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भारत का अपना नेविगेशन तंत्र मजबूत, एनवीएस-03 से आम लोगों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

by on | 2026-10-31 13:30:25

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भारत का अपना नेविगेशन तंत्र मजबूत, एनवीएस-03 से आम लोगों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

भारत ने अंतरिक्ष और स्वदेशी तकनीक के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 को सफलतापूर्वक भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा में पहुंचा दिया है। स्वदेशी परमाणु घड़ी और नए एल1 संकेत से लैस यह उपग्रह भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली ‘नाविक’ को और मजबूत करेगा। इससे स्मार्टफोन, वाहन और परिवहन सेवाओं में स्थान तथा समय की जानकारी अधिक सटीक बनाने में मदद मिलेगी।

जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट से हुआ प्रक्षेपण

इसरो ने शुक्रवार रात 11:51 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण स्थल से जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के जरिए एनवीएस-03 उपग्रह का प्रक्षेपण किया।

2,232 किलोग्राम वजनी इस उपग्रह को निर्धारित भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा में स्थापित किया गया। इसकी कक्षा में पृथ्वी से निकटतम दूरी 170 किलोमीटर और अधिकतम दूरी 37,023 किलोमीटर बताई गई है। आगे की कक्षीय प्रक्रियाओं के बाद इसे 32.5 डिग्री पूर्व में निर्धारित स्थान पर पहुंचाया जाना है।

भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा एक अंडाकार कक्षा होती है, जिसका उपयोग उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षा तक पहुंचाने के लिए किया जाता है।

क्या है भारत की नाविक प्रणाली?

नाविक यानी ‘नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन’ भारत की स्वदेशी उपग्रह आधारित दिशा-निर्धारण प्रणाली है। इसे भारत की अपनी जीपीएस जैसी व्यवस्था कहा जा सकता है।

इसका उद्देश्य भारत और उसकी सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं को स्थान, दिशा और सटीक समय की जानकारी उपलब्ध कराना है।

एनवीएस-03 अगली पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रहों की श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। इसके सक्रिय होने से इस स्वदेशी व्यवस्था की क्षमता और सेवाओं को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।

एनवीएस-03 की 2 बड़ी खासियतें

1. स्वदेशी परमाणु घड़ी: इस उपग्रह में भारत में विकसित परमाणु घड़ी लगाई गई है। उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणाली में बेहद सटीक समय का विशेष महत्व होता है। समय की गणना में छोटी-सी त्रुटि भी स्थान की जानकारी को प्रभावित कर सकती है। स्वदेशी घड़ी से इसरो को समय संबंधी तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

2. नया एल1 संकेत: उपग्रह में नया एल1 संकेत भी शामिल किया गया है। इससे इस संकेत को समर्थन देने वाले स्मार्टफोन और अन्य उपकरणों में नेविगेशन सेवाओं की उपलब्धता तथा सटीकता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

आम लोगों को कैसे होगा फायदा?

एनवीएस-03 का प्रभाव केवल अंतरिक्ष तकनीक तक सीमित नहीं रहेगा। भारत की स्वदेशी नेविगेशन व्यवस्था मजबूत होने से कई क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है।

  • स्मार्टफोन: रास्ता खोजने और स्थान की जानकारी देने वाली सेवाओं में सुधार हो सकता है।

  • वाहन और परिवहन: वाहनों की स्थिति और मार्ग संबंधी जानकारी अधिक सटीक बनाने में मदद मिलेगी।

  • समुद्री और हवाई परिवहन: दिशा-निर्धारण तथा समय संबंधी सेवाओं को मजबूती मिलेगी।

  • आपदा प्रबंधन: आपातकालीन परिस्थितियों में स्थान की पहचान और राहत कार्यों में सहायता मिल सकती है।

  • समय निर्धारण: दूरसंचार, बिजली ग्रिड, डिजिटल वित्तीय लेनदेन और आंकड़ा केंद्रों जैसी सेवाओं के लिए सटीक समय उपलब्ध कराने की क्षमता मजबूत होगी।

हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ उपकरणों की अनुकूलता, उपग्रह सेवाओं की उपलब्धता और संबंधित प्रणालियों में इनके उपयोग पर निर्भर करेगा।

'एक देश, एक समय' पहल को मिलेगी मजबूती

एनवीएस-03 मिशन को केंद्र सरकार की ‘एक देश, एक समय’ पहल से भी जोड़कर देखा जा रहा है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, दूरसंचार, डिजिटल भुगतान, बिजली ग्रिड, परिवहन और आंकड़ा केंद्रों के सुरक्षित संचालन के लिए एक समान और सटीक समय जरूरी है।

सरकार ने 29 अगस्त को विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 अधिसूचित किए थे। ये नियम राजपत्र में प्रकाशित होने के 180 दिन बाद लागू होंगे।

एनवीएस-02 की तकनीकी विफलता से लिया सबक

इसरो ने इस मिशन में पिछली तकनीकी समस्या से सबक लेते हुए कुछ बदलाव किए हैं। जनवरी 2025 में एनवीएस-02 मिशन के दौरान एक संयोजक में खराबी के कारण उपग्रह को निर्धारित कक्षा तक पहुंचाने में समस्या आई थी।

इस बार ऐसी दिक्कत से बचने के लिए उपग्रह की संरचना में बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा, उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर सुरक्षा संबंधी सुधार भी लागू किए गए हैं।

बेबाक24 टेक

एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण भारत की स्वदेशी नेविगेशन और समय निर्धारण तकनीक को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे विदेशी नेविगेशन प्रणालियों पर निर्भरता कम करने और घरेलू तकनीकी क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसे जीपीएस का तत्काल पूर्ण विकल्प मानना सही नहीं होगा। आम लोगों को इसका लाभ उपग्रह के संचालन और उनके उपकरणों में संबंधित तकनीक के समर्थन पर निर्भर करेगा।



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