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उच्च शिक्षण संस्थानों में हर तीसरा विद्यार्थी खुद को बाहरी मानता है

by on | 2026-09-27 13:24:39

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उच्च शिक्षण संस्थानों में हर तीसरा विद्यार्थी खुद को बाहरी मानता है

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिला पाने के बाद भी बड़ी संख्या में विद्यार्थी खुद को परिसर का हिस्सा नहीं मान पाते। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट के अनुसार, करीब हर तीसरा विद्यार्थी खुद को संस्थान में बाहरी महसूस करता है। 2.43 लाख विद्यार्थियों के सर्वे में 15% ने पिछले 6 महीनों में गंभीर तनाव और 15% ने पिछले एक साल में बार-बार आत्महत्या के विचार आने की बात कही।

रिपोर्ट के मुताबिक, भाषा, सामाजिक और आर्थिक स्थिति, भेदभाव, पढ़ाई का दबाव और अकेलापन विद्यार्थियों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। 2018 से 2023 के बीच तनाव समेत विभिन्न कारणों से 13,600 विद्यार्थियों ने पढ़ाई बीच में छोड़ दी।

अव्वल से पिछड़ने का दबाव

प्रतिष्ठित संस्थानों में पहुंचने वाले कई विद्यार्थी स्कूल स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करते रहे होते हैं। लेकिन उच्च शिक्षण संस्थानों में उन्हें पहली बार ऐसे माहौल का सामना करना पड़ता है, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी समान रूप से सक्षम होते हैं। ऐसे में प्रदर्शन कमजोर होने पर कुछ विद्यार्थियों में हीनभावना और आत्मविश्वास की कमी बढ़ने लगती है।

रिपोर्ट में 2025 के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि सामाजिक रूप से वंचित समूहों के विद्यार्थियों के लिए प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला आगे बढ़ने का अवसर देता है, लेकिन परिसर में भेदभाव उनके लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल बना सकता है।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामले

रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों के अनुसार विद्यार्थियों की आत्महत्या के मामलों में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा। यहां 1,764 मामले दर्ज हुए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 1,060, दिल्ली में 385, हरियाणा में 237, पंजाब में 150, हिमाचल प्रदेश में 74 तथा उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में 60-60 मामले सामने आए।

15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग में आत्महत्या मौत के प्रमुख कारणों में शामिल है। कुल आत्महत्या के मामलों में करीब 40% मृतक 30 वर्ष से कम उम्र के रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 31.7% मामलों में पारिवारिक कारण दर्ज हुए, जबकि बेरोजगारी से जुड़े मामले 1.9% और परीक्षा में असफलता से जुड़े मामले 1.2% रहे।

2022 में 13,044 विद्यार्थियों की मौत

वर्ष 2022 में देश में 1.71 लाख आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। इनमें 13,044 विद्यार्थी थे। यह कुल मामलों का 7.6% था।

आर्थिक तंगी भी बड़ी वजह

2018 से 2023 के बीच केंद्रीय विश्वविद्यालयों के 9,642 विद्यार्थियों ने पढ़ाई बीच में छोड़ी। इसी अवधि में आईआईटी के 3,542 और आईआईएम के 42 विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ी।

रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी खड़गपुर में एससी-एसटी विद्यार्थियों के बीच पढ़ाई छोड़ने की दर सामान्य वर्ग की तुलना में 318% अधिक रही। पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों में 47.6% ने आर्थिक तंगी को इसकी वजह बताया।

दबाव की शुरुआत स्कूल से

रिपोर्ट के अनुसार विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव कई बार कक्षा 9 से ही बढ़ने लगता है। कोचिंग, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, अपेक्षित अंक न मिलना, घर से दूर रहने का अकेलापन और माता-पिता की अपेक्षाएं इस दबाव को बढ़ा सकती हैं। कुछ विद्यार्थी इससे उबर जाते हैं, जबकि कुछ के लिए यह स्थिति गंभीर संकट का रूप ले सकती है।

बेबाक24 टेक

नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट उच्च शिक्षण संस्थानों में केवल दाखिले और शैक्षणिक प्रदर्शन से आगे विद्यार्थियों के सामाजिक, आर्थिक और मानसिक अनुभवों की तस्वीर सामने रखती है। आंकड़े बताते हैं कि संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए अपनापन, सहयोग और समय पर सहायता की व्यवस्था भी उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।



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