति

by on | 2026-11-03 11:27:53

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गैर-जमानती वारंट के बाद आज़मगढ़ के एसएचओ ने कोर्ट में पेशी के लिए मांगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति

​बलिया/आज़मगढ़ (उत्तर प्रदेश): आज़मगढ़ के जीयनपुर थाने के वर्तमान प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) संजय सिंह एक कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। उनके खिलाफ बलिया की अदालत द्वारा गैर-जमानती वारंट (N.B.W.) जारी किया गया है। दूसरी ओर, एसएचओ संजय सिंह ने अपनी सुरक्षा का हवाला देते हुए अदालत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी की गुहार लगाई है।

​क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला बलिया जिले के कोतवाली थाने से संबंधित है। जहाँ अधिवक्ता गणेशानन्द मिश्र की ओर से संजय सिंह के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 6544/2026 दर्ज कराया गया था। यह मुकदमा भारतीय दंड विधान (IPC) की धारा 352, 504, 506 और 500 के तहत दर्ज है।

​न्यायालय की सख्त कार्रवाई

इस मामले में बलिया के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए संजय सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके साथ ही, अदालत के आदेश पर एसएचओ संजय सिंह के वेतन आहरण पर भी रोक लगा दी गई है। अदालत ने उन्हें आगामी तिथि 29 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का कड़ा निर्देश दिया था।

​एसएचओ की सुरक्षा की गुहार

जवाब में, आज़मगढ़ के जीयनपुर थानाध्यक्ष संजय सिंह ने बलिया सीजेएम कोर्ट में एक आवेदन पत्र दाखिल किया है। अपने आवेदन में उन्होंने दलील दी है कि शिकायतकर्ता गणेशानन्द मिश्र पेशे से अधिवक्ता हैं। संजय सिंह ने आशंका जताई है कि यदि वह व्यक्तिगत रूप से बलिया कोर्ट में पेश होते हैं, तो गणेशानन्द मिश्र अन्य अधिवक्ताओं को उनके खिलाफ उकसा सकते हैं, जिससे कोर्ट परिसर में उनके साथ कोई भी 'अप्रिय घटना' घटित हो सकती है।

​अपनी जान और सुरक्षा का हवाला देते हुए, एसएचओ संजय सिंह ने अदालत से निवेदन किया है कि उन्हें 29 अक्टूबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होकर अपना पक्ष रखने की अनुमति दी जाए।

​भ्रम की स्थिति

एक दिलचस्प पहलू यह है कि जहां वारंट में संजय सिंह को थाना मेहनगर से संबंधित बताया गया है, वहीं उनके द्वारा दिए गए आवेदन में उन्होंने खुद को थाना जीयनपुर का प्रभारी निरीक्षक बताया है, दोनों ही स्थान आज़मगढ़ जिले में हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि उनके स्थानांतरण के कारण ऐसा हुआ है या यह दस्तावेजों में कोई त्रुटि है।

​अब सबकी निगाहें बलिया सीजेएम कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं कि क्या कोर्ट एसएचओ की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की मांग स्वीकार करेगा या उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।



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