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जयशंकर ने पी4एम शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की, बोले- वैश्विक व्यवस्था दबाव में

by admin@bebak24.com on | 2026-09-22 13:08:23

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जयशंकर ने पी4एम शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की, बोले- वैश्विक व्यवस्था दबाव में

न्यूयॉर्क | बेबाक24 न्यूज़

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान आयोजित ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म’ शिखर सम्मेलन में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों तथा मानदंडों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।

संघर्ष और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा

सम्मेलन में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि दुनिया अलग-अलग क्षेत्रों, संस्कृतियों और इतिहासों से बनी है, लेकिन जलवायु परिवर्तन, महामारी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आर्थिक असुरक्षा जैसी चुनौतियां सभी देशों के सामने हैं।

कोस्टा ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था पर बढ़ते दबाव का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में टकराव की जगह सहयोग को बढ़ावा देने की जरूरत है।

सुधारित बहुपक्षवाद पर जोर

जयशंकर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के बीच बहुपक्षवाद की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। उनके अनुसार, केवल घोषणाओं से नहीं बल्कि सामूहिक प्रयासों और व्यावहारिक सहयोग से वैश्विक चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

उन्होंने शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई, विकास वित्त, आतंकवाद से मुकाबला, आपूर्ति शृंखला, आपदा प्रबंधन और महामारी की तैयारी जैसे मुद्दों को सामूहिक प्रयास से जोड़ने की जरूरत बताई।

भारत ने 4F संकट का मुद्दा उठाया

जयशंकर ने ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त से जुड़े ‘4F’ संकट पर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों के दौरान इन क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले व्यवधानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने नई तकनीकों और उभरती चुनौतियों के लिए मजबूत सुरक्षा ढांचे की जरूरत बताई। साथ ही, जोखिम कम करने और आपूर्ति के विविध स्रोत विकसित करने पर भी जोर दिया।

संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत

एंटोनियो कोस्टा ने बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तीन प्राथमिकताओं का उल्लेख किया—अंतरराष्ट्रीय नियमों और संस्थाओं की रक्षा, वैश्विक चुनौतियों पर व्यावहारिक प्रगति और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार।

जयशंकर ने भी अधिक सहभागी विचार-विमर्श और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद तभी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है जब अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और मानदंडों का ईमानदारी से पालन हो।

बेबाक24 की राय

सम्मेलन में भारत और यूरोपीय संघ की ओर से बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच इन प्रस्तावों को कितना प्रभावी रूप दिया जाता है, यह आगे की सामूहिक कार्रवाई और देशों के बीच सहयोग पर निर्भर करेगा।



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