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चुनावी हार के बाद भी ईरान पर हमले के फैसले पर अड़े ट्रंप

by on | 2026-11-05 12:15:53

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चुनावी हार के बाद भी ईरान पर हमले के फैसले पर अड़े ट्रंप

अमेरिका | बेबाक24 न्यूज़

अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध के फैसले का बचाव किया है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए ईरान युद्ध को जिम्मेदार बताया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने स्वीकार किया कि युद्ध के कारण कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि मौका मिलने पर वह दोबारा यही फैसला लेंगे।

ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी: ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध और चुनावी हार के बीच संबंध होने की बात काफी हद तक सही है। युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतों में अस्थायी बढ़ोतरी हुई, जिसका असर मतदाताओं पर पड़ा हो सकता है। हालांकि, उनके मुताबिक लंबे समय के हितों को देखते हुए यह फैसला जरूरी था।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दे सकता। ऐसा होने पर गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें पहले ही आशंका थी कि युद्ध के कारण तेल की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई करना जरूरी था।

डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ काम करने को तैयार

चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों पर ट्रंप ने कहा कि वह डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं, बशर्ते वे सरकार के कामकाज में बाधा डालने की कोशिश न करें।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के पास विधेयकों को रोकने के लिए वीटो की शक्ति मौजूद है। ट्रंप के मुताबिक, डेमोक्रेटिक नेताओं ने उनसे पहले ही संपर्क किया है और वे कुछ मुद्दों पर बातचीत करना चाहते हैं।

चुनावी हार के बाद भी नीति बदलने के संकेत नहीं

मध्यावधि चुनावों में झटका लगने के बावजूद ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी नीति में बदलाव का कोई संकेत नहीं दिया। उनके बयान से स्पष्ट है कि वह चुनावी नुकसान की आशंका के बावजूद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की कार्रवाई को सही मानते हैं।

बेबाक24 टेक

चुनावी हार के बाद ट्रंप के सामने अब दोहरी चुनौती है। उन्हें एक ओर ईरान युद्ध को लेकर अपनी विदेश नीति का बचाव करना होगा, वहीं दूसरी ओर डेमोक्रेटिक पार्टी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव के बीच घरेलू मुद्दों पर भी सहमति बनानी होगी। फिलहाल उनका रुख बताता है कि चुनावी नतीजे ईरान को लेकर उनके फैसले को बदलने वाले नहीं हैं।



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