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टाटा संस में शीर्ष स्तर पर खींचतान; लिस्टिंग टालने के लिए नोएल टाटा ने रखा कंपनी बांटने का प्रस्ताव, चंद्रशेखरन के कार्यकाल पर भी मतभेद

by admin@bebak24.com on | 2026-09-23 12:39:38

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टाटा संस में शीर्ष स्तर पर खींचतान; लिस्टिंग टालने के लिए नोएल टाटा ने रखा कंपनी बांटने का प्रस्ताव, चंद्रशेखरन के कार्यकाल पर भी मतभेद

मुंबई | बेबाक24 न्यूज़

टाटा समूह की प्रमुख कंपनी टाटा संस के भविष्य को लेकर शीर्ष स्तर पर मतभेद सामने आए हैं। 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने कंपनी को अलग-अलग इकाइयों में बांटकर पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा। इसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया से बचने या उसे टालने के संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

लिस्टिंग और नेतृत्व पर अलग-अलग राय

टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने को लेकर कंपनी के भीतर मतभेद उस समय और स्पष्ट हुए, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने कंपनी का पंजीकरण रद्द करने से जुड़ा आवेदन स्वीकार नहीं किया।

बोर्ड बैठक में नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन को दोबारा कार्यकारी चेयरमैन बनाए जाने और सूचीबद्धता की दिशा में आगे बढ़ने पर भी असहमति जताई। दूसरी ओर, बोर्ड के अधिकांश सदस्यों ने इन प्रस्तावों का समर्थन किया।

टाटा संस में 18.37 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला एसपी समूह सूचीबद्धता के पक्ष में है। उसके लिए कंपनी के शेयर बाजार में आने से जुड़ा फैसला वित्तीय जरूरतों और कर्ज से भी जुड़ा हुआ है।

कंपनी को बांटना आसान नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार टाटा संस जैसी बड़ी कंपनी का पुनर्गठन कई स्तरों पर जटिल हो सकता है। इसमें नियामकीय मंजूरी, कर व्यवस्था, कारोबारों के बंटवारे और मौजूदा हिस्सेदारी से जुड़े सवाल सामने आ सकते हैं।

कैटलिस्ट एडवाइजर्स के केतन दलाल के अनुसार, यदि पुनर्गठन को नियामकीय नियमों से बचने के प्रयास के रूप में देखा गया, तो भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

चार बैठकों में बढ़ा विवाद

टाटा संस के नेतृत्व और सूचीबद्धता को लेकर मतभेद पिछले कुछ महीनों में हुई कई बैठकों के दौरान सामने आए।

24 फरवरी की बैठक में एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर चर्चा होनी थी, लेकिन फैसला आगे बढ़ गया। 26 मई और 12 जून की बैठकों में भी कई कारोबारी योजनाओं पर सहमति नहीं बनी।

12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने तीसरा कार्यकाल नहीं लेने की इच्छा जताई थी। 3 सितंबर को इस फैसले पर दोबारा विचार की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद 17 सितंबर की बैठक में बोर्ड ने उन्हें 5 साल के नए कार्यकाल की मंजूरी दे दी।

असली पेच बोर्ड के नियमों में

17 सितंबर की बैठक में दोनों प्रमुख प्रस्तावों पर नोएल टाटा की असहमति के बावजूद बोर्ड के बाकी सदस्यों ने उनका समर्थन किया। अब विवाद टाटा संस के आर्टिकल 121 की व्याख्या से भी जुड़ गया है।

मुख्य सवाल यह है कि ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों के मत बराबर होने की स्थिति में अध्यक्ष के निर्णायक मत का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है। बोर्ड और ट्रस्ट्स की ओर से इस प्रावधान की अलग-अलग व्याख्या किए जाने की बात सामने आई है।

बेबाक24 की राय: टाटा संस का मौजूदा विवाद केवल सूचीबद्धता के फैसले तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में कंपनी के पुनर्गठन, नेतृत्व, ट्रस्ट्स की भूमिका और बोर्ड के अधिकारों की व्याख्या जैसे मुद्दे हैं। आगे की तस्वीर नियामकीय प्रक्रिया, बोर्ड के फैसलों और इस विवाद से जुड़े कानूनी पहलुओं पर निर्भर करेगी।



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