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महिला आरक्षण और परिसीमन पर विशेष सत्र की तैयारी, एसआईआर विवाद से बढ़ी चुनौती

by on | 2026-10-23 11:25:33

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महिला आरक्षण और परिसीमन पर विशेष सत्र की तैयारी, एसआईआर विवाद से बढ़ी चुनौती

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने की संभावनाएं तलाश रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार को विधेयकों के लिए जरूरी समर्थन जुटने की उम्मीद है, लेकिन संसद में जारी राजनीतिक टकराव के बीच सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से चलाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

पहले नीट विवाद और अब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर बढ़े राजनीतिक संघर्ष ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। आशंका है कि विशेष सत्र में विपक्ष ने एसआईआर का मुद्दा उठाया तो विधेयकों का समर्थन करने वाले कुछ विपक्षी दलों के लिए भी राजनीतिक दबाव से दूरी बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

विशेष सत्र बुलाने की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने विशेष सत्र की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान अब तक नहीं किया है। इससे कम समय के नोटिस पर सदन की बैठक बुलाने का विकल्प खुला रह सकता है।

सरकार को उम्मीद थी कि मानसून सत्र के अनिश्चितकालीन स्थगन के बाद राजनीतिक माहौल में सुधार होगा। हालांकि, नीट विवाद के बाद एसआईआर पर शुरू हुए नए टकराव ने सदन में सहमति बनाने की राह कठिन कर दी है।

दो-तिहाई समर्थन जुटने का दावा

सूत्रों का दावा है कि सरकार ने संविधान संशोधन विधेयकों के लिए जरूरी दो-तिहाई समर्थन जुटाने की दिशा में प्रगति की है। बताया जा रहा है कि कुछ विरोधी दल विधेयकों का समर्थन करने के लिए तैयार हुए हैं, जबकि कुछ अन्य दलों के साथ मतदान के दौरान अनुपस्थित रहने को लेकर सहमति बनने की बात कही जा रही है।

हालांकि, यह समर्थन अभी राजनीतिक दावों और बातचीत पर आधारित है। विधेयकों का वास्तविक भविष्य संसद में मतदान और संबंधित संवैधानिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।

संविधान संशोधन के लिए क्या है नियम?

संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। सामान्य विधेयकों के विपरीत, संविधान संशोधन के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन के साथ सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत की शर्त भी लागू होती है।

इसी वजह से सरकार के लिए केवल संख्या बल का दावा पर्याप्त नहीं है। उसे मतदान के समय जरूरी समर्थन सुनिश्चित करने के साथ सदन की कार्यवाही भी सुचारु रूप से चलानी होगी।

एसआईआर विवाद से बढ़ सकती है राजनीतिक मुश्किल

सूत्रों के मुताबिक, विशेष सत्र के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल एसआईआर को प्रमुख मुद्दा बना सकते हैं। ऐसी स्थिति में महिला आरक्षण और परिसीमन पर सरकार के साथ सहमति जताने वाले कुछ विपक्षी दलों पर भी अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करने का दबाव पड़ सकता है।

इसलिए सरकार के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर संविधान संशोधन विधेयकों के लिए जरूरी समर्थन बनाए रखना और दूसरी ओर संसद में हंगामे की आशंका के बीच कार्यवाही को आगे बढ़ाना।

बेबाक24 टेक

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों पर आगे बढ़ने के लिए सरकार विशेष सत्र की संभावनाएं तलाश रही है। हालांकि, समर्थन जुटाने के दावों के बावजूद एसआईआर विवाद और विपक्ष के साथ टकराव सहमति की राह में बाधा बन सकते हैं। विधेयकों की वास्तविक स्थिति विशेष सत्र बुलाने के फैसले, सदन में चर्चा और मतदान के बाद ही स्पष्ट होगी।



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