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पीएम मोदी ने इसरो को दी बधाई, बोले- नाविक प्रणाली को मिलेगी मजबूती

by on | 2026-10-31 13:30:29

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पीएम मोदी ने इसरो को दी बधाई, बोले- नाविक प्रणाली को मिलेगी मजबूती

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एनवीएस-03 नेविगेशन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण कर अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 31 अक्टूबर की रात 11:51 बजे जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के माध्यम से उपग्रह को प्रक्षेपित किया गया। इस सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने सामाजिक माध्यम एक्स पर अपने संदेश में कहा कि एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण भारत की स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली ‘नाविक’ को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि बेहतर क्षमताओं से लैस यह उपग्रह महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता के प्रयासों को आगे बढ़ाएगा और देशवासियों के लिए उपयोगी नेविगेशन सेवाओं को मजबूती प्रदान करेगा।

वैज्ञानिकों के समर्पण की सराहना

पीएम मोदी ने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की प्रतिभा और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयास लगातार देश को गौरवान्वित कर रहे हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए इसरो की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।

इसरो प्रमुख ने भी दी बधाई

इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने मिशन की सफलता पर वैज्ञानिकों के साथ देशवासियों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस उपग्रह के माध्यम से आने वाले दिनों में देश को स्वदेशी नेविगेशन सेवाओं का लाभ मिलेगा।

इसरो के अनुसार, एनवीएस-03 को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। यह भारत की दूसरी पीढ़ी की नाविक उपग्रह शृंखला का तीसरा उपग्रह है। इसका उद्देश्य देश की क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली की क्षमता बढ़ाना और सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना है।

क्या है एनवीएस-03 उपग्रह का उद्देश्य?

एनवीएस-03 उपग्रह भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली नाविक को अधिक सक्षम बनाएगा। यह प्रणाली भारत और उसकी सीमाओं से लगभग 1500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में स्थिति, गति और समय से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती है।

इस उपग्रह में स्वदेशी और खरीदी गई परमाणु घड़ियां लगाई गई हैं। इसके अलावा, यह पहले से उपलब्ध एल5 और एस संकेतों के साथ एल1 नेविगेशन संकेत भी प्रसारित करेगा। इससे नाविक प्रणाली की उपयोगिता और क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

क्या है नाविक प्रणाली?

नाविक यानी ‘नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन’ भारत की स्वतंत्र क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ताओं को सटीक स्थिति, गति और समय संबंधी जानकारी मिलती है।

यह प्रणाली दो तरह की सेवाएं देती है। पहली, मानक स्थिति सेवा, जिसका उपयोग आम नागरिक कर सकते हैं। दूसरी, प्रतिबंधित सेवा, जो अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए कूटबद्ध रूप में उपलब्ध होती है।

नाविक का इस्तेमाल परिवहन, स्थान आधारित सेवाओं और अन्य नेविगेशन संबंधी गतिविधियों में किया जा सकता है।

दूसरी पीढ़ी के उपग्रह क्यों हैं महत्वपूर्ण?

इसरो ने नाविक प्रणाली की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए दूसरी पीढ़ी के 5 नेविगेशन उपग्रहों की योजना बनाई है। इस शृंखला का पहला उपग्रह एनवीएस-01 29 मई 2023 को जीएसएलवी-एफ12 रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया था।

एनवीएस-01 में पहली बार किसी भारतीय नेविगेशन उपग्रह पर स्वदेशी परमाणु घड़ी का इस्तेमाल किया गया था। अब एनवीएस-03 में एल1 संकेत को शामिल करने से प्रणाली की सेवाओं को और बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है।

बेबाक24 टेक

एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण भारत की स्वदेशी नेविगेशन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे नाविक प्रणाली की क्षमताओं और सेवाओं की निरंतरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, अंतरिक्ष तकनीक में आत्मनिर्भरता के भारत के प्रयासों को भी नई गति मिलेगी।



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