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भारत पर 100% अमेरिकी शुल्क की आशंका, जयराम रमेश बोले- तुष्टिकरण से कभी लाभ नहीं

by admin@bebak24.com on | 2026-09-17 21:39:16

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भारत पर 100% अमेरिकी शुल्क की आशंका, जयराम रमेश बोले- तुष्टिकरण से कभी लाभ नहीं

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

रूस से भारत के कच्चे तेल आयात को लेकर अमेरिका में भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावनाओं के बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “तुष्टिकरण ने कभी लाभ नहीं दिया है और न ही कभी देगा।” यह टिप्पणी उन्होंने अमेरिका में रूस से जुड़े देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रावधान वाले विधेयक के पारित होने के बाद की।

किस प्रावधान को लेकर है चर्चा

जयराम रमेश ने सामाजिक माध्यम पर अपनी टिप्पणी के साथ वैश्विक व्यापार अनुसंधान पहल के निदेशक अजय श्रीवास्तव की एक पोस्ट भी साझा की। श्रीवास्तव के अनुसार, अमेरिकी विधेयक राष्ट्रपति को रूस के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के 5 सबसे बड़े खरीदारों से आने वाले सामान पर 100% तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार दे सकता है।

उनके आकलन में चीन के बाद रूस से कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार भारत है। ऐसे में भारत संभावित रूप से इस व्यवस्था के दायरे में आ सकता है।

भारत कितना रूसी तेल खरीदता है

अजय श्रीवास्तव के अनुसार, भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88% से अधिक हिस्सा आयात करता है। जुलाई 2026 में रूस से भारत को 7.27 अरब डॉलर का कच्चा तेल मिला, जो उस महीने भारत के कुल 14.21 अरब डॉलर के कच्चे तेल आयात का 51.1% था।

इसी अवधि में संयुक्त अरब अमीरात की हिस्सेदारी 10.8% और सऊदी अरब की 9.6% रही। इस आंकड़े के अनुसार भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से काफी अधिक रही।

चीन के मुकाबले भारत पर अधिक दबाव क्यों

श्रीवास्तव का कहना है कि चीन रूस से भारत की तुलना में अधिक कच्चा तेल खरीदता है, लेकिन अमेरिकी दबाव भारत पर अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है। उनके अनुसार, अमेरिका को चीन की ओर से संभावित जवाबी कार्रवाई की अधिक आशंका हो सकती है।

उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस के कदम को प्रतिबंधों के दायरे को व्यापारिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने वाली व्यवस्था के रूप में बताया है।

शुल्क बढ़ा तो असर कहां पड़ सकता है

भारत पर अतिरिक्त 100% शुल्क लागू होने की स्थिति में इसका असर दोनों देशों के व्यापार संबंधों और भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है। हालांकि, स्रोत में यह स्पष्ट नहीं है कि भारत पर ऐसा शुल्क कब और किन वस्तुओं पर वास्तव में लगाया जाएगा।

फिलहाल चर्चा अमेरिकी विधेयक में मौजूद प्रावधान और उसके संभावित इस्तेमाल को लेकर है।

बेबाक24 टेक

रूस से भारत के बड़े कच्चे तेल आयात के बीच अमेरिकी शुल्क की संभावित व्यवस्था व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े समीकरणों को महत्वपूर्ण बना सकती है। हालांकि संभावित शुल्क को लेकर अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन उपलब्ध अधिकारों का किस तरह और किन परिस्थितियों में इस्तेमाल करता है।



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