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मजीठिया फिर चर्चा में, 2027 चुनाव से पहले कानूनी लड़ाई तेज

by on | 2026-10-31 12:25:42

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मजीठिया फिर चर्चा में, 2027 चुनाव से पहले कानूनी लड़ाई तेज

चंडीगढ़ | बेबाक24 न्यूज़

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया एक बार फिर चर्चा में हैं। नशा तस्करी से जुड़े मामले और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर पिछले करीब 10 वर्षों से वह कानूनी विवादों का सामना कर रहे हैं। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही उनके खिलाफ चल रहे मामलों ने राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है।

आम आदमी पार्टी ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान मजीठिया को लेकर अकाली दल पर निशाना साधा था। अब 2027 के चुनाव से पहले आय से अधिक संपत्ति मामले में दाखिल पूरक आरोप पत्र ने इस विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है। मजीठिया इन आरोपों को गलत बताते हुए सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाते रहे हैं।

2017 में शुरू हुआ राजनीतिक विवाद

2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी ने मजीठिया पर नशा तस्करों से संबंध होने के आरोप लगाए थे। पार्टी नेताओं ने उन्हें जेल भेजने का वादा भी किया था। इसके बाद मजीठिया ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया। मार्च 2018 में केजरीवाल ने मजीठिया से माफी मांग ली थी।

हालांकि, नशा तस्करी से जुड़े आरोपों की जांच जारी रही। 20 दिसंबर 2021 को मोहाली में स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम के तहत मजीठिया के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

2022 में गिरफ्तारी और फिर जमानत

मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद मजीठिया ने 24 फरवरी 2022 को मोहाली की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में पटियाला जेल भेज दिया गया।

करीब साढ़े 5 महीने जेल में रहने के बाद 10 अगस्त 2022 को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से उन्हें जमानत मिल गई। इसी वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में मजीठिया अमृतसर पूर्वी सीट से चुनाव लड़े, लेकिन कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू से हार गए।

आय से अधिक संपत्ति मामले में कार्रवाई

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद भी मजीठिया से जुड़ा नशा तस्करी का मामला जांच के दायरे में रहा। 25 जून 2025 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया।

विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार, जांच के दौरान करीब 540 करोड़ रुपये के कथित अवैध धन का पता चला। 22 अगस्त 2025 को मोहाली की विशेष अदालत में लगभग 40,000 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया गया। इसमें करीब 700 करोड़ रुपये की संपत्तियों और कथित वित्तीय अनियमितताओं का विवरण शामिल था।

इसके बाद 2 फरवरी 2026 को उच्चतम न्यायालय से मजीठिया को जमानत मिल गई।

2027 चुनाव से पहले पूरक आरोप पत्र

28 अक्टूबर 2026 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति मामले में पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें करीब 736 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति और वित्तीय लेन-देन का विवरण दिया गया है।

आरोप पत्र में 161 करोड़ रुपये के कथित बेहिसाब नकद जमा, 141 करोड़ रुपये के विदेशी लेन-देन और कंपनियों के खातों में 236 करोड़ रुपये के कथित अस्पष्ट जमा का उल्लेख है। इसके साथ ही मामले में दाखिल दस्तावेजों की कुल संख्या लगभग 52,000 से 53,000 पन्नों तक पहुंच गई है।

विजिलेंस ब्यूरो के आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला होना बाकी है। मजीठिया इन आरोपों को झूठा बताते हुए इन्हें राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित करार देते रहे हैं।

2027 के चुनाव में क्यों अहम हो सकता है मामला?

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मजीठिया से जुड़े कानूनी मामले राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकते हैं। आम आदमी पार्टी पहले भी इन मामलों को लेकर अकाली दल पर सवाल उठाती रही है, जबकि मजीठिया की ओर से राजनीतिक बदले की कार्रवाई का आरोप लगाया जाता रहा है।

ऐसे में आने वाले महीनों में इस मामले की कानूनी प्रगति और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं पंजाब की चुनावी चर्चा को प्रभावित कर सकती हैं।

बेबाक24 टेक

बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े मामले पिछले एक दशक से पंजाब की राजनीति और कानूनी प्रक्रिया के केंद्र में रहे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पूरक आरोप पत्र दाखिल होने से यह मुद्दा फिर चर्चा में है। हालांकि, आरोपों की गंभीरता के बावजूद मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले के बाद ही निकलेगा।



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