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गूगल ने अंतरिक्ष में चलाया एआई मॉडल, सैटेलाइट से मिला पहला जवाब

by on | 2026-10-31 12:34:07

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गूगल ने अंतरिक्ष में चलाया एआई मॉडल, सैटेलाइट से मिला पहला जवाब

टेक डेस्क | बेबाक24 न्यूज़

गूगल ने अपने प्रोजेक्ट सनकैचर के तहत अंतरिक्ष में मौजूद प्रोटोटाइप सैटेलाइट पर जेम्मा 4 कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल सफलतापूर्वक चलाया है। कंपनी को सैटेलाइट से पहला पूरा जवाब भी प्राप्त हुआ, जो अंतरिक्ष पर आधारित एक छोटी कविता यानी हाइकू था। इस प्रयोग को अंतरिक्ष में एआई कंप्यूटिंग की संभावनाओं की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

सुंदर पिचाई ने बताया 'हैलो वर्ल्ड' मील का पत्थर

गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस उपलब्धि की जानकारी दी। उन्होंने इसे प्रोजेक्ट सनकैचर के लिए 'हैलो वर्ल्ड' मील का पत्थर बताया।

पिचाई के अनुसार, टीम ने सबसे पहले सैटेलाइट को निर्देश भेजे। इसके बाद उसमें मौजूद टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (टीपीयू) को चालू किया गया और एआई मॉडल पर निर्देश चलाया गया। मॉडल का पूरा जवाब पृथ्वी पर प्राप्त हुआ।

क्या है प्रोजेक्ट सनकैचर?

प्रोजेक्ट सनकैचर गूगल की एक शोध परियोजना है। इसके तहत कंपनी यह पता लगा रही है कि क्या भविष्य में अंतरिक्ष में बड़े स्तर पर एआई कंप्यूटिंग ढांचा तैयार किया जा सकता है।

इसका उद्देश्य यह जांचना है कि सैटेलाइट पर एआई मॉडल चलाना कितना व्यावहारिक है और क्या कई सैटेलाइट को आपस में जोड़कर बड़े कंप्यूटिंग कार्य पूरे किए जा सकते हैं।

जेम्मा 4 ने अंतरिक्ष पर लिखी कविता

इस प्रयोग में गूगल के जेम्मा 4 मुक्त एआई मॉडल का इस्तेमाल किया गया। टीम ने जमीन पर बने केंद्र से संपर्क के दौरान सैटेलाइट पर मौजूद मॉडल को अंतरिक्ष के बारे में एक हाइकू लिखने का निर्देश दिया।

सैटेलाइट ने जवाब तैयार किया और टीम को यह उत्तर उस समय मिला, जब वह नॉर्वे के स्वालबार्ड क्षेत्र के ऊपर से गुजर रहा था।

इसके बाद मॉडल को कुछ और निर्देश दिए गए। इनमें अंतरिक्ष पर छोटी तुकबंदी लिखने और सैटेलाइट की तकनीकी स्थिति की जानकारी देने जैसे परीक्षण शामिल थे। इस तरह गूगल ने कविता तैयार करने के साथ-साथ सैटेलाइट के सिस्टम से जुड़ी जानकारी हासिल करने की क्षमता भी परखी।

अब तापमान और विकिरण के बीच होगी चिप्स की जांच

गूगल का अगला लक्ष्य अंतरिक्ष के कठिन वातावरण में टीपीयू चिप्स की कार्यक्षमता परखना है। इसके लिए कंपनी मुख्य रूप से दो पहलुओं पर ध्यान दे रही है:

  • तापमान का प्रभाव: अंतरिक्ष में अत्यधिक तापमान के उतार-चढ़ाव के बीच चिप्स कितनी विश्वसनीयता से काम करती हैं।

  • विकिरण का असर: अंतरिक्ष में मौजूद विकिरण का चिप्स और उनकी गणना क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है।

इन परीक्षणों से यह समझने में मदद मिलेगी कि अंतरिक्ष में कंप्यूटिंग प्रणालियां लंबे समय तक भरोसेमंद ढंग से काम कर सकती हैं या नहीं।

2027 में 2 सैटेलाइट जोड़ने की तैयारी

गूगल की योजना मौजूदा परीक्षणों के सफल रहने पर 2027 में 2 सैटेलाइट को आपस में जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने की है। कंपनी भविष्य में कई सैटेलाइट का ऐसा नेटवर्क तैयार करने की संभावना भी तलाश रही है, जो बड़े एआई कार्यों को संभाल सके।

गूगल के अनुसार, पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद सैटेलाइट लगभग लगातार सूर्य की रोशनी प्राप्त कर सकते हैं। कंपनी का दावा है कि ऐसे सैटेलाइट पृथ्वी की तुलना में 8 गुना तक अधिक सौर ऊर्जा पैदा कर सकते हैं।

हालांकि, अंतरिक्ष में एआई कंप्यूटिंग का व्यापक ढांचा तैयार करने से पहले चिप्स की विश्वसनीयता, तापमान, विकिरण और सैटेलाइट के बीच संपर्क जैसी कई तकनीकी चुनौतियों का समाधान करना होगा।

बेबाक24 टेक

प्रोजेक्ट सनकैचर के तहत गूगल का प्रयोग दिखाता है कि अंतरिक्ष में एआई मॉडल चलाना अब केवल कल्पना नहीं रहा। सैटेलाइट से पूरा जवाब हासिल करना शुरुआती तकनीकी उपलब्धि है, लेकिन इसे बड़े कंप्यूटिंग नेटवर्क में बदलने के लिए अभी कई परीक्षण और तकनीकी चुनौतियां बाकी हैं।



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