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मायावती का अखिलेश पर निशाना, पीडीए रथ के भगवा रंग को लेकर उठाए सवाल

by on | 2026-09-21 14:02:07

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मायावती का अखिलेश पर निशाना, पीडीए रथ के भगवा रंग को लेकर उठाए सवाल

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के पीडीए रथ के रंग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि रथ में सपा के पारंपरिक लाल रंग की तुलना में भगवा रंग अधिक दिखाई दे रहा है और इसे मुस्लिम मतदाताओं के बीच सपा की राजनीति से जोड़कर सवाल खड़े किए।

रंग और मुस्लिम मतदाताओं को लेकर सवाल

मायावती ने सामाजिक माध्यम पर साझा अपनी पोस्ट में पूछा कि क्या सपा लगातार अपनी राजनीतिक छवि में बदलाव कर मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है या उसे मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन का भरोसा कम हो गया है।

उन्होंने मुस्लिम समाज से पिछले चुनावों के अनुभवों पर विचार करने की अपील भी की। मायावती का कहना है कि मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन के बावजूद सपा भाजपा को सत्ता में आने से नहीं रोक सकी। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में बार-बार सपा को समर्थन देने का क्या लाभ हुआ।

सपा के पीडीए पर भी निशाना

मायावती ने सपा के पीडीए को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी परिस्थितियों के अनुसार पीडीए की अलग-अलग व्याख्या की गई और कभी इसे पिछड़ा-दलित तो कभी पंडित से जोड़कर पेश किया गया।

उन्होंने सपा द्वारा खुद को अंबेडकरवादी विचारधारा से जोड़ने के प्रयासों पर भी टिप्पणी की और बसपा के नीले रंग का उल्लेख करते हुए अपनी पार्टी की विचारधारा से तुलना की।

शासन के रिकॉर्ड का भी किया जिक्र

बसपा प्रमुख ने अपने बयान में सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था और विकास को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बसपा शासन में अपराध नियंत्रण, शांति-व्यवस्था, जनकल्याण और विकास के क्षेत्र में बेहतर काम किया गया था।

मायावती की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो रहे हैं। सपा की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया इस सामग्री में सामने नहीं आई है।

बेबाक24 की राय

मायावती के बयान में मुख्य रूप से सपा की राजनीतिक रणनीति, पीडीए की अवधारणा और मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन दावों के राजनीतिक प्रभाव का आकलन चुनावी माहौल, संबंधित दलों के जवाब और मतदाताओं के वास्तविक रुझानों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के पीडीए रथ के रंग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि रथ में सपा के पारंपरिक लाल रंग की तुलना में भगवा रंग अधिक दिखाई दे रहा है और इसे मुस्लिम मतदाताओं के बीच सपा की राजनीति से जोड़कर सवाल खड़े किए।

रंग और मुस्लिम मतदाताओं को लेकर सवाल

मायावती ने सामाजिक माध्यम पर साझा अपनी पोस्ट में पूछा कि क्या सपा लगातार अपनी राजनीतिक छवि में बदलाव कर मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है या उसे मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन का भरोसा कम हो गया है।

उन्होंने मुस्लिम समाज से पिछले चुनावों के अनुभवों पर विचार करने की अपील भी की। मायावती का कहना है कि मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन के बावजूद सपा भाजपा को सत्ता में आने से नहीं रोक सकी। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में बार-बार सपा को समर्थन देने का क्या लाभ हुआ।

सपा के पीडीए पर भी निशाना

मायावती ने सपा के पीडीए को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी परिस्थितियों के अनुसार पीडीए की अलग-अलग व्याख्या की गई और कभी इसे पिछड़ा-दलित तो कभी पंडित से जोड़कर पेश किया गया।

उन्होंने सपा द्वारा खुद को अंबेडकरवादी विचारधारा से जोड़ने के प्रयासों पर भी टिप्पणी की और बसपा के नीले रंग का उल्लेख करते हुए अपनी पार्टी की विचारधारा से तुलना की।

शासन के रिकॉर्ड का भी किया जिक्र

बसपा प्रमुख ने अपने बयान में सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था और विकास को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बसपा शासन में अपराध नियंत्रण, शांति-व्यवस्था, जनकल्याण और विकास के क्षेत्र में बेहतर काम किया गया था।

मायावती की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो रहे हैं। सपा की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया इस सामग्री में सामने नहीं आई है।

बेबाक24 की राय

मायावती के बयान में मुख्य रूप से सपा की राजनीतिक रणनीति, पीडीए की अवधारणा और मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन दावों के राजनीतिक प्रभाव का आकलन चुनावी माहौल, संबंधित दलों के जवाब और मतदाताओं के वास्तविक रुझानों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के पीडीए रथ के रंग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि रथ में सपा के पारंपरिक लाल रंग की तुलना में भगवा रंग अधिक दिखाई दे रहा है और इसे मुस्लिम मतदाताओं के बीच सपा की राजनीति से जोड़कर सवाल खड़े किए।

रंग और मुस्लिम मतदाताओं को लेकर सवाल

मायावती ने सामाजिक माध्यम पर साझा अपनी पोस्ट में पूछा कि क्या सपा लगातार अपनी राजनीतिक छवि में बदलाव कर मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है या उसे मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन का भरोसा कम हो गया है।

उन्होंने मुस्लिम समाज से पिछले चुनावों के अनुभवों पर विचार करने की अपील भी की। मायावती का कहना है कि मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन के बावजूद सपा भाजपा को सत्ता में आने से नहीं रोक सकी। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में बार-बार सपा को समर्थन देने का क्या लाभ हुआ।

सपा के पीडीए पर भी निशाना

मायावती ने सपा के पीडीए को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी परिस्थितियों के अनुसार पीडीए की अलग-अलग व्याख्या की गई और कभी इसे पिछड़ा-दलित तो कभी पंडित से जोड़कर पेश किया गया।

उन्होंने सपा द्वारा खुद को अंबेडकरवादी विचारधारा से जोड़ने के प्रयासों पर भी टिप्पणी की और बसपा के नीले रंग का उल्लेख करते हुए अपनी पार्टी की विचारधारा से तुलना की।

शासन के रिकॉर्ड का भी किया जिक्र

बसपा प्रमुख ने अपने बयान में सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था और विकास को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बसपा शासन में अपराध नियंत्रण, शांति-व्यवस्था, जनकल्याण और विकास के क्षेत्र में बेहतर काम किया गया था।

मायावती की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो रहे हैं। सपा की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया इस सामग्री में सामने नहीं आई है।

बेबाक24 की राय

मायावती के बयान में मुख्य रूप से सपा की राजनीतिक रणनीति, पीडीए की अवधारणा और मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन दावों के राजनीतिक प्रभाव का आकलन चुनावी माहौल, संबंधित दलों के जवाब और मतदाताओं के वास्तविक रुझानों के आधार पर ही किया जा सकेगा।



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