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8 मिसाइल, टॉरपीडो और 55 KMPH रफ्तार; दुश्मन को समंदर में गाड़ेगा नया वॉरशिप
by on | 2026-11-03 11:24:41
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बेबाक 24 | ताज़ा खबर
समंदर के सीने पर तबाही मचाने आ रही है भारत की नई स्वदेशी नेक्स्ट-जनरेशन वॉरशिप. कॉर्वेट्स का स्वैग ऐसा है कि चीन और पाकिस्तान के पसीने छूटने तय हैं. BHEL की 76mm सुपर रैपिड गन, 8 मिसाइलें और 24 एंटी-मिसाइल डिफेंस वाले इस खूंखार बीस्ट की स्पीड ऐसी है कि देखते ही देखते दुश्मन पानी में जान बचाने के लिए कहीं छुपता नजर आएगा. 3,800 से 4,000 टन वजनी ये जायंट्स सिर्फ नाम के कॉर्वेट हैं, बाकी इनका तेवर किसी खूंखार फ्रिगेट से कम नहीं है. पुराने ‘खुकरी’ और ‘कोरा’ वाले जमाने गए भाई, अब समंदर में असली सुपरहीरो उतरने वाला है. जब 160 जांबाज सेलर्स के साथ ये समंदरी शिकारी 2030 में पानी में उतरेगा, तो महफिल पूरी तरह हमारी होगी.
53,866 करोड़ की मेगा डील और स्वदेशी स्वैग
भारतीय नौसेना ने समंदर में अपनी धाक जमाने के लिए एक बहुत बड़ा गेमचेंजर कदम उठाया है. रक्षा मंत्रालय ने 8 नेक्स्ट-जनरेशन कॉर्वेट्स के लिए 53,866.50 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत किए हैं. सबसे खास बात? इन जहाजों को किसी विदेशी कंपनी ने नहीं बल्कि खुद भारतीय नौसेना ने इन-हाउस डिजाइन किया है. इन्हें बनाने का जिम्मा देश के दो बड़े DPSUs गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE – 5 शिप) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL – 3 शिप) को मिला है. पहली शिप 2030 तक डिलीवर होगी.
पारंपरिक कॉर्वेट्स आमतौर पर 500 से 2,000 टन के छोटे और हल्के युद्धपोत होते हैं. लेकिन ये नए NGCs कॉर्वेट की परिभाषा ही बदल रहे हैं.
• साइज और वजन: 3,800 से 4,000 टन वजनी ये शिप वास्तव में किसी फ्रिगेट जितने विशाल हैं.
• स्पीड और रेंज: ये 30 नॉट (लगभग 55 किमी/घंटा) से ज्यादा की रफ्तार से भाग सकते हैं. 14 नॉट की स्पीड पर इनकी रेंज 4,000 समुद्री मील तक है, यानी बिना रुके लंबे समय तक महासागर में टिके रहने का दम रखते हैं.
• क्रू कैपेसिटी: हर शिप पर 160 सेलर्स और 21 ऑफिसर्स की तैनाती होगी.
• घातक हथियार: इसमें BHEL की 76 mm सुपर रैपिड गन, 8 सरफेस-टू-सरफेस मिसाइलें, 24 एंटी-मिसाइल डिफेंस वेपन्स और दो ट्रिपल 324 mm टॉरपीडो ट्यूब्स लगी हैं.
• एडवांस सेंसर्स: इसमें एयर, सरफेस और फायर-कंट्रोल रडार, इंफ्रारेड सर्च-एंड-ट्रैक, हल-माउंटेड और एक्टिव टॉव्ड एरे सोनार के साथ मॉडर्न कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम दिया गया है. इसका मतलब यह हवा, पानी की सतह और पानी के अंदर (सब-सरफेस) तीनों मोर्चों पर एक साथ तबाही मचा सकता है.
पुरानी खुकरी को रिप्लेस करेगा नया लीजेंड
ये नए युद्धपोत भारतीय नौसेना के पुराने पड़ रहे ‘खुकरी-क्लास’ (जैसे INS कुठार और INS खंजर) और ‘कोरा-क्लास’ के 4 जहाजों की जगह लेंगे. पुरानी खुकरी और कोरा क्लास जहाजों के मुकाबले यह नया NGC साइज, रेंज और हथियारों के मामले में कई गुना आगे है:
• तुलना: जहां पुराने कॉर्वेट्स मुख्य रूप से तटीय गश्त और सीमित अटैक तक सीमित थे, वहीं नए NGCs तटीय रक्षा, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, व्यापारिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला करने में सक्षम हैं.
• संक्षेप में कहें तो, यह सिर्फ एक नया मॉडल नहीं बल्कि तकनीक का पूरा जनरेशन शिफ्ट है.
आत्मनिर्भरता से रोजगार तक की सुपर हिट स्टोरी
यह सिर्फ नौसेना का हथियार बढ़ाना नहीं है बल्कि भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ा फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है.
1. मेक इन इंडिया का असली टेस्ट: यह पहला मौका है जब इंडियन नेवी की अपनी डिज़ाइन की हुई शिप को कॉम्पिटिटिव प्रोसेस से चुने गए घरेलू DPSUs बना रहे हैं. यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत का सबसे बड़ा सबूत है.
2. रोजगार का महा-विस्फोट: इस 10 साल के मेगा प्रोजेक्ट से शिपयार्ड्स में 72 लाख पर्सन-डेज और MSME व सहायक उद्योगों में 460 लाख पर्सन-डेज का सीधा रोजगार पैदा होगा.
3. लागत का सस्पेंस: प्रोजेक्ट की शुरुआत 2022 में Defence Acquisition Council में करीब 36,000 करोड़ रुपये से हुई थी, जिसे CCS ने 40,000 करोड़ से अधिक पर क्लियर किया. हालांकि, अंतिम कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 53,866.50 करोड़ रुपये रही है, जिसने नेवी की जरूरतों और मॉडर्न टेक्नोलॉजी के बढ़ते स्केल को रेखांकित किया है