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"जब पैथी की कद्र नहीं तो पढ़ाई क्यों?": बनारस में आयुष मंत्री से भिड़े छात्र, स्टाइपेंड भेदभाव और लाठीचार्ज पर दागे तीखे सवाल

by on | 2026-09-22 22:01:58

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"जब पैथी की कद्र नहीं तो पढ़ाई क्यों?": बनारस में आयुष मंत्री से भिड़े छात्र, स्टाइपेंड भेदभाव और लाठीचार्ज पर दागे तीखे सवाल

वाराणसी (दो बेबाक 24)। चौकाघाट स्थित राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय में 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के मौके पर जमकर हंगामा हुआ। धन्वंतरि सभागार में पत्रिका 'स्वास्थ्य मंजरी' का विमोचन करने पहुंचे आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु' का सामना भाषणों से नहीं, बल्कि आक्रोशित आयुष छात्रों के तीखे सवालों से हो गया। छात्रों ने मंत्री की घेराबंदी करते हुए स्टाइपेंड की बदहाली से लेकर पुलिसिया लाठीचार्ज और कॉलेज में दवाओं के अकाल तक पर सरकार की नीति और नीयत पर सीधे सवाल दागे।

7,500 में कैसे चले गुजारा, 25,000 की मांग पर अड़े छात्र

छात्रों का सबसे बड़ा दर्द स्टाइपेंड में हो रहे सौतेले व्यवहार को लेकर छलका। वर्तमान में आयुष इंटर्न डॉक्टरों को महज ₹7,500 प्रति माह दिए जा रहे हैं। छात्रों ने दोटूक कहा कि इस महंगाई में इतनी कम रकम पर गुजारा मुमकिन नहीं है। वे लंबे समय से स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं।

ग़ौरतलब है कि अगस्त 2026 में प्रदेश सरकार ने एमबीबीएस और बीडीएस (MBBS/BDS) इंटर्न्स का स्टाइपेंड ₹12,000 से सीधे बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया था। आयुष छात्र अब सवाल उठा रहे हैं कि जब काम बराबरी का है, तो चिकित्सा पद्धति के आधार पर स्टाइपेंड में ऐसा भेदभाव क्यों?

"हक मांगा तो लाठियां क्यों बरसाईं?"

लखनऊ में हुए हालिया शांतिपूर्ण प्रदर्शन का जिक्र करते हुए छात्रों ने मंत्री के सामने पुलिस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया। छात्रों ने पूछा कि अपनी वाजिब मांगों के लिए सड़क पर उतरे युवाओं को दौड़ा-दौड़ाकर क्यों पीटा गया? जब मंत्री जी ने प्रदर्शन की अनुमति को लेकर सवाल दागा, तो छात्रों ने भी बेबाकी से प्रशासनिक उत्पीड़न की पूरी दास्तान सामने रख दी।

आयुष पैथी पर सवाल तो फिर पढ़ाई ही क्यों?

लखनऊ प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर आयुष पद्धति को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर भी छात्रों का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने मंत्री से तीखा सवाल किया—"अगर सरकार और प्रशासन की नजर में आयुष पैथी की कोई कीमत ही नहीं है, तो हमें क्यों पढ़ाया जा रहा है? एक तरफ सरकार आयुष को बढ़ावा देने का ढिंढोरा पीटती है, दूसरी तरफ इसी पैथी के डॉक्टरों को नीचा दिखाया जाता है।"

अस्पताल में दवाइयां गायब, कैसे हो मरीजों का इलाज?

बात सिर्फ स्टाइपेंड तक ही सीमित नहीं रही। आयुष छात्रों ने अस्पताल की जमीनी हकीकत की पोल खोलते हुए आयुर्वेदिक दवाओं की भारी कमी का मुद्दा उठाया। छात्रों ने साफ कहा कि जब अस्पताल में दवाएं ही मौजूद नहीं रहेंगी, तो वे आने वाले मरीजों को इलाज कैसे देंगे?

कार्यक्रम में छात्रों का आक्रोश और बढ़ती भीड़ को देखते हुए स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद राज्य मंत्री को आनन-फानन में वहां से निकलना पड़ा। आयुष छात्रों के इन चुभते सवालों ने एक बार फिर प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था और आयुष डॉक्टरों के प्रति सरकारी रवैये पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।



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