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₹2,700 की कैंसर दवा पर ₹27,000 की MRP; सुप्रीम कोर्ट ने 10 गुना मुनाफ़ाखोरी पर केंद्र और रेगुलेटर्स को लगाई कड़ी फटकार

by admin@bebak24.com on | 2026-09-23 13:11:16

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₹2,700 की कैंसर दवा पर ₹27,000 की MRP; सुप्रीम कोर्ट ने 10 गुना मुनाफ़ाखोरी पर केंद्र और रेगुलेटर्स को लगाई कड़ी फटकार

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

कैंसर की दवा की खरीद कीमत और अधिकतम खुदरा मूल्य के बीच 10 गुना अंतर सामने आने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। अदालत के सामने आए मामले में एक दवा दुकानदार को करीब 2700 रुपये में मिल रही थी, जबकि उसी दवा पर 27000 रुपये की अधिकतम खुदरा कीमत दर्ज थी। पीठ ने सवाल उठाया कि जब दवा इतनी कम कीमत में उपलब्ध है तो मरीज से इतनी बड़ी रकम क्यों ली जाए।

अदालत ने मुनाफाखोरी पर जताई चिंता

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ जरूरी दवाओं की कीमतों और आपूर्ति व्यवस्था में कथित मुनाफाखोरी से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई के दौरान कीमत में भारी अंतर का मामला सामने आने पर अदालत ने बेहद कड़ी टिप्पणी की। पीठ ने कैंसर मरीजों की आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि गंभीर बीमारी के इलाज का खर्च उठाने के लिए कई परिवार अपनी संपत्ति और गहने तक बेचने को मजबूर हो जाते हैं।

जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सवाल

अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि ऐसी स्थिति पर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी रखने वाले अधिकारी क्या कर रहे हैं। पीठ ने दवाओं की कीमत में इस तरह के अंतर को लेकर संबंधित प्राधिकारों की भूमिका पर जवाब मांगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाने वाली व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी जरूरी है।

सरकारी भुगतान और करदाताओं के पैसे का मुद्दा

सुनवाई के दौरान सरकारी स्वास्थ्य योजना के तहत दवाओं के भुगतान का मुद्दा भी सामने आया। अदालत के समक्ष यह बात रखी गई कि कुछ मामलों में अस्पतालों द्वारा दवाओं की खरीद का खर्च अंततः सरकारी भुगतान के माध्यम से पूरा होता है।

इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि यदि कम कीमत में उपलब्ध दवा के लिए सरकारी व्यवस्था के जरिए कई गुना अधिक भुगतान किया जा रहा है, तो इसका बोझ आखिरकार करदाताओं पर पड़ता है। पीठ ने इस पहलू की भी गंभीरता से जांच की जरूरत बताई।

कुछ राज्यों में कैंसर की अधिसूचना पर भी सवाल

एक अन्य सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने कैंसर को अधिसूचित बीमारी घोषित करने का मुद्दा भी आया। अदालत को बताया गया कि कुछ राज्यों में कैंसर को अभी तक अधिसूचित बीमारी का दर्जा नहीं मिला है।

अदालत के सामने उठे इन मुद्दों का संबंध दवाओं की कीमत, मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ और कैंसर की निगरानी व्यवस्था से है। आगे की सुनवाई में इन पहलुओं पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।

बेबाक24 की राय: मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां दवाओं की कीमत तय होने की प्रक्रिया, मरीजों से वसूली और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में होने वाले भुगतान की निगरानी से जुड़े सवालों को सामने लाती हैं। अब संबंधित प्राधिकारों से जवाब और अदालत के आगे के निर्देश इस मामले की दिशा तय करेंगे।



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